15% ब्याज का रिकॉर्ड नहीं मिला तो शामली गन्ना समिति में तालाबंदी की चेतावनी, 7 सितंबर से धरने पर हैं किसान

शामली के गन्ना किसानों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। करीब दो महीने से धरने पर बैठे किसानों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर साफ कह दिया है कि देरी से हुए गन्ना भुगतान पर मिलने वाले 15 प्रतिशत ब्याज का पूरा रिकॉर्ड उन्हें दिया जाए, नहीं तो वे शामली गन्ना समिति में तालाबंदी करने को मजबूर होंगे। यह मामला उन हजारों किसानों से जुड़ा है जिनका भुगतान तय समय पर नहीं हुआ और ब्याज का हिसाब आज तक कागजों में अटका है।
किसान एकता संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी परमवीर शास्त्री के नेतृत्व में किसानों ने यह पत्र दिया है। उनका कहना है कि फसल समितियों के माध्यम से मिलों को दी जाती है, लेकिन भुगतान में देरी पर ब्याज का कोई पक्का हिसाब नहीं मिल रहा। नए पेराई सत्र से पहले किसान पहले पुराने पैसे का हिसाब चाहते हैं।
3 नवंबर को क्या हुआ: जिलाधिकारी को शिकायती पत्र
ताजा घटनाक्रम 3 नवंबर का है। किसानों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर शामली गन्ना समिति से ब्याज का रिकॉर्ड दिलाने की मांग की है। किसानों का आरोप है कि ब्याज का रिकॉर्ड पाने के लिए वे 7 सितंबर 2026 से समिति पर लगातार धरना दे रहे हैं, फिर भी पूरा हिसाब नहीं मिल पाया है।
किसानों ने चेतावनी दी है कि रिकॉर्ड न मिलने पर वे समिति में तालाबंदी करेंगे। यानी मांग अब ज्ञापन से आगे बढ़कर आंदोलन के अगले चरण की चेतावनी बन गई है।
14 दिन का नियम और 15 प्रतिशत ब्याज: कानून क्या कहता है
गन्ना भुगतान का नियम सीधा है। मिलों को किसानों से गन्ना लेने के 14 दिनों के भीतर भुगतान करना होता है। देरी होने पर उस देरी पर ब्याज देय हो जाता है। किसानों का तर्क है कि यही नियम उनकी सबसे बड़ी सुरक्षा है, क्योंकि खेती की लागत, बच्चों की फीस और घर के खर्च सब इसी भुगतान पर टिके होते हैं।
शिकायती पत्र में किसानों ने दावा किया है कि 16 जुलाई 2026 को उच्च न्यायालय ने पेराई सत्र 1996-97 से 2025-26 तक 14 दिन से अधिक देरी से हुए भुगतान पर 15 प्रतिशत ब्याज देने का आदेश दिया है। यह तारीख और दायरा किसानों के पत्र के दावे के रूप में सामने आया है। अदालतों का हालिया रुख भी 15 प्रतिशत ब्याज के नियम को ही दोहराता है।
अदालतों ने क्या कहा: 1,936 करोड़ रुपये का मामला
प्रकाशित खबरों के अनुसार इलाहाबाद उच्च न्यायालय में बकाया वसूली प्रमाणपत्रों के तहत कुल 1,936 करोड़ रुपये की वसूली बाकी थी, जिसमें 1,087 करोड़ रुपये मूल बकाया और 849.5 करोड़ रुपये ब्याज शामिल था। अदालत ने टिप्पणी की थी कि ब्याज के मद में अब तक एक पैसा भी वसूल नहीं किया गया है, और 15 प्रतिशत तय होने के बावजूद प्रमाणपत्रों में 12 प्रतिशत ब्याज की गणना पर नाराजगी जताई थी।
इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में कहा कि आर्थिक संकट से जूझ रही मिलों पर 15 प्रतिशत ब्याज का दबाव उन्हें दिवालिया कर सकता है। सर्वोच्च न्यायालय ने 6 अक्टूबर को यह दलील स्वीकार नहीं की और दोहराया कि 14 दिनों में भुगतान और देरी पर 15 प्रतिशत ब्याज किसानों को कर्ज के जाल से बचाने का अनिवार्य सुरक्षा उपाय है।
7 सितंबर से धरना: 27 अक्टूबर को क्या आश्वासन मिला था
शामली का यह धरना नया नहीं है। किसान 7 सितंबर 2026 से शामली गन्ना सहकारी समिति परिसर में बकाया भुगतान और ब्याज का वर्षवार हिसाब सार्वजनिक कराने की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं। धरने को दो महीने होने वाले हैं, और मांग तब से एक ही है कि हर साल का हिसाब अलग-अलग, लिखित रूप में दिया जाए।
किसानों के अनुसार 27 अक्टूबर को समिति के सचिव ने बताया था कि एक साल का रिकॉर्ड तैयार है, जबकि शेष दो वर्षों का रिकॉर्ड एक सप्ताह में दे दिया जाएगा। वह एक सप्ताह बीत चुका है, इसलिए 3 नवंबर को किसान जिलाधिकारी तक शिकायत लेकर पहुंचे हैं।
थानाभवन मिल का 71 करोड़ और 5 नवंबर की पेराई
इस विवाद की पृष्ठभूमि में थानाभवन चीनी मिल का बकाया भी है। थानाभवन मिल पर किसानों का करीब 71 करोड़ रुपये बकाया है, फिर भी मिल 5 नवंबर से पेराई शुरू करने की तैयारी में है। मिल प्रबंधन का कहना है कि मरम्मत पूरी हो चुकी है और सभी 72 गन्ना खरीद केंद्र स्थापित कर दिए गए हैं। जिला गन्ना अधिकारी ने मिल को जल्द भुगतान के निर्देश भी दिए हैं।
किसानों का सवाल है कि जब पिछले सत्र का भुगतान ही नहीं मिला तो नए सत्र में गन्ना देने का भरोसा किस बात पर करें। शामली और ऊन मिलों के भी नवंबर में चालू होने की संभावना है। ऐसे में ब्याज का रिकॉर्ड नए सत्र में किसानों के भरोसे का सवाल भी बन गया है।
2026-27 के गन्ना मूल्य की स्थिति: घोषणा अभी बाकी है
पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य यानी एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है। पिछले सत्र 2025-26 के लिए अगेती किस्म का मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म का मूल्य 390 रुपये प्रति क्विंटल था, लेकिन इसे नए सत्र की दर न समझें। बरेली मंडल में 3 नवंबर को ही 500 रुपये लाभकारी मूल्य की मांग को लेकर धरने की घोषणा हो चुकी है।
किसान अब क्या करें: अपना ब्याज का हिसाब कैसे मांगें
ब्याज का हिसाब चाहने वाले किसान सबसे पहले अपनी समिति में लिखित आवेदन दें। उसमें पेराई सत्र, गन्ना देने की तारीख, भुगतान की तारीख और देरी की अवधि साफ लिखें। मौखिक आश्वासन के बजाय हर जवाब लिखित में लें और उसकी प्रति अपने पास रखें।
अपनी पर्ची और भुगतान की रसीदें संभालकर रखें, क्योंकि ब्याज का हिसाब इन्हीं तारीखों से बनता है। जवाब न मिलने पर जिला गन्ना अधिकारी और जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं। ब्याज दिलाने के नाम पर किसी को पैसे न दें, क्योंकि यह हिसाब आधिकारिक प्रक्रिया से ही मिलता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गन्ना भुगतान में देरी पर कितना ब्याज मिलता है? मिलों को 14 दिनों के भीतर भुगतान करना होता है। देरी पर 15 प्रतिशत ब्याज का प्रावधान है, जिसे अदालतों ने अनिवार्य सुरक्षा उपाय बताया है।
शामली के किसान तालाबंदी की चेतावनी क्यों दे रहे हैं? 7 सितंबर से धरने के बावजूद उन्हें ब्याज का पूरा वर्षवार रिकॉर्ड नहीं मिला है। 27 अक्टूबर को एक साल का रिकॉर्ड तैयार होने की बात कही गई थी, लेकिन शेष वर्षों का हिसाब अब तक नहीं दिया गया है।
क्या ब्याज का नियम सिर्फ शामली के किसानों पर लागू है? नहीं, 14 दिन में भुगतान और देरी पर ब्याज का नियम सभी गन्ना किसानों पर लागू होता है। शामली का मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि वहां किसानों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र दिया है।
2026-27 सत्र का गन्ना मूल्य क्या है? 2026-27 सत्र के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 में अगेती का मूल्य 400 रुपये और सामान्य का 390 रुपये प्रति क्विंटल था।
थानाभवन मिल कब से पेराई शुरू कर रही है? थानाभवन चीनी मिल 5 नवंबर से पेराई शुरू करने की तैयारी में है, जबकि उस पर करीब 71 करोड़ रुपये बकाया बताया जा रहा है।
स्रोत: रॉयल बुलेटिन (3 नवंबर 2026), अमर उजाला (1 नवंबर 2026), चीनीमंडी, किसान तक।
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