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15 अक्टूबर से शुरू होगी शरदकालीन गन्ना बुवाई: 8 काम आज से कर लें, बीज दर से पहली सिंचाई तक पूरी गाइड

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 1, 2026 • 6 min read
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15 अक्टूबर से शुरू होगी शरदकालीन गन्ना बुवाई: 8 काम आज से कर लें, बीज दर से पहली सिंचाई तक पूरी गाइड
अंतिम अपडेट: October 1, 2026 11:05 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

अक्टूबर का महीना उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए साल का सबसे अहम फैसला लेकर आता है — इस बार खेत में कौन-सा बीज लगेगा और किस विधि से। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार शरदकालीन गन्ने की बुवाई का सबसे अच्छा समय 15 से 30 अक्टूबर के बीच है, और बुवाई से पहले किए गए कुछ छोटे काम ही तय करते हैं कि उपज कितनी होगी। इस लेख में वैज्ञानिक सिफारिशों के आधार पर शरदकालीन गन्ना बुवाई के 8 जरूरी काम बता रहे हैं — बीज के चयन से लेकर पहली सिंचाई तक।

1. बुवाई का सही समय: 15 से 30 अक्टूबर सबसे श्रेष्ठ

कृषि जागरण के अनुसार शरदकालीन गन्ने की बुवाई के लिए 15 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक का समय सबसे श्रेष्ठ है। फार्म एंड फूड की सलाह के मुताबिक अक्टूबर का पहला पखवाड़ा भी ठीक है। गन्ने के अच्छे जमाव के लिए 27 से 32 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान उपयुक्त रहता है, और अक्टूबर की यही जलवायु अंकुरण में सबसे ज्यादा मदद करती है।

2. बीज का चयन: आंख पूरी विकसित होनी चाहिए

गन्ना बीज चुनते समय तीन बातें देखें — बीज उन्नत प्रजाति का हो, शुद्ध हो और रोगरहित हो। गन्ने की आंख पूरी तरह विकसित और फूली हुई होनी चाहिए। जिस गन्ने का छोटा कोर हो, जिसमें फूल आ गए हों या जड़ें निकल आई हों — ऐसा गन्ना बीज के तौर पर न लें। पिछले साल सर्दी में बोए गए गन्ने का बीज लेना अच्छा रहता है। गन्ने का एक तिहाई ऊपरी भाग बीज के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि इसमें ग्लूकोज अधिक होता है जिससे अंकुरण अच्छा होता है।

इस सीजन के लिए सरकारी बीज कार्यक्रमों में Co 15023, Co 0118 और CoS 13235 जैसी नई किस्में शामिल हैं। गन्ने की नई किस्मों के बारे में विस्तार से यहां पढ़ें — किस्म का चयन करते समय अपने क्षेत्र की मिट्टी और चीनी मिल की सलाह जरूर लें।

3. बीज उपचार: 15 मिनट की प्रक्रिया, बीमारी से पूरी सुरक्षा

बोने से पहले दो या तीन आंख वाले टुकड़े काट लें। कृषि जागरण की सिफारिश के मुताबिक 1000 लीटर पानी में 500 ग्राम कार्बेन्डाजिम, 2000 मिलीलीटर मैलाथियान और 5 से 7 किलो यूरिया के घोल में टुकड़ों को कम से कम 15 मिनट भिगोएं। इससे बीज में छिपे फफूंद और कीट मर जाते हैं और अंकुरण एक जैसा होता है।

बीज दर का ध्यान रखें: तीन आंख वाले 14 से 16 हजार टुकड़े प्रति एकड़, और दो आंख वाले 20 से 24 हजार टुकड़े प्रति एकड़ पर्याप्त हैं। पतली बुवाई से पौधों की संख्या कम रह जाती है और उपज सीधे घट जाती है। गन्ना बीज उपचार की पूरी विधि यहां जानें।

4. खेत की तैयारी: नमी और खाद सबसे पहले

एक बार मिट्टी पलटने वाले हल से जोतकर दो से तीन बार हैरो चलाएं। देशी हल की 3 से 4 जुताइयां भी उपयुक्त हैं। बुवाई के समय खेत में नमी होना बहुत जरूरी है — बहुत सूखे खेत में अंकुरण कमजोर होगा, और पानी भरे खेत में बीज सड़ जाएगा। दोमट मिट्टी गन्ने के लिए सबसे अच्छी है। क्षारीय-अम्लीय भूमि या जहां पानी का जमाव होता हो, वहां गन्ना न बोएं।

फार्म एंड फूड की सलाह के अनुसार खेत की तैयारी के समय ट्राईकोडर्मा मिला हुआ प्रेसमड गोबर की खाद 10 टन प्रति हेक्टेयर जरूर डालें। यह मिट्टी में लाभकारी जीवाणु बढ़ाती है और जड़ संबंधी बीमारियों से पौधों की रक्षा करती है।

5. बुवाई की विधि: ट्रेंच विधि से अधिक उपज

शरदकालीन गन्ने की बुवाई अधिकतर रेजर (नाली) विधि से होती है, लेकिन कृषि विज्ञानियों के अनुसार ट्रेंच विधि से बोए गए गन्ने की उपज अधिक होती है। ट्रेंच ओपनर से एक फीट चौड़ी और 25 से 30 सेंटीमीटर गहरी नाली बनाएं, दो नालियों के बीच 120 सेंटीमीटर दूरी रखें। ट्रेंच में बोए गन्ने के बीच सरसों, आलू या मूंग की अंतः फसल लेकर अतिरिक्त लाभ लिया जा सकता है।

ट्रेंच विधि में उर्वरक नाली के सबसे नीचे डाला जाता है, फिर बीज रखा जाता है और हल्की मिट्टी से ढका जाता है। इससे जड़ों को खाद सीधे मिलती है और पानी की बचत भी होती है।

6. उर्वरक की सही मात्रा: बुवाई के समय आधा खेल यहीं जीता जाता है

एक एकड़ के लिए 113 किलो नाइट्रोजन, 32 किलो फास्फोरस, 72 किलो पोटाश और 10 किलो जिंक सल्फेट की सिफारिश है। नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फास्फोरस, पोटाश व जिंक सल्फेट की पूरी मात्रा बुवाई के समय ही डाल दें। बची नाइट्रोजन फसल बढ़ने के साथ दो हिस्सों में दें। मिट्टी परीक्षण की रिपोर्ट का पालन सबसे अच्छा रहता है।

उर्वरक की खरीद में कालाबाजारी या मिलावट की शिकायत गन्ना विकास विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 पर दे सकते हैं। ध्यान रहे, केंद्र ने 2026-27 के लिए एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जबकि यूपी में 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है (2025-26 में अगेती गन्ने का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल था)। एफआरपी और एसएपी का अंतर यहां समझें।

7. पहली सिंचाई: बुवाई के 30-40 दिन बाद

पहली सिंचाई बुवाई के 30 से 40 दिन बाद करें। अक्टूबर-नवंबर में 15 से 20 दिन के अंतराल पर सिंचाई पर्याप्त है। नाली को आधे भरने तक ही भरें — बीज पूरी तरह डूबने से अंकुरण खराब होता है।

जिन किसानों के पास ड्रिप सिंचाई है, उन्हें अक्टूबर-नवंबर में पानी की बचत और बराबर नमी का दोहरा फायदा मिलता है। गन्ने में ड्रिप सिंचाई पर 90 प्रतिशत अनुदान की जानकारी यहां देखें।

8. कीट-रोग से बचाव: दीमक और अंकुर बेधक पर नजर

जिन खेतों में दीमक की समस्या है या अंकुर बेधक कीट का प्रकोप होता है, वहां बुवाई के समय ही रोकथाम करें। फार्म एंड फूड की सलाह के मुताबिक क्लोरोपाइरीफास 6.2 ईसी 5 लीटर प्रति हेक्टेयर, या फ्लोरेंटो नीपोल 8.5 ईसी 500 से 600 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर को 1500 से 1600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। पत्तियों पर पीले धब्बे या तने में छेद दिखे तो तुरंत चीनी मिल के गन्ना पर्यवेक्षक से सलाह लें।

पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: शरदकालीन गन्ने की बुवाई का सबसे अच्छा समय कौन-सा है? उत्तर: 15 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक का समय सबसे श्रेष्ठ है। अक्टूबर के पहले पखवाड़े में भी बुवाई की जा सकती है। जमाव के लिए 27 से 32 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान उपयुक्त रहता है।

प्रश्न: एक एकड़ में कितने बीज के टुकड़े चाहिए? उत्तर: तीन आंख वाले 14 से 16 हजार टुकड़े, या दो आंख वाले 20 से 24 हजार टुकड़े प्रति एकड़ पर्याप्त हैं।

प्रश्न: बुवाई के समय कितना उर्वरक डालें? उत्तर: प्रति एकड़ 113 किलो नाइट्रोजन, 32 किलो फास्फोरस, 72 किलो पोटाश और 10 किलो जिंक सल्फेट की सिफारिश है। नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फास्फोरस-पोटाश-जिंक की पूरी मात्रा बुवाई पर डालें।

प्रश्न: पहली सिंचाई कब करनी चाहिए? उत्तर: बुवाई के 30 से 40 दिन बाद पहली सिंचाई करें। अक्टूबर-नवंबर में 15 से 20 दिन के अंतराल पर सिंचाई पर्याप्त है।

प्रश्न: ट्रेंच विधि रेजर विधि से बेहतर क्यों है? उत्तर: ट्रेंच विधि में जड़ों को खाद और पानी सीधे मिलता है, जिससे उपज अधिक होती है। नालियों के बीच सरसों, आलू या मूंग की अंतः फसल से अतिरिक्त आय भी मिलती है।

स्रोत: कृषि जागरण (Krishi Jagran), फार्म एंड फूड (Farm and Food), किसान इंडिया, चीनीमंडी। गन्ना विकास विभाग की आधिकारिक जानकारी के लिए देखें: upcane.gov.in

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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