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शरदकालीन गन्ने की ट्रेंच बुवाई के साथ सरसों-आलू की सह-फसली खेती, प्रति एकड़ 25 हजार अतिरिक्त आय का फॉर्मूला

Randhir Patil Randhir Patil Aug 30, 2026 3 min read
शरदकालीन गन्ने की ट्रेंच बुवाई के साथ सरसों-आलू की सह-फसली खेती, प्रति एकड़ 25 हजार अतिरिक्त आय का फॉर्मूला
अंतिम अपडेट: August 30, 2026 6:15 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

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शरदकालीन गन्ने की ट्रेंच बुवाई के साथ सरसों-आलू की सह-फसली खेती, प्रति एकड़ 25 हजार अतिरिक्त आय का फॉर्मूला

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Randhir Patil - 2026-08-30

लखनऊ/मुजफ्फरनगर (विशेष संवाददाता)। उत्तर प्रदेश में 15 सितंबर से शुरू होने वाली शरदकालीन गन्ना बुवाई (Autumn Cane Planting 2026) के लिए भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (आईआईएसआर लखनऊ) और यूपी गन्ना शोध परिषद ने संयुक्त वैज्ञानिक एडवाइजरी जारी की है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को पारंपरिक संकरी कतारों की जगह ‘ट्रेंच विधि’ (गहरी नाली विधि) अपनाकर 4 से 5 फीट की दूरी पर गन्ना बोने और बीच की खाली जगह में सरसों, आलू या मटर की सह-फसली खेती करने का सुझाव दिया है।

वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, शरदकालीन बुवाई में बसंतकालीन बुवाई की तुलना में 15 से 20 प्रतिशत अधिक पैदावार मिलती है और रिकवरी 0.5 प्रतिशत अधिक रहती है।

ट्रेंच बुवाई और सह-फसली खेती का आर्थिक मॉडल

आईआईएसआर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. ए.के. साह ने बताया कि जब गन्ने की दो लाइनों के बीच 4.5 से 5 फीट की दूरी रखी जाती है, तो गन्ने के पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है, जिससे गन्ने की मोटाई और वजन में 30% का इजाफा होता है।

वैज्ञानिक ने कहा, “गन्ने की लाइनों के बीच किसान सरसों की 2 कतारें या आलू की 1 कतार लगा सकते हैं। दिसंबर-जनवरी में जब तक गन्ना 3 फीट का होता है, तब तक सरसों या आलू की फसल पककर कट जाती है। इससे किसान को मुख्य गन्ने की फसल पर कोई असर पड़े बिना प्रति एकड़ 20,000 से 25,000 रुपये की शुद्ध अतिरिक्त आय मिल जाती है।”

सह-फसल का नामअनुशंसित प्रजातिबुवाई का समयपकने की अवधिअनुमानित अतिरिक्त आय (प्रति एकड़)
सरसों (Mustard)पूसा सरसों-30, आरएच-749सितंबर-अक्टूबर110 से 120 दिन₹20,000 से ₹25,000
अगेती आलू (Potato)कुफरी ख्याति, कुफरी पुखराजसितंबर अंत75 से 80 दिन₹30,000 से ₹35,000
हरी मटर (Green Peas)काशी नंदिनी, पूसा प्रगतिअक्टूबर प्रथम सप्ताह60 से 70 दिन₹18,000 से ₹22,000
चना/उड़द (Pulses)अवरोधी, पंत जी-186अक्टूबर90 दिन₹15,000 से ₹18,000

50 प्रतिशत पानी की बचत और पेड़ी का बेहतर फुटाव

ट्रेंच विधि में केवल नाली के अंदर ही पानी दिया जाता है, जिससे 50 प्रतिशत पानी की बचत होती है और खरपतवार नहीं पनपते।

इसके अलावा, अगले वर्ष जब गन्ने की कटाई होती है, तो ट्रेंच वाली फसल की पेड़ी में 25 से 30 प्रतिशत अधिक कल्ले (Tillers) निकलते हैं, जिससे पेड़ी फसल में अलग से लागत नहीं लगानी पड़ती।

भूमि की उर्वरा शक्ति और सूक्ष्म पोषक तत्वों में वृद्धि

वैज्ञानिक अध्ययनों से साबित हुआ है कि गन्ने के साथ दलहनी (मटर, चना) या तिलहनी (सरसों) फसलें लेने से मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation) बढ़ता है।

फसलों की पत्तियों के गलने से खेत में जैविक कार्बन का स्तर सुधरता है, जिससे गन्ने को अतिरिक्त यूरिया देने की आवश्यकता नहीं पड़ती और खेत की उर्वरा शक्ति कई वर्षों तक बनी रहती है।

पश्चिमी यूपी के अमरोहा जिले की चीनी मिलों जैसे चंदनपुर चीनी मिल, असमौली चीनी मिल और बेलवाड़ा चीनी मिल के विकास केंद्रों ने किसानों को ट्रेंच ओपनर और रेजर यंत्र किराए पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है।

किसान अपने सट्टे और किस्म की जानकारी enquiry.caneup.in पर देखें। आगामी सत्र के लिए गन्ना पर्ची कैलेंडर 2026-27 और ई-गन्ना ऐप डाउनलोड की सुविधा उपलब्ध है।

Randhir Patil
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Randhir Patil

गन्ना उद्योग विशेषज्ञ — ChiniMandi पर 425+ लेख। गन्ना खेती, शुगर मिल, MSP रेट, सरकारी योजनाओं पर विश्वसनीय जानकारी।

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