शरदकालीन गन्ने में गेहूं की सहफसली: 4 फीट ट्रेंच विधि से 16-18 क्विंटल अतिरिक्त उपज का फार्मूला

🚨 BREAKING: अक्टूबर में शरदकालीन गन्ना बोने वाले उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए इस बार खेत से दोहरी कमाई का सुनहरा मौका है। गन्ना विशेषज्ञों के अनुसार, अगर गन्ने की बुवाई 4 फीट की दूरी पर नाली (ट्रेंच) बनाकर की जाए और दो लाइनों के बीच गेहूं की तीन पंक्तियां बो दी जाएं, तो किसान एक ही खेत से गन्ने के साथ 16 से 18 क्विंटल तक गेहूं की अतिरिक्त उपज हासिल कर सकते हैं। इस विधि से गन्ने के उत्पादन में भी 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है, क्योंकि शरदकालीन गन्ने को बसंतकालीन गन्ने की तुलना में 2 से ढाई महीने का अतिरिक्त समय मिलता है।
क्यों खास है शरदकालीन गन्ने में सहफसली?
शरदकालीन गन्ने की बुवाई अक्टूबर में होती है, जबकि गन्ना एक लंबी अवधि की फसल है। बुवाई के बाद शुरुआती 3-4 महीनों में गन्ने की बढ़वार धीमी रहती है और दो लाइनों के बीच काफी खाली जगह बची रहती है। गन्ना विशेषज्ञों का कहना है कि इसी खाली जगह का सही इस्तेमाल करके किसान रबी की फसलें — गेहूं, सरसों, आलू, मसूर — उगा सकते हैं। गेहूं की फसल मार्च-अप्रैल में कट जाती है, जबकि गन्ना अगले अक्टूबर-नवंबर में पेराई के लिए तैयार होता है। इस तरह एक ही खेत, एक ही सिंचाई और एक ही तैयारी से दो फसलों की आमदनी मिलती है।
उत्तर प्रदेश गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र, पिपराइच (गोरखपुर) के पूर्व सहायक निदेशक एवं गन्ना विशेषज्ञ ओम प्रकाश गुप्ता के अनुसार, सहफसली खेती से खेत की उत्पादकता बढ़ने के साथ लागत में भी कमी आती है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। उन्होंने कुशीनगर के हाटा क्षेत्र के किसानों को इस विधि की पूरी तकनीक समझाई है।
4 फीट ट्रेंच विधि: बुवाई का सही तरीका
सहफसली के लिए गन्ने की बुवाई सामान्य विधि से नहीं, बल्कि 4 फीट की दूरी पर नाली बनाकर (ट्रेंच विधि) करनी चाहिए। विशेषज्ञों की सलाह:
- नाली की दूरी: गन्ने की दो लाइनों के बीच 4 फीट (लगभग 120 सेंटीमीटर) की दूरी रखें। नाली में गन्ने के टुकड़े बोएं।
- गेहूं की पंक्तियां: गन्ने की दो लाइनों के बीच की खाली पट्टी में गेहूं की 3 पंक्तियां बोएं। पंक्ति से पंक्ति की दूरी इतनी रखें कि निराई-गुड़ाई में दिक्कत न हो।
- बुवाई का समय: गन्ना अक्टूबर में बोएं और गेहूं नवंबर के पहले-दूसरे सप्ताह में। गेहूं की बुवाई बेड पर करने से गेहूं के उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- रोटावेटर से बचें: कृषि विशेषज्ञों की चेतावनी है कि गेहूं की बुवाई रोटावेटर से करने पर औसत उपज प्रभावित होती है। सीड ड्रिल या बेड प्लांटर का इस्तेमाल बेहतर रहता है।
बिजनौर में उत्तम शुगर मिल बरकातपुर के खुराहेड़ी कृषि फार्म पर आयोजित गोष्ठी में मिल के अधिशासी निदेशक शंकर लाल शर्मा और डॉ. डी.बी. फोन्डे ने बताया कि गेहूं के साथ गन्ना लगाने पर खेत की अलग से तैयारी नहीं करनी पड़ती, जिससे किसानों की लागत में सीधी बचत होती है।
कौन सी किस्में चुनें: गन्ना और गेहूं दोनों
गलत किस्म का चुनाव सहफसली को नुकसान पहुंचा सकता है। विशेषज्ञों ने अधिक उपज देने वाली ये किस्में सुझाई हैं:
गन्ने की किस्में:
- को 0118 — शीघ्र पकने वाली, अधिक चीनी रिकवरी
- को.शा. 13235 — नई उन्नत किस्म, रोग प्रतिरोधी
- को 16202 — अधिक उपज क्षमता
- को.लख. 14201 — पश्चिमी यूपी के लिए उपयुक्त
गेहूं की किस्में:
- डी.बी.डब्ल्यू. 187 और डी.बी.डब्ल्यू. 327 — अधिक उत्पादन देने वाली नई किस्में
- एच.डी. 2967 और एच.डी. 303 — किसानों के बीच आजमाई हुई भरोसेमंद किस्में
खाद और पोषक प्रबंधन: पूरा फार्मूला
सहफसली में दोनों फसलों को अलग-अलग पोषण चाहिए। विशेषज्ञों का सुझाया फार्मूला:
- गेहूं के लिए: बुवाई के समय एक एकड़ में 50 किलोग्राम एन.पी.एस. (20-20-0-13) और 30 किलोग्राम म्यूरिएट ऑफ पोटाश का प्रयोग करें।
- बीज दर: एक एकड़ गन्ने के बीच गेहूं की बुवाई के लिए केवल 25 किलोग्राम बीज पर्याप्त है।
- सल्फर: गेहूं, सरसों, आलू और मसूर में बुवाई के समय सोटा-सल्फर 80 प्रतिशत की 3 से 5 किलोग्राम प्रति एकड़ मात्रा अवश्य मिलाएं। सल्फर पौधों की बढ़वार, हरियाली और प्रकाश संश्लेषण तेज करता है, साथ ही कीटनाशक और फफूंदनाशक दोनों की तरह काम करता है।
- ह्यूमिक एसिड: जो किसान गोबर की सड़ी खाद का उपयोग नहीं करते, वे एक एकड़ में 500 ग्राम से 1 किलोग्राम ह्यूमिक एसिड (98 प्रतिशत) खाद में मिलाकर प्रयोग करें। इससे जड़ों का तेज विकास होता है और पौधे अधिक पोषक तत्व ग्रहण करते हैं।
कितना फायदा? हिसाब समझिए
- गेहूं की उपज: एक एकड़ से 16 से 18 क्विंटल तक गेहूं मिल सकता है — यह पूरी तरह अतिरिक्त आय है, गन्ने की उपज पर कोई असर नहीं पड़ता।
- गन्ने की उपज: शरदकालीन गन्ने को 2 से ढाई महीने का अतिरिक्त समय मिलने से गन्ना उत्पादन में 20 से 25 प्रतिशत बढ़ोतरी की संभावना है।
- लागत बचत: खेत की दोबारा तैयारी, जुताई और एक सिंचाई चक्र की बचत।
- खरपतवार नियंत्रण: आईसीएआर की रिपोर्ट के अनुसार विकासशील देशों में खरपतवारों से 20 से 30 प्रतिशत तक नुकसान होता है। सहफसली से खेत ढका रहता है, जिससे खरपतवार कम उगते हैं और खरपतवारनाशी का खर्च घटता है।
किन बातों का रखें ध्यान
- पानी का प्रबंधन: गेहूं को दिसंबर-जनवरी में 2-3 सिंचाई चाहिए, जबकि गन्ने को सर्दी में कम पानी। संतुलित सिंचाई करें, खेत में पानी न ठहरे।
- गेहूं कटाई के बाद: मार्च-अप्रैल में गेहूं कटते ही गन्ने की गुड़ाई करके मिट्टी चढ़ा दें — इससे गन्ने की बढ़वार तेज होगी।
- रोग-कीट निगरानी: सघन फसल में नमी अधिक रहती है, इसलिए पायरिला या काला चेंपा जैसे कीटों पर नजर रखें।
- किस्म का मिलान: अगेती गन्ना किस्मों के साथ ही सहफसली करें, ताकि पेराई के समय गन्ना पूरी तरह तैयार हो।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या गेहूं की सहफसली से गन्ने की उपज घटती है?
नहीं। विशेषज्ञों और मिल-स्तरीय परीक्षणों के अनुसार, सही दूरी (4 फीट) और 3 पंक्तियों की विधि से गन्ने की उपज घटने के बजाय 20-25 प्रतिशत बढ़ने की संभावना है, क्योंकि शरदकालीन गन्ने को अतिरिक्त समय मिलता है।
2. गेहूं की बुवाई कब तक करनी चाहिए?
गन्ना अक्टूबर में बोने के बाद गेहूं की बुवाई नवंबर के पहले-दूसरे सप्ताह तक पूरी कर लें। देरी से बुवाई पर गेहूं की उपज घटती है।
3. एक एकड़ में कितना गेहूं का बीज लगेगा?
केवल 25 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ पर्याप्त है, क्योंकि गेहूं गन्ने की लाइनों के बीच की पट्टी में ही बोया जाता है।
4. क्या इस विधि पर कोई सरकारी सब्सिडी मिलती है?
ट्रेंच विधि से बुवाई के लिए कई जिलों में गन्ना विभाग कृषि यंत्रों (ट्रेंच ओपनर, रिजर) पर अनुदान देता है। अपने जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय या गन्ना समिति से जानकारी लें।
5. गेहूं के अलावा कौन सी फसलें लगा सकते हैं?
सरसों/तोरिया, आलू, मसूर, चना, मटर और लहसुन भी शरदकालीन गन्ने के साथ सफलतापूर्वक उगाए जाते हैं। दलहनी फसलें मिट्टी में नाइट्रोजन भी बढ़ाती हैं।
स्रोत: दैनिक भास्कर (कुशीनगर/हाटा, गन्ना विशेषज्ञ ओम प्रकाश गुप्ता), लाइव हिंदुस्तान (बिजनौर, उत्तम शुगर मिल गोष्ठी, 26 नवंबर 2025), ज़ी बिज़नेस (आईसीएआर रिपोर्ट)।
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