सिंभावली के 184 केंद्र दूसरी मिलों को गए, 154 पहले ही बदले जा चुके: अब शेष केंद्रों के 7,000 किसानों का क्या होगा

हापुड़ जिले के सिंभावली चीनी मिल से जुड़े किसानों के लिए पेराई सत्र 2026-27 की सबसे बड़ी राहत और सबसे बड़ी उलझन एक साथ सामने आई है। गन्ना विभाग ने सिंभावली मिल के 184 क्रय केंद्र काटकर दूसरी मिलों को आवंटित कर दिए हैं, ताकि गन्ना समय पर तुल सके और भुगतान अटके नहीं। बीते वर्षों में 154 केंद्र पहले ही दूसरी मिलों को दिए जा चुके हैं। फिर भी गेट द्वार समेत शेष केंद्रों के करीब 7,000 किसान अब भी इस इंतजार में हैं कि उनका गन्ना किस मिल को जाएगा। इन केंद्रों के दायरे में 7,848 हेक्टेयर रकबा और 66.47 लाख क्विंटल गन्ना आता है।
दैनिक जागरण की 30 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रों के दूसरी मिलों को मिलने से किसानों में समय पर भुगतान की उम्मीद जगी है। भाकियू (अराजनैतिक) के जिलाध्यक्ष पवन हूण ने शेष केंद्रों को भी भुगतान करने वाली मिलों को देने की मांग उठाई है।
184 केंद्र क्यों काटे गए: भुगतान में देरी बनी वजह
सिंभावली मिल 2012-13 से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश की प्रतिष्ठित मिलों में गिनी जाती थी, लेकिन अब बंद होने की कगार पर है। भुगतान में देरी से किसानों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हुई है, और यही वजह है कि गन्ना आयुक्त के आदेश पर केंद्र काटे गए।
रॉयल बुलेटिन की 22 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, भुगतान में देरी के चलते 184 क्रय केंद्र काटे गए और इनसे जुड़े किसानों के गन्ने की आपूर्ति मेरठ, बुलंदशहर और गाजियाबाद की मिलों को कराने की व्यवस्था की जा रही है। इस रिपोर्ट में विभाग से जुड़ी जानकारी के हवाले से मिल पर किसानों का करीब 109 करोड़ रुपये का बकाया बताया गया है। नोटिस के बावजूद अपेक्षित भुगतान नहीं होने पर यह कदम उठाया गया।
बकाया रकम को लेकर रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े हैं: अमर उजाला की 25 अक्टूबर की रिपोर्ट में करीब 160 करोड़ रुपये, जबकि रॉयल बुलेटिन में करीब 109 करोड़ रुपये बताया गया है। किसी एक को अंतिम सत्य मानकर न चलें, अपने केंद्र का बकाया समिति से लिखित में जानें।

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केंद्रों के साथ गन्ने की ठोस मात्रा भी तय की गई है। दैनिक जागरण की 23 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, शासन ने मुरादाबाद मंडल की सात मिलों को मेरठ और बरेली मंडल के क्षेत्र से 110.52 लाख क्विंटल गन्ना और 76 केंद्र गन्ना सुरक्षण आदेश के तहत आवंटित किए हैं। मकसद दोहरा है: समय पर उत्पादन शुरू हो और किसानों को भुगतान समय से मिले।
उप गन्ना आयुक्त हरपाल सिंह के अनुसार, सिंभावली मिल के क्षेत्र से छह मिलों को गन्ना दिया गया है, जिसमें सबसे ज्यादा 30.38 लाख क्विंटल और 23 केंद्र बिजनौर की चांदपुर (चांगीपुर) मिल को मिले हैं। अगवानपुर, रजपुरा, असमोली, मझावली और चंदनपुर मिलों को भी 9 से 15 लाख क्विंटल के बीच गन्ना और 5 से 12 केंद्र मिले हैं। बरेली की बहेड़ी मिल के क्षेत्र से रामपुर की मिलक नरायनपुर मिल को 17.48 लाख क्विंटल और नौ केंद्र मिले हैं। रिपोर्ट में चेतावनी भी है कि जिन मिलों का क्षेत्र काटकर दिया गया है, उनकी भुगतान स्थिति खराब रही है, इसलिए बकाया राशि की नियमित निगरानी जरूरी होगी।
शेष केंद्र, 10 गांवों की मांग और साढ़े सात किलोमीटर का पेंच
जो केंद्र सिंभावली मिल के पास रह गए हैं, उनका सवाल अब भी खुला है। दैनिक जागरण की 30 अक्टूबर की रिपोर्ट में शेष केंद्रों के नाम दिए गए हैं: गेट द्वार, गन्दूनगला/नगलाबढ़, दत्तियाना, दरियापुर/कुराना, ढाना, खैय्या और माधापुर प्रथम। भाकियू ने गन्ना प्रमुख सचिव को ज्ञापन सौंपकर इन्हें भी समय पर भुगतान करने वाली मिलों को देने की मांग की है।
अमर उजाला की 25 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, सिंभावली और ब्रजनाथपुर मिल से जुड़े रह गए दस गांवों से भी केंद्र बदलने की मांग उठी है और ग्रामीणों ने समितियों में प्रस्ताव दिए हैं। लेकिन गन्ना विभाग के अनुसार ये गांव मिलों के साढ़े सात किलोमीटर की परिधि में आते हैं, जिस कारण प्रस्ताव रद्द हो गए थे। उसी रिपोर्ट के अनुसार, सिंभावली मिल पर सिर्फ छह और ब्रजनाथपुर मिल पर महज चार गांव जुड़े रह गए हैं, और मिल कर्मचारियों का करोड़ों रुपये का वेतन भी अटका हुआ है।
किसान अब क्या करें: पर्ची से पहले ये 4 काम जरूर करें
पेराई सत्र शुरू हो चुका है और केंद्र बदले गए हैं, इसलिए गन्ना लेकर निकलने से पहले चार काम जरूर कर लें। पहला, पर्ची और कैलेंडर पर दर्ज केंद्र का नाम दोबारा जांचें, क्योंकि पुरानी पर्ची पर सिंभावली का नाम हो सकता है जबकि आपका केंद्र अब दूसरी मिल को आवंटित हो चुका है। दूसरा, गन्ना समिति के सचिव या केंद्र प्रभारी से लिखित में पुष्टि करें कि आपका गन्ना किस मिल को जाएगा। तीसरा, तौल पर्ची और भुगतान की रसीद संभालकर रखें। चौथा, भुगतान तय समय पर न आए तो जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराएं। मदद के लिए सत्यापित हेल्पलाइन: टोल-फ्री 1800-121-3203 और 1800-180-5129, एसएमएस शॉर्टकोड 51969।
2026-27 एसएपी की घोषणा अब भी बाकी
केंद्र आवंटन के साथ-साथ किसानों की नजर गन्ना मूल्य की घोषणा पर भी टिकी है। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पेराई सत्र शुरू होने के बावजूद सरकार ने अभी तक 2026-27 सत्र के लिए गन्ने का मूल्य घोषित नहीं किया है। साफ शब्दों में: 2026-27 एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 के लिए अगेती किस्म का मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म का मूल्य 390 रुपये प्रति क्विंटल था। यह पिछले सत्र का भाव है, इसे नए सत्र का भाव मानकर गन्ना न बेचें। किसान संगठन कम से कम 500 रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ मांगों में 600 रुपये तक का भाव उठा है। चुनावी साल में 28 से 40 रुपये तक की बढ़ोतरी की चर्चा है, लेकिन यह चर्चा है, घोषणा नहीं।
जवाब जानिए
सिंभावली मिल के कितने क्रय केंद्र दूसरी मिलों को दिए गए हैं? गन्ना आयुक्त के आदेश पर 184 क्रय केंद्र काटकर दूसरी मिलों को आवंटित किए गए हैं। इससे पहले बीते वर्षों में 154 क्रय केंद्र पहले ही दूसरी मिलों को दिए जा चुके हैं।
मेरा गन्ना अब किस मिल को जाएगा, यह कैसे पता चलेगा? अपनी पर्ची और कैलेंडर पर दर्ज केंद्र का नाम जांचें और गन्ना समिति के सचिव या क्रय केंद्र प्रभारी से लिखित पुष्टि लें। केंद्र बदलने पर गन्ना आवंटित मिल को ही जाएगा, पुरानी मिल को नहीं।
मुरादाबाद मंडल की मिलों को कितना गन्ना मिला है? सात मिलों को कुल 110.52 लाख क्विंटल गन्ना और 76 केंद्र मिले हैं। सबसे ज्यादा 30.38 लाख क्विंटल और 23 केंद्र चांदपुर (चांगीपुर) मिल को मिले हैं।
2026-27 सत्र का गन्ना भाव क्या है? 2026-27 एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 में अगेती का भाव 400 रुपये और सामान्य किस्म का भाव 390 रुपये प्रति क्विंटल था। नया भाव घोषित होने तक पुराने भाव को नए सत्र का भाव न मानें।
भुगतान में देरी हो तो क्या करें? गन्ना समिति और जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराएं। मदद के लिए टोल-फ्री 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर संपर्क किया जा सकता है।
स्रोत: दैनिक जागरण (30 अक्टूबर 2026, 23 अक्टूबर 2026), अमर उजाला (25 अक्टूबर 2026), रॉयल बुलेटिन (22 अक्टूबर 2026), नवभारत टाइम्स।
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