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सॉइल हेल्थ कार्ड महा-अभियान — 45,000 गन्ना किसानों को मिले कार्ड, 60% मिट्टी में जैविक कार्बन की कमी

Aamir Raza Aamir Raza • Sep 4, 2026 • 3 min read
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सॉइल हेल्थ कार्ड महा-अभियान — 45,000 गन्ना किसानों को मिले कार्ड, 60% मिट्टी में जैविक कार्बन की कमी
अंतिम अपडेट: September 4, 2026 9:15 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

लखनऊ / मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के 45 गन्ना बाहुल्य जनपदों में संचालित 120 चीनी मिल क्षेत्रों में 2 सितंबर से शुरू हुए 3 दिवसीय ‘विशेष निःशुल्क मृदा स्वास्थ्य परीक्षण एवं सॉइल कार्ड वितरण महा-अभियान’ के समापन पर आज कृषि विभाग ने विस्तृत राज्यस्तरीय रिपोर्ट जारी की है। कृषि विभाग और गन्ना शोध संस्थानों द्वारा लगाए गए मोबाइल मृदा परीक्षण वैनों के माध्यम से मात्र 72 घंटों के भीतर 45,280 गन्ना किसानों के खेतों की मिट्टी की जांच कर उन्हें डिजिटल सॉइल हेल्थ कार्ड मौके पर ही वितरित किए गए हैं।

मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं द्वारा जारी आंकड़ों ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश और तराई बेल्ट की उपजाऊ मिट्टी के स्वास्थ्य को लेकर एक गंभीर चेतावनी भी दी है। परीक्षण में शामिल कुल 45,000 से अधिक नमूनों में से 62.4% खेतों की मिट्टी में जैविक कार्बन (Organic Carbon) का स्तर घटकर 0.35% से 0.40% के खतरनाक निचले स्तर पर आ चुका है, जबकि स्वस्थ मिट्टी में इसका स्तर कम से कम 0.75% से 0.80% होना चाहिए।

अंधाधुंध यूरिया और डीएपी के प्रयोग से बिगड़ा संतुलन

कृषि वैज्ञानिकों ने रिपोर्ट का विश्लेषण करते हुए बताया कि पिछले 10 वर्षों से गन्ना बेल्ट में केवल रासायनिक यूरिया और डीएपी का अत्यधिक उपयोग करने तथा गोबर की खाद न डालने के कारण मिट्टी का प्राकृतिक पीएच (pH) मान असंतुलित हो गया है। इसके अलावा 58% मिट्टी के नमूनों में जिंक (Zinc) और 44% में फेरस (लोहा) तथा सल्फर की भारी कमी पाई गई है। इसी सूक्ष्म पोषक तत्व असंतुलन के कारण गन्ने में लाल सड़न (Red Rot) और उकठा रोग तेजी से पांव पसार रहे हैं।

कृषि निदेशक उत्तर प्रदेश ने बताया, “सॉइल हेल्थ कार्ड मिलने से अब किसानों को पता चल गया है कि उनके खेत को किस खाद की वास्तविक जरूरत है। अधिकांश किसान बिना जरूरत के प्रति एकड़ 4-4 बोरी यूरिया डाल रहे थे, जिससे न केवल पैसा बर्बाद हो रहा था बल्कि गन्ने का तना नरम होकर कीटों का शिकार बन रहा था।”

वैज्ञानिकों द्वारा अनुशंसित 3 सूत्रीय मृदा सुधार उपाय

मृदा विशेषज्ञों ने आगामी शरदकालीन बुवाई के लिए किसानों को निम्नलिखित उपाय तत्काल अपनाने की सलाह दी है:

  1. प्रेसमड या सड़ी गोबर खाद का प्रयोग: बुवाई से पहले प्रति एकड़ 80 से 100 क्विंटल सड़ी गोबर की खाद या चीनी मिल की प्रेसमड कंपोस्ट अवश्य मिलाएं।
  2. सल्फर और जिंक का बेसल प्रयोग: बुवाई के समय प्रति एकड़ 10 किग्रा बेंटोनाइट सल्फर (90%) और 5 किग्रा चिलेटेड जिंक मिट्टी में डालें।
  3. हरी खाद (Green Manuring): रबी फसल के बाद मई-जून में ढैंचा या सनई बोकर मिट्टी में पलटें ताकि जैविक कार्बन बढ़ सके।

कृषि विभाग ने बताया कि जिन किसानों ने अभी तक मिट्टी की जांच नहीं कराई है, वे अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) में मात्र ₹20 के सरकारी शुल्क पर अपनी मिट्टी का नमूना जमा कर सकते हैं।

चीनी मिलों को प्रेसमड वितरण के निर्देश

गन्ना आयुक्त ने सभी चीनी मिलों को आदेश दिए हैं कि वे अपने बॉयलर की मैली और प्रेसमड को बाहर बेचने के बजाय स्थानीय किसानों को रियायती दर पर उपलब्ध कराएं ताकि खेतों की मिट्टी को पुनः जीवित किया जा सके।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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