1 अक्टूबर से चीनी की हर 50 किलो बोरी पर अनिवार्य होगा डिजिटल QR कोड, कालाबाजारी रोकने के लिए नया सिस्टम

1 अक्टूबर से चीनी की हर 50 किलो बोरी पर अनिवार्य होगा डिजिटल QR कोड, कालाबाजारी रोकने के लिए नया सिस्टम
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Aamir Raza - 2026-08-30
नई दिल्ली/लखनऊ (विशेष संवाददाता)। देश के चीनी वितरण तंत्र में पूर्ण पारदर्शिता लाने, मिलावट रोकने और जमाखोरों द्वारा की जाने वाली अवैध स्टॉक हेराफेरी को जड़ से खत्म करने के लिए केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने ऐतिहासिक निर्णय लिया है। आगामी 1 अक्टूबर 2026 से देश की सभी निजी, सहकारी और निगम चीनी मिलों द्वारा उत्पादित प्रत्येक 50 किलोग्राम चीनी की बोरी पर ‘डायनेमिक डिजिटल क्यूआर कोड’ (Digital QR Code Track and Trace) प्रिंट करना अनिवार्य कर दिया गया है।
राष्ट्रीय शर्करा संस्थान (एनएसआई कानपुर) के सहयोग से विकसित इस प्रणाली के तहत स्मार्टफोन से क्यूआर कोड स्कैन करते ही चीनी की पूरी जन्मकुंडली स्क्रीन पर आ जाएगी।
क्यूआर कोड स्कैन करने पर मिलेंगी ये 5 प्रमुख जानकारियां
- उत्पादक चीनी मिल का नाम व लाइसेंस नंबर: चीनी किस कारखाने और किस राज्य में बनाई गई है।
- उत्पादन और पैकिंग की सटीक तिथि व बैच नंबर: मिल से निकलने का वास्तविक समय।
- शर्करा की गुणवत्ता और ग्रेड: M-30, S-30 या L-30 ग्रेड की शुद्धता का लैब प्रमाणित डेटा।
- अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) व एक्स-मिल दर: ताकि बिचौलिये कृत्रिम रूप से दाम न बढ़ा सकें।
- जीएसटी और ई-वे बिल ट्रैकिंग लिंक: जिससे जीएसटी चोरी और बिना बिल की चीनी सप्लाई 100% रुक सके।
| वर्तमान व्यवस्था | 1 अक्टूबर से लागू नई QR कोड व्यवस्था |
|---|---|
| बोरी पर केवल सादा प्रिंटेड स्टैंसिल मार्क | प्रत्येक बोरी पर विशिष्ट और गैर-हटाने योग्य डिजिटल QR कोड |
| कालाबाजारी और अवैध स्टॉक का पता लगाना कठिन | स्मार्टफोन से स्कैन करते ही डिपो और डीलर की लोकेशन ट्रैक |
| मिलावटी चीनी और रि-पैकिंग का जोखिम | लैब टेस्टेड शुद्धता ग्रेड का सीधा डिजिटल प्रमाण |
| राज्यों के बीच टैक्स चोरी की संभावना | जीएसटी ई-वे बिल और ई-इनवॉइसिंग से रियल-टाइम इंटिग्रेशन |
जमाखोरों और सिंडिकेट्स पर सीधा प्रहार
खाद्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अक्सर त्योहारों के समय सट्टेबाज चीनी मिलों से बड़े लॉट उठाकर गुप्त वेयरहाउसों में छिपा देते थे और बाजार में कृत्रिम कमी दिखाकर दाम 60 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंचा देते थे।
अधिकारी ने कहा, “नए ट्रैक-एंड-ट्रेस सिस्टम से फूड कमिश्नर और प्रवर्तन टीमें किसी भी थोक मंडी या गोदाम में खड़ी चीनी की बोरी स्कैन करके यह पता लगा लेंगी कि वह बोरी किस व्यापारी को आवंटित हुई थी और वह 30 दिन से अधिक समय से डंप तो नहीं की गई है। नियम तोड़ने पर तत्काल जब्ती और लाइसेंस रद्दीकरण होगा।”
थोक व्यापारियों और खुदरा डीलरों के लिए प्रशिक्षण
केंद्रीय मंत्रालय ने सभी राज्यों के खाद्य एवं आपूर्ति विभागों को निर्देश दिया है कि वे 15 सितंबर से थोक व्यापारियों और मिल अधिकारियों के लिए विशेष डिजिटल प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित करें।
व्यापारियों को मोबाइल ऐप के जरिए क्यूआर कोड स्कैन करने, इनवर्ड एंट्री दर्ज करने और स्टॉक डिस्पैच करने का हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि 1 अक्टूबर से नए नियम का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन हो सके।
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले की चीनी मिलों समेत पश्चिमी यूपी की मिलों ने अपनी बैगिंग और पैकेजिंग लाइनों में स्वचालित क्यूआर कोड प्रिंटिंग मशीनें स्थापित करना शुरू कर दिया है।
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