चीनी निर्यात पर बैन 2026-27 सत्र में भी रहेगा जारी — एथेनॉल ब्लेंडिंग को प्राथमिकता, घरेलू कीमतों पर नियंत्रण का फैसला

नई दिल्ली (CaneUp विशेष ब्यूरो — 8 सितंबर, सुबह 6:50 बजे): केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने आगामी चीनी सत्र 2026-27 (अक्टूबर 2026 से सितंबर 2027) के लिए चीनी निर्यात नीति पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, देश में चीनी की खुदरा कीमतों को नियंत्रित रखने, त्योहारी मांग को पूरा करने और पेट्रोल में 20% एथेनॉल संमिश्रण (E20) के राष्ट्रीय लक्ष्य को समय पर हासिल करने के लिए चीनी निर्यात पर प्रतिबंध जारी रहेगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत इस सत्र में किसी भी सामान्य चीनी निर्यात कोटे (Open General Quota) की अनुमति नहीं देगा। केवल पड़ोसी मित्र देशों (जैसे मालदीव और नेपाल) को द्विपक्षीय सरकारी समझौतों के तहत सीमित मात्रा में ही चीनी भेजी जाएगी।
🛢️ 45 लाख टन चीनी को एथेनॉल में डायवर्ट करने का महा-प्लान
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और खाद्य मंत्रालय के संयुक्त रोडमैप के अनुसार, नए पेराई सत्र में लगभग 42 से 45 लाख टन चीनी को सीधे एथेनॉल उत्पादन में डायवर्ट किया जाएगा:
| माध्यम | एथेनॉल उत्पादन दर (रुपये/लीटर) | अपेक्षित डायवर्जन (LMT) | तेल कंपनियों का टेंडर |
|---|---|---|---|
| सीधे गन्ने का रस / सिरप (Cane Juice) | ₹65.61 / लीटर | 22 लाख टन | प्राथमिकता 1 |
| बी-हेवी मोलासिस (B-Heavy Molasses) | ₹60.73 / लीटर | 18 लाख टन | प्राथमिकता 2 |
| सी-हेवी मोलासिस (C-Heavy Molasses) | ₹56.28 / लीटर | 5 लाख टन | सामान्य आवंटन |
🏪 घरेलू बाजार में कीमतों की स्थिरता
सरकार का यह निर्णय घरेलू उपभोक्ताओं और मिष्ठान उद्योग के लिए बड़ी राहत लेकर आया है:
- त्योहारी सीजन में कोई कमी नहीं: रक्षाबंधन, जन्माष्टमी के बाद अब गणेशोत्सव, नवरात्रि और दिवाली पर देश में 85 लाख टन चीनी का मजबूत बफर स्टॉक मौजूद रहेगा।
- खुदरा भाव ₹42-₹45 के दायरे में रहेंगे: निर्यात पर रोक से जमाखोरों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंचे दामों पर चीनी बेचने का मौका नहीं मिलेगा, जिससे घरेलू बाजार में कीमतें नियंत्रित रहेंगी।
- किसानों को मिलेगा एथेनॉल का तेज पैसा: चीनी मिलों को एथेनॉल बेचने पर तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) से 21 दिनों में भुगतान मिलता है, जिससे मिलें किसानों का गन्ना भुगतान 14 दिनों के भीतर करने में सक्षम होंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि E20 लक्ष्य पूरा होने से देश को विदेशी मुद्रा की भारी बचत होगी और गन्ना किसानों को भविष्य में चीनी की वैश्विक मंदी का कोई नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।
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