त्योहारी सीजन से पहले चीनी MSP ₹38/किलो करने पर विचार — मिलों की तरलता बढ़ेगी, किसानों को 14 दिन में मिलेगा भुगतान

नई दिल्ली / लखनऊ (CaneUp आर्थिक विश्लेषण): आगामी त्योहारी सीजन (दशहरा, करवा चौथ और दिवाली) से पूर्व केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (Minimum Selling Price - MSP) को मौजूदा ₹31 प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर ₹38 से ₹39 प्रति किलोग्राम करने पर गंभीर विचार-विमर्श शुरू हो गया है।
गौरतलब है कि चीनी का एमएसपी वर्ष 2019 से यानी पिछले 7 वर्षों से ₹31 प्रति किलो पर फ्रीज है, जबकि इस दौरान केंद्र सरकार द्वारा गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) ₹275 से बढ़ाकर ₹340 प्रति क्विंटल और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) ₹370 से ₹400 प्रति क्विंटल तक पहुंच चुका है। लागत और बिक्री मूल्य के इस असंतुलन के चलते चीनी मिलों की तरलता (Liquidity) गंभीर रूप से प्रभावित हो रही थी।
📈 एमएसपी न बढ़ने से क्यों खड़ा हो रहा था भुगतान संकट?
भारतीय चीनी मिल संघ (ISMA) और नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) द्वारा नीति आयोग और वित्त मंत्रालय को सौंपी गई संयुक्त रिपोर्ट में निम्नलिखित वित्तीय आंकड़े पेश किए गए हैं:
| वर्ष | चीनी एमएसपी (रुपये/किग्रा) | गन्ना एफआरपी (रुपये/क्विंटल) | चीनी उत्पादन की वास्तविक लागत (रुपये/किग्रा) | मिलों पर वित्तीय घाटा |
|---|---|---|---|---|
| 2019 | ₹31.00 | ₹275.00 | ₹31.50 | संतुलित |
| 2021 | ₹31.00 | ₹290.00 | ₹34.00 | ₹3/किग्रा घाटा |
| 2023 | ₹31.00 | ₹315.00 | ₹37.50 | ₹6.50/किग्रा घाटा |
| 2026 (वर्तमान) | ₹31.00 (अपरिवर्तित) | ₹340.00 | ₹41.20 | ₹10.20/किग्रा भारी असंतुलन |
👨🌾 गन्ने के किसान को इस नीतिगत बदलाव से क्या मिलेगा?
अक्सर आम उपभोक्ताओं को लगता है कि चीनी एमएसपी बढ़ने से केवल मिलों को लाभ होगा, परंतु वस्तुतः चीनी उद्योग में वैधानिक व्यवस्था यह है कि चीनी बिक्री की 85% आय सीधे किसानों के गन्ना भुगतान खाते में जाती है:
- 14 दिनों में नकद भुगतान: जब मिलों को एक्स-मिल चीनी का न्यूनतम भाव ₹38 मिलेगा, तो उनके पास पर्याप्त कार्यशील पूंजी (Working Capital) रहेगी और किसानों को 14 दिन के भीतर सीधे बैंक खाते में भुगतान मिल सकेगा।
- अगले सत्र में ₹400+ SAP देने की क्षमता: मिलों का कैश-फ्लो सुधरने पर राज्य सरकारें आगामी सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) ₹400 से ₹415 प्रति क्विंटल तक घोषित करने की स्थिति में होंगी।
- एथेनॉल और बगास को-जेनरेशन का विस्तार: मिलें अपने हरित ऊर्जा प्रोजेक्ट्स पर बैंकों से सस्ता ऋण ले सकेंगी।
🛒 आम उपभोक्ता पर क्या पड़ेगा असर?
खाद्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, देश के प्रमुख थोक बाजारों (हापुड़, मुजफ्फरनगर, कानपुर, मुंबई) में चीनी पहले से ही ₹42 से ₹46 प्रति किलो के भाव पर बिक रही है। एमएसपी ₹38 किए जाने से खुदरा बाजार में कीमतों पर कोई असामान्य उछाल नहीं आएगा, बल्कि जमाखोरों द्वारा कृत्रिम कमी दिखाकर ₹60-₹70 प्रति किलो वसूलने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा।
मंत्रालय की समिति अगले सप्ताह कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) को अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपने जा रही है, जिस पर इसी माह अंतिम मुहर लगने की पूरी संभावना है।
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