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चीनी MSP 31 से बढ़ाकर 41 रुपये करने की मांग पर तकरार, मिलों की दलील बनाम सरकार का 10 लाख टन आयात फॉर्मूला

Aamir Raza Aamir Raza • Aug 30, 2026 • 3 min read
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चीनी MSP 31 से बढ़ाकर 41 रुपये करने की मांग पर तकरार, मिलों की दलील बनाम सरकार का 10 लाख टन आयात फॉर्मूला
अंतिम अपडेट: August 30, 2026 10:20 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

चीनी MSP 31 से बढ़ाकर 41 रुपये करने की मांग पर तकरार, मिलों की दलील बनाम सरकार का 10 लाख टन आयात फॉर्मूला

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Aamir Raza - 2026-08-30

नई दिल्ली/लखनऊ (विशेष संवाददाता)। देश के चीनी उद्योग और केंद्र सरकार के बीच चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) को लेकर रस्साकशी जारी है। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) और राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ ने सरकार से चीनी का न्यूनतम एक्स-मिल भाव 31 रुपये से बढ़ाकर 38 से 41 रुपये प्रति किलो तय करने की मांग की है।

चीनी की एमएसपी फरवरी 2019 से यानी साढ़े सात वर्षों से 31 रुपये प्रति किलोग्राम पर अपरिवर्तित है, जबकि इस अवधि में गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 30 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुका है।

मिलों की दलील: ‘लागत 40 रुपये, तो एमएसपी 31 क्यों?’

इस्मा के महानिदेशक ने मंत्रालय को भेजे ज्ञापन में कहा है, “केंद्र सरकार ने पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का एफआरपी बढ़ाकर 365 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। 10.25 प्रतिशत की औसत रिकवरी पर चीनी की वास्तविक उत्पादन लागत 40.80 रुपये प्रति किलो आ रही है। बैंक पुरानी एमएसपी के आधार पर ही वर्किंग कैपिटल लिमिट तय करते हैं। यदि एमएसपी नहीं बढ़ी, तो मिलों के पास नकदी की कमी होगी और किसानों के गन्ना भुगतान पर असर पड़ेगा।”

वर्षगन्ना एफआरपी (प्रति क्विंटल)चीनी एमएसपी (प्रति किलो)औसत उत्पादन लागत (प्रति किलो)
2019₹275₹31.00₹32.50
2021₹290₹31.00₹34.80
2024₹340₹31.00₹38.20
2026-27₹365₹31.00 (यथावत)₹40.80

सरकार का रुख: महंगाई पर नियंत्रण प्राथमिकता

खाद्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता खुदरा बाजार में चीनी की कीमतें स्थिर रखना है। हाल ही में कीमतें 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने पर सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के रियायती आयात की अनुमति दी है।

अधिकारियों का तर्क है कि वर्तमान में थोक बाजार में चीनी 38 से 42 रुपये प्रति किलो के बीच बिक रही है, जिससे मिलों को नकदी का संकट नहीं है। इसके अलावा मिलें एथेनॉल की बिक्री से भी अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं।

किसान यूनियनों की नजर राज्य परामर्शित मूल्य पर

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने इस मुद्दे पर कहा, “यदि केंद्र सरकार मिलों के दबाव में चीनी की एमएसपी बढ़ाती है, तो उत्तर प्रदेश सरकार को भी तत्काल प्रभाव से गन्ने का एसएपी कम से कम 400 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करना होगा। चीनी मिलों को राहत मिले और किसान लागत के बोझ तले दबता रहे, यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

सह-उत्पादों से मिलने वाली राहत और चुनौतियां

चीनी मिलों का कहना है कि एथेनॉल और सह-उत्पादों से नकदी तो मिल रही है, लेकिन कुल राजस्व का 70 प्रतिशत हिस्सा आज भी सफेद चीनी की बिक्री से ही आता है। जब तक चीनी की एक्स-मिल दरें लागत के अनुरूप नहीं होंगी, तब तक छोटे और मध्यम आकार के चीनी कारखानों के लिए वित्तीय स्थिरता बनाए रखना कठिन होगा।

बैंकिंग जानकारों का कहना है कि एमएसपी में 7 से 8 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी से चीनी मिलों की वर्किंग कैपिटल लिमिट में लगभग 15,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त इजाफा होगा, जिसका सीधा फायदा समय पर किसानों के भुगतान के रूप में दिखेगा।

पश्चिमी यूपी के अमरोहा जिले की 16 मिलों के किसान भाई अपने सट्टे का विवरण enquiry.caneup.in पर देख सकते हैं। आगामी सत्र के लिए गन्ना पर्ची कैलेंडर 2026-27 की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध करा दी गई है।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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