कल से नया चीनी सत्र 2026-27 शुरू: गन्ने का रकबा घटा, भाव पर सबकी नजर — किसानों के लिए क्या बदलेगा

आज 30 सितंबर 2026 है, और उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए यह तारीख एक अध्याय का समापन लेकर आई है। आज रात 12 बजते ही 2025-26 का चीनी सत्र औपचारिक रूप से समाप्त हो जाएगा, और कल यानी 1 अक्टूबर 2026 से नया चीनी सत्र 2026-27 शुरू हो जाएगा। चीनी उद्योग में सत्र की गिनती हर साल 1 अक्टूबर से 30 सितंबर तक होती है, और इसी हिसाब से कल से किसानों, चीनी मिलों और सरकार — तीनों के लिए नया खाता खुलेगा।
नया सत्र आमतौर पर एक नई उम्मीद लेकर आता है, लेकिन इस बार कुछ चिंताजनक संकेत भी साथ आए हैं। प्रमुख चीनी उत्पादक जिलों में गन्ने का रकबा घटा है, सरकार मिलों पर जल्दी पेराई शुरू करने का दबाव बना रही है, और नए सत्र का गन्ना भाव (SAP) अभी तक घोषित नहीं हुआ है।
2025-26 सत्र का लेखा-जोखा: सरकार के आंकड़े क्या कहते हैं
विदा हो रहे 2025-26 पेराई सत्र को लेकर राज्य सरकार का दावा है कि गन्ना भुगतान के मामले में यह रिकॉर्ड सत्र रहा। सरकार के अनुसार मिलों ने किसानों के 94.86 प्रतिशत से अधिक गन्ना मूल्य का भुगतान पूरा कर दिया है, और 102 निजी चीनी मिलों ने शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया है।
सहकारी क्षेत्र की 23 मिलों ने भी सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 100 प्रतिशत भुगतान किया — कुल 2,820.89 करोड़ रुपये। राज्य सरकार का दावा है कि अब तक किसानों के खातों में सीधे रिकॉर्ड 3.25 लाख करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य हस्तांतरित हुआ है। गन्ना विकास विभाग के अनुसार किसानों की औसत आय में 40,720 रुपये प्रति हेक्टेयर की वृद्धि दर्ज की गई।
ये सभी आंकड़े सरकार के दावे हैं। हकीकत यह भी है कि कई जिलों में बकाया भुगतान की शिकायतें आती रही हैं — बरेली की नवाबगंज चीनी मिल का करीब 70 करोड़ रुपये का बकाया इसका ताजा उदाहरण है, जहां मिल की बिक्री की प्रक्रिया तक चल रही है।
नए सत्र की सबसे बड़ी चिंता: प्रमुख जिलों में गन्ने का रकबा घटा
नया सत्र 2026-27 शुरू होने से पहले आई रिपोर्टों ने उद्योग के हलकों में हलचल मचा दी है। चीनीमंडी, किसान इंडिया और गांव जंक्शन के अनुसार, उत्तर प्रदेश के 11 प्रमुख चीनी उत्पादक जिलों — अमरोहा, बिजनौर, बुलंदशहर, हरदोई, लखीमपुर खीरी, मेरठ, मुजफ्फरनगर, पीलीभीत, सहारनपुर, शाहजहांपुर और सीतापुर — में गन्ने के रकबे में करीब 1.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
ये जिले प्रदेश के चीनी उत्पादन की रीढ़ हैं: शीर्ष 20 मिलें इन्हीं जिलों में हैं और राज्य के कुल 89.52 लाख टन उत्पादन का लगभग 68 प्रतिशत इन्हीं से आता है। रिपोर्टों के मुताबिक 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले 2026-27 सीजन के लिए इन जिलों में पेराई योग्य गन्ने का रकबा घटकर 17.14 लाख हेक्टेयर रह गया है। सूत्रों के अनुसार केवल बिजनौर और लखीमपुर खीरी में रकबा बढ़ा है (करीब 0.5 प्रतिशत), जबकि बाकी नौ जिलों में गिरावट है — कुछ जिलों में यह 14 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रकबा घटने से नए सत्र में गन्ने की आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है, खासकर जब पेराई सीजन जल्दी शुरू हो और स्थानीय गुड़ निर्माताओं की मांग भी बढ़ी हुई हो।
जल्दी पेराई की तैयारी, लेकिन रिकवरी पर सवाल
चीनीमंडी की ताजा रिपोर्ट (टाइम्स ऑफ इंडिया के हवाले से) के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चीनी मिलें इस बार पिछले साल से करीब 10 दिन पहले पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं। बिजनौर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली और मुरादाबाद की मिलों में मरम्मत तेज है; अक्टूबर के पहले सप्ताह तक स्टीम ट्रायल पूरे हो सकते हैं और मौसम अनुकूल रहा तो 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू हो सकती है। सहारनपुर के उप गन्ना आयुक्त ओपी सिंह के अनुसार प्रदेश में कुल 122 चीनी मिलें हैं, जिनमें कम से कम 71 पश्चिमी उप्र में हैं।
लेकिन जल्दी पेराई पर गन्ना विशेषज्ञ डी. के. त्यागी ने चेतावनी दी है — जल्दी पेराई शुरू होने से चीनी की रिकवरी कम हो सकती है, जिससे कुल उत्पादन घटेगा। उनका कहना है कि सरकार जल्दी पेराई पर जोर दे रही है, पर मिलें कब शुरू होंगी यह उस समय चीनी की कीमतों पर निर्भर करेगा। किसानों के लिए जल्दी पेराई का फायदा यह है कि खेत समय पर खाली होकर गेहूं की बुआई के लिए अधिक समय मिलेगा, पर अपरिपक्व गन्ने में चीनी की मात्रा कम होने से रिटर्न भी घट सकता है।
गन्ने का भाव: 2026-27 का SAP अभी घोषित नहीं
फिलहाल 2026-27 सत्र के लिए राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) की घोषणा अभी बाकी है। यह याद रखना जरूरी है कि पुराने सत्र का भाव नए सत्र पर लागू नहीं होता — 2025-26 में अगेती किस्म का SAP 400 रुपये प्रति क्विंटल था, जो उसी सत्र का भाव था। पिछले दिनों किसान संगठनों ने 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल तक की मांग रखी है, और 22 सितंबर को बिजनौर महापंचायत में भाव बढ़ाने की मांग प्रमुख रही। अब सबकी नजर SAP की घोषणा पर है।
नए सत्र में किसानों के लिए 5 जरूरी तैयारियां
1. गन्ना सर्वे रिकॉर्ड की जांच: अपने गन्ने के रकबे और किस्मों का सर्वे रिकॉर्ड सत्यापित कर लें। त्रुटि हो तो समय रहते सुधार कराएं, वरना पर्ची और भुगतान अटकेगा।
2. बैंक खाता सक्रिय रखें: भुगतान सीधे खाते में आता है — खाता सक्रिय और पहचान दस्तावेजों से लिंक रखें।
3. पर्ची कैलेंडर पर नजर: पेराई शुरू होते ही मिलें कैलेंडर जारी करेंगी। eGanna ऐप और caneup.in पोर्टल पर स्थिति नियमित देखें।
4. समिति सदस्यता और सट्टा रिकॉर्ड: नए किसान सदस्यता लें और सट्टा रिकॉर्ड में सुधार समय पर कराएं।
5. समस्या पर टोल-फ्री नंबर: भुगतान या पर्ची की समस्या पर गन्ना विकास विभाग के टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 पर संपर्क करें।
जवाब जानिए
नया चीनी सत्र 2026-27 कब से शुरू हो रहा है? 1 अक्टूबर 2026 से। चीनी सत्र की गिनती हर साल 1 अक्टूबर से 30 सितंबर तक होती है। 2025-26 सत्र 30 सितंबर 2026 को समाप्त हो रहा है।
2026-27 के लिए गन्ने का SAP कितना घोषित हुआ है? अभी घोषणा नहीं हुई है। 2025-26 सत्र में अगेती गन्ने का SAP 400 रुपये प्रति क्विंटल था — यह पुराने सत्र का भाव है, इसे नए सत्र का भाव न समझें।
क्या इस बार पेराई जल्दी शुरू होगी? पश्चिमी उप्र की मिलें पिछले साल से करीब 10 दिन पहले, यानी 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं। अंतिम फैसला मौसम और चीनी की कीमतों पर निर्भर करेगा।
गन्ने का रकबा घटने का किसानों पर क्या असर होगा? मिलों को गन्ने की आपूर्ति में दिक्कत हो सकती है, लेकिन किसानों के लिए इसका मतलब है कि गन्ने की मांग बनी रहेगी। हालांकि जल्दी पेराई से रिकवरी कम होने की आशंका भी है।
2025-26 सत्र में गन्ना भुगतान की स्थिति क्या रही? सरकार के दावे के अनुसार 94.86 प्रतिशत से अधिक भुगतान हो चुका है और 102 निजी मिलों ने शत-प्रतिशत भुगतान किया है। लेकिन बरेली की नवाबगंज मिल पर अब भी करीब 70 करोड़ रुपये बकाया है।
गन्ना भुगतान में देरी की शिकायत कहां करें? संबंधित चीनी मिल और जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें। इसके अलावा गन्ना विकास विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
स्रोत: चीनीमंडी (ChiniMandi), किसान इंडिया (Kisan India), गांव जंक्शन (Gaon Junction), फ्री प्रेस जर्नल, किसान तक — सितंबर 2026 की रिपोर्टें। भुगतान और उत्पादन के आंकड़े राज्य सरकार के दावों पर आधारित हैं।
अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें
गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।
यह आर्टिकल कैसा लगा?



