उत्तर प्रदेश के गन्ना किसान हर साल खेत में पूरी मेहनत लगाते हैं। बीज, खाद, पानी और मजदूरी पर हजारों रुपये खर्च होते हैं। इसके बाद भी कई किसानों को सीजन के अंत में यह महसूस होता है कि मेहनत के हिसाब से मुनाफा नहीं मिल पाया।
अक्सर किसान सोचते हैं कि नुकसान की वजह मौसम या रेट है। लेकिन सच्चाई यह है कि ज्यादातर नुकसान कुछ छोटी-छोटी लापरवाहियों से होता है। ये लापरवाहियां शुरुआत में मामूली लगती हैं, लेकिन बाद में यही पूरी फसल और कमाई को प्रभावित करती हैं।
इस लेख में हम उन जरूरी कामों की बात कर रहे हैं जो अगर समय पर न किए जाएं, तो गन्ना किसान को बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है।
खेत की समय पर निराई-गुड़ाई न करना
गन्ना बोने के बाद कई किसान निराई-गुड़ाई को ज्यादा जरूरी नहीं समझते। खेत में उगने वाले खरपतवार धीरे-धीरे गन्ने का पोषण खींच लेते हैं। इससे गन्ने की बढ़वार कमजोर हो जाती है और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है।
शुरुआती 60 से 90 दिनों में अगर खेत साफ न रहा तो बाद में नुकसान की भरपाई करना मुश्किल हो जाता है। निराई-गुड़ाई समय पर करने से गन्ने की जड़ें मजबूत बनती हैं और पैदावार बेहतर होती है।
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पानी का गलत समय और गलत मात्रा
गन्ने की खेती में पानी बहुत जरूरी है, लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी भी नुकसान करता है। कई किसान बिना मौसम और मिट्टी देखे नियत तारीख पर सिंचाई कर देते हैं।
अधिक पानी देने से जड़ों में सड़न आ जाती है, और रोग तेजी से फैलते हैं। वहीं कम पानी से गन्ना कमजोर रह जाता है, और वजन नहीं बढ़ पाता।
सिंचाई हमेशा मौसम, मिट्टी और फसल की स्थिति देखकर करनी चाहिए। गर्मी में नमी बनाए रखना जरूरी है, और ठंड के मौसम में पानी सीमित रखना चाहिए।
बिना हिसाब-किताब के खाद डालना
अक्सर किसान आसपास के लोगों की सलाह पर या पुरानी आदत के अनुसार खाद डाल देते हैं। हर खेत की मिट्टी अलग होती है, और हर खेत की जरूरत भी अलग होती है।
जरूरत से ज्यादा खाद डालने से खर्च तो बढ़ता है लेकिन पैदावार नहीं बढ़ती। कई बार इससे गन्ना कमजोर हो जाता है, और कीट-रोग का खतरा बढ़ जाता है। संतुलित मात्रा में और सही समय पर खाद डालना लागत को भी कम करता है, और गन्ने की गुणवत्ता भी सुधारता है।
रोग दिखाई देने के बाद देर करना
कई किसान यह सोचकर इंतजार करते हैं, कि रोग अपने आप ठीक हो जाएगा। लेकिन गन्ने में एक बार बीमारी फैल गई तो नुकसान तेजी से बढ़ता है।
शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने से पत्तियां सूखने लगती हैं, और तना कमजोर हो जाता है। इसका सीधा असर गन्ने के वजन और रेट पर पड़ता है। खेत का नियमित निरीक्षण करना और शुरुआत में ही सही उपचार करना सबसे सुरक्षित तरीका होता है।
CaneUP और भुगतान की अनदेखी
आज भी बहुत से किसान CaneUP पर अपनी जानकारी और भुगतान की स्थिति नहीं देखते। कई बार भुगतान में देरी हो जाती है और किसान समय पर शिकायत नहीं कर पाता।
रिकॉर्ड न रखने से छोटी-छोटी गड़बड़ियां बड़ा नुकसान बन जाती हैं। जो किसान नियमित रूप से CaneUP चेक करते हैं उन्हें ऐसी परेशानियों का सामना कम करना पड़ता है।
समझदार किसान क्या अलग करते हैं
जो किसान हर साल स्थिर मुनाफा कमाते हैं वे खेती को आदत से नहीं, योजना के साथ करते हैं। वे खर्च और कमाई दोनों का हिसाब रखते हैं। खेत की नियमित निगरानी करते हैं। और अफवाहों के बजाय पक्की जानकारी पर भरोसा करते हैं। इसी वजह से उनकी फसल ज्यादा सुरक्षित रहती है, और नुकसान की संभावना कम होती है।
किसानों के लिए अंतिम सलाह
गन्ने की खेती में सबसे बड़ा नुकसान देरी और लापरवाही से होता है। अगर समय पर सही फैसले लिए जाएं तो वही खेती मुनाफे का सौदा बन जाती है।
खेत पर ध्यान देना, समय पर काम करना और जानकारी खुद जांचना यही सफल किसान की पहचान है।

आमिर रज़ा पिछले 4 वर्षों से CaneUP.xyz वेबसाइट का संचालन कर रहे हैं।
वे गन्ना किसानों से जुड़े विषयों जैसे भुगतान, रिकॉर्ड, पोर्टल अपडेट और खेती से संबंधित जानकारी को सरल भाषा में किसानों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं।
अब तक 50 लाख से ज्यादा किसान CaneUP.xyz के माध्यम से सही और भरोसेमंद जानकारी प्राप्त कर चुके हैं।
लेखक का उद्देश्य किसानों तक समय पर, स्पष्ट और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे सही निर्णय ले सकें और किसी भी तरह की अफवाह से बच सकें।
