ट्रेंच विधि और ड्रिप सिंचाई से गन्ने की पैदावार होगी दोगुनी: 45 जिलों में वैज्ञानिक प्रदर्शन — रिजर व ड्रिप पर 80% तक सरकारी छूट

लखनऊ / बुलंदशहर / मुजफ्फरनगर (CaneUp विशेष ब्यूरो — 24 सितंबर 2026): उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने और किसानों की प्रति एकड़ शुद्ध आय को दोगुना करने के उद्देश्य से कृषि एवं गन्ना विभाग ने राज्य के 45 जनपदों में ट्रेंच विधि व ड्रिप सिंचाई के वृहद प्रदर्शन कार्यक्रम (Field Demonstrations) का शुभारंभ किया है।
पारंपरिक विधि में किसान 2 से 2.5 फीट की संकरी दूरी पर गन्ने की बुवाई करते हैं, जिससे हवा और सूर्य का प्रकाश पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाता और गन्ने की मोटाई व वजन कम रह जाता है। इसके विपरीत, 4 से 5 फीट की दूरी पर गहरी ट्रेंच (खाई) बनाकर बुवाई करने से गन्ने के प्रत्येक कल्ले को भरपूर पोषक तत्व मिलते हैं और गन्ना 14-16 फीट ऊंचा होकर भी तेज हवाओं में नहीं गिरता।
🔴 लाइव अपडेट — 29 सितंबर 2026
गन्ना समितियों में सट्टा प्रदर्शन मेले, 30 सितंबर आखिरी तारीख: पेराई सत्र 2026-27 की तैयारियों के बीच प्रदेश की सभी गन्ना समितियों में सट्टा प्रदर्शन मेले चल रहे हैं। विभाग ने साफ कर दिया है कि नई सदस्यता और उपज बढ़ोत्तरी के आवेदन की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 है। तय समय तक पंजीकरण कराने वाले नए सदस्यों को ही आगामी सत्र में चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति की सुविधा मिलेगी। किसानों से अपील की गई है कि वे समिति में पहुंचकर अपने रकबे, सट्टे और आपूर्ति के रिकॉर्ड का मिलान जरूर कर लें, ताकि कोई त्रुटि रह गई हो तो समय रहते सुधार हो सके। (स्रोत: लाइव हिंदुस्तान, 25 सितंबर 2026; प्रतिभा टाइम्स, 25 सितंबर 2026)
सूक्ष्म सिंचाई अनुदान अभियान जिलों में जोर पर: ड्रिप और स्प्रिंकलर लगाने पर सूक्ष्म सिंचाई योजना के तहत पात्र किसानों को 80 से 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। उद्यान विभाग के अधिकारियों के मुताबिक दो हेक्टेयर से कम जमीन वाले किसानों को 90 प्रतिशत तक और सामान्य किसानों को 80 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है। ड्रिप से पानी की 60 से 70 प्रतिशत तक बचत और पैदावार में 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का दावा किया जा रहा है। किसान उद्यान विभाग के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। (स्रोत: न्यूज18, 3 सितंबर 2026)
🌿 ट्रेंच विधि और ड्रिप सिंचाई के 5 अचूक फायदे
- बीज की 40% तक बचत: पारंपरिक बुवाई में प्रति एकड़ 30 से 35 क्विंटल बीज लगता है, जबकि ट्रेंच विधि में दो आंख के टुकड़ों से मात्र 18 से 20 क्विंटल बीज में ही बुवाई संपन्न हो जाती है।
- पानी और बिजली की 50% बचत: ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई) सीधे गन्ने की जड़ों तक बूंद-बूंद पानी पहुंचाती है, जिससे पानी की बर्बादी और खरपतवारों का उगना पूरी तरह रुक जाता है।
- फर्टिगेशन (Fertigation) से खाद की 30% बचत: यूरिया, पोटाश और सूक्ष्म पोषक तत्वों को ड्रिप के पानी के साथ सीधे जड़ों में घोलकर दिया जाता है, जिससे खाद मिट्टी में व्यर्थ नहीं बहती।
- सहफसली खेती के लिए आदर्श जगह: 5 फीट की खाली दूरी में ट्रैक्टर आसानी से चलता है और सरसों, चना, आलू अथवा प्याज की दो कतारें आसानी से ली जा सकती हैं।
- रिकॉर्ड उत्पादन: प्रदर्शन फार्मों पर ट्रेंच विधि से गन्ने का औसत उत्पादन 650 से 850 क्विंटल प्रति एकड़ दर्ज किया गया है।
💰 सरकारी अनुदान व आवेदन की सरल प्रक्रिया
| उपकरण / तकनीक | सामान्य लागत | सरकारी सब्सिडी (%) | किसान का अंशदान |
|---|---|---|---|
| ड्रिप इरिगेशन सिस्टम (लघु/सीमांत किसान) | ₹65,000 / एकड़ | 80% (₹52,000) | ₹13,000 |
| ड्रिप इरिगेशन सिस्टम (अन्य बड़े किसान) | ₹65,000 / एकड़ | 70% (₹45,500) | ₹19,500 |
| ट्रैक्टर माउंटेड ट्रेंच रिजर (Trench Ridger) | ₹40,000 | ₹25,000 एकमुश्त | ₹15,000 |
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: ड्रिप सिंचाई अनुदान के लिए किसान कहां पंजीकरण कराएं?
उत्तर: किसान भाई उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के पोर्टल upagriculture.com पर ‘पारदर्शी किसान सेवा योजना’ के तहत अपने आधार और खतौनी के साथ ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
प्रश्न 2: क्या ट्रेंच विधि में बुवाई के बाद मिट्टी चढ़ाना जरूरी है?
उत्तर: जी हाँ! जब गन्ना 3 से 4 महीने का हो जाए, तो मई-जून के महीने में ट्रेंच की मिट्टी गन्ने की जड़ों पर चढ़ा दी जाती है, जिससे खाई मेड़ बन जाती है और बारिश में गन्ना नहीं गिरता।
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