होम › सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: देर से …

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: देर से गन्ना भुगतान पर मिलें देंगी 15% ब्याज — 849.5 करोड़ बकाया, यूपी सरकार की अर्जी खारिज

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 9, 2026 • 6 min read
Google पर हमें फ़ॉलो करें
शेयर करें:
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: देर से गन्ना भुगतान पर मिलें देंगी 15% ब्याज — 849.5 करोड़ बकाया, यूपी सरकार की अर्जी खारिज
अंतिम अपडेट: October 9, 2026 3:59 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

तीस साल से जिस ब्याज का हिसाब किताबों में दबा था, उस पर अब सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगा दी है। 6 अक्टूबर के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की कार्यवाही के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार की चुनौती खारिज कर दी है। साफ शब्दों में कहा गया है कि गन्ने का भुगतान 14 दिन में न करने पर चीनी मिलों को 15% वार्षिक ब्याज देना ही होगा। यह फैसला यूपी के उन लाखों गन्ना किसानों के लिए है जिनका 1990 के दशक से देर से हुआ भुगतान का ब्याज आज तक नहीं मिला।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 31 अगस्त के आदेश में खुलासा किया था कि रिकवरी सर्टिफिकेट के तहत चीनी मिलों से 1,936 करोड़ रुपये वसूलने बाकी थे। इसमें से 1,087 करोड़ रुपये गन्ने का मूल बकाया और 849.5 करोड़ रुपये ब्याज था। हाईकोर्ट ने साफ कहा था कि ब्याज के नाम पर अब तक एक पैसा भी वसूल नहीं किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार के दोनों तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया। सरकार का पहला तर्क था कि आर्थिक तंगी से जूझ रही चीनी मिलों पर 15% ब्याज का बोझ डालने से वे दिवालिया हो सकती हैं, और मिलें बंद होने पर किसानों का ही नुकसान होगा। दूसरा तर्क था कि यूपी गन्ना अधिनियम, 1953 की धारा 17(3) ब्याज में कटौती या माफी की अनुमति देती है।

अदालत ने कहा कि गन्ना खरीद के 14 दिन के भीतर भुगतान की समय-सीमा और देरी पर 15% ब्याज किसानों के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय है, जो उन्हें कर्ज के जाल से बचाता है। खबरों के मुताबिक मिल मालिकों की ओर से दायर याचिकाएं भी खारिज हो गई हैं, जिससे लंबे समय से अटके ब्याज के भुगतान का रास्ता साफ हो गया है।

1,936 करोड़ रुपये का पूरा हिसाब

अदालत के सामने जो आंकड़े रखे गए, वे किसानों के गुस्से की वजह बताते हैं:

  • कुल बकाया: 1,936 करोड़ रुपये (रिकवरी सर्टिफिकेट के तहत)
  • मूल बकाया: 1,087 करोड़ रुपये
  • ब्याज: 849.5 करोड़ रुपये
  • वसूली: ब्याज के तौर पर अब तक शून्य

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कई रिकवरी सर्टिफिकेट 15% की तय दर के बजाय 12% ब्याज दर पर जारी कर दिए गए थे। पीटीआई की खबर के मुताबिक सिर्फ इसी खेल से किसानों का करीब 170 करोड़ रुपये का अतिरिक्त ब्याज डूबने का खतरा था। हाईकोर्ट ने इस पर भी अधिकारियों को फटकार लगाई। अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होनी है।

14 दिन का नियम और 15% ब्याज का कानून

कई किसानों को यह पता नहीं होता कि यह ब्याज का हक किस कानून से मिलता है। गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 की धारा 3(3) कहती है कि चीनी मिल को गन्ना मिलने के 14 दिन के भीतर भुगतान करना होगा। धारा 3(3-ए) कहती है कि अगर मिल 14 दिन के भीतर भुगतान नहीं करती, तो देरी की अवधि के लिए बकाया राशि पर 15% वार्षिक दर से ब्याज देना होगा — यह कोई एहसान नहीं, कानूनन तय हक है। यही नहीं, गन्ना मूल्य का बकाया भू-राजस्व के बकाए की तरह वसूल किया जा सकता है।

वीएम सिंह की बीस साल पुरानी लड़ाई

इस फैसले के पीछे राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के प्रमुख सरदार वीएम सिंह की लंबी कानूनी लड़ाई है। उन्होंने 2006 में जनहित याचिका दायर की थी। टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह आदेश एक बड़ी उपलब्धि है और एक किसान के लिए तीस साल के इंतजार का मतलब समझना चाहिए।

बिजनौर में गन्ना ब्याज को लेकर धरना दे रहे किसानों के नेता कैलाश लांबा का कहना है कि उनकी तत्काल मांग बकाया ब्याज का साल-दर-साल अलग-अलग विवरण है।

गोला गोकर्णनाथ में संगठन के जिलाध्यक्ष अंजनी कुमार दीक्षित ने कहा है कि हर किसान को जिला गन्ना अधिकारी और गन्ना समिति के सचिव से अपने ब्याज की गणना और भुगतान का विवरण लेना चाहिए। कहीं अनियमितता दिखे तो इसकी जानकारी संगठन को देनी चाहिए।

किसानों को अब क्या करना चाहिए

फैसले के बाद किसानों के लिए सबसे अहम काम अपना हिसाब-किताब पक्का करना है:

  1. तौल पर्चियां संभालकर रखें: कई किसानों के पास पुराने सालों की तौल पर्चियां आज भी मौजूद हैं। यही आपके दावे का सबसे मजबूत सबूत है।
  2. सालवार ब्याज का विवरण मांगें: गन्ना समिति के सचिव और जिला गन्ना अधिकारी से लिखित में अपने बकाया ब्याज का साल-दर-साल हिसाब लें।
  3. रिकवरी सर्टिफिकेट की दर जांचें: सुनिश्चित करें कि आपके मामले में ब्याज की गणना 15% दर से हुई है, 12% से नहीं।
  4. शिकायत कहां करें: भुगतान या ब्याज न मिले तो जिला गन्ना अधिकारी के पास लिखित शिकायत दें। गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 पर भी शिकायत दर्ज हो सकती है।
  5. मवाना जैसे आंदोलनों से सीख: मेरठ के मवाना में धरने के बाद अधिकारियों को लिखित ब्यौरा देने का आश्वासन देना पड़ा था — संगठित मांग का असर होता है।

नए पेराई सत्र से पहले का संदेश

यह फैसला ऐसे समय आया है जब यूपी की चीनी मिलें 20 अक्टूबर के आसपास नया पेराई सत्र 2026-27 शुरू करने की तैयारी कर रही हैं। पश्चिमी यूपी में कई मिलें इस बार 10 दिन पहले पेराई शुरू कर सकती हैं।

उधर किसान संगठन गन्ने का भाव करीब 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग भी उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि खाद, डीजल, सीएनजी और मजदूरी की बढ़ती लागत के मुकाबले मौजूदा भाव नाकाफी है। 2025-26 सत्र में प्रदेश की मिलों ने 94.86% भुगतान किया था और 102 निजी मिलों ने शत-प्रतिशत भुगतान का दावा किया था, लेकिन जिनका बकाया अटका है, उनके लिए ब्याज का यह फैसला असली राहत लेकर आया है।

गन्ना विवाद पर सियासत भी तेज

2027 के यूपी विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ गन्ना फिर बड़ा मुद्दा बन रहा है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने तय समय पर गन्ना भुगतान के मुद्दे पर किसानों और खाप प्रतिनिधियों से संपर्क साधा है, जबकि राष्ट्रीय लोकदल के जयंत चौधरी गन्ना अर्थव्यवस्था को लगातार प्रमुखता दे रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने गन्ना ब्याज पर क्या फैसला दिया है? सुप्रीम कोर्ट ने 6 अक्टूबर के आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ यूपी सरकार की चुनौती खारिज कर दी। अब चीनी मिलों को देर से गन्ना भुगतान पर 15% वार्षिक ब्याज देना होगा।

कितना ब्याज बकाया है? हाईकोर्ट के मुताबिक रिकवरी सर्टिफिकेट के तहत 1,936 करोड़ रुपये वसूलने बाकी थे, जिसमें 1,087 करोड़ मूल बकाया और 849.5 करोड़ रुपये ब्याज है। ब्याज के नाम पर अब तक एक पैसा भी वसूल नहीं हुआ।

15% ब्याज का हक किस कानून से मिलता है? गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 की धारा 3(3-ए) के तहत मिल को गन्ना मिलने के 14 दिन के भीतर भुगतान करना होता है। देरी होने पर बकाया राशि पर 15% वार्षिक ब्याज देना अनिवार्य है।

किसान अपना बकाया ब्याज कैसे हासिल करें? तौल पर्चियां संभालकर रखें, गन्ना समिति के सचिव और जिला गन्ना अधिकारी से साल-दर-साल ब्याज का लिखित विवरण लें, और रिकवरी सर्टिफिकेट में 15% दर की पुष्टि करें। शिकायत के लिए टोल-फ्री 1800-121-3203 उपलब्ध है।

अगली सुनवाई कब है? इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में इस मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होनी है, जिसमें वसूली की प्रगति पर नजर रखी जाएगी।

स्रोत: KisanTak, LiveHindustan (हिंदुस्तान), PTI/Rediff

🌾 CaneUp किसान सहायता पोर्टल

अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें

गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।

1 जिला व मिल चुनें
2 गांव व नाम डालें
3 समस्या लिखकर भेजें
उत्तर प्रदेश का अपना जनपद चुनें
आपके जिले से संबंधित चीनी मिलें
इस नंबर पर आपको पर्ची और भुगतान के व्हाट्सएप अपडेट्स मिलेंगे
जितना स्पष्ट लिखेंगे, उतनी जल्दी सटीक समाधान मिलेगा

🔒 आपकी निजी जानकारी 100% सुरक्षित है। हम कोई स्पैम नहीं भेजते। केवल आपकी मिल से जुड़े आधिकारिक अपडेट्स शेयर किए जाते हैं।

✓
Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

यह आर्टिकल कैसा लगा?

📬 गन्ना अपडेट पाएं

MSP रेट, पर्ची कैलेंडर, सरकारी योजनाएं — सीधे आपके इनबॉक्स में