₹69,163 करोड़ किसानों पर: कृषि मंत्री का बड़ा दावा — 105 मिलें 15 दिन में भुगतान, गन्ना मूल्य ₹400/क्विंटल, जानिए हकीकत

गोरखपुर में 12 अक्टूबर (सोमवार) को आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने गन्ना किसानों को लेकर बड़ा दावा किया — योगी सरकार ने अब तक किसानों पर ₹69,163 करोड़ खर्च किए हैं, जो पिछली दो सरकारों के मुकाबले तीन गुना से अधिक है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश की 105 चीनी मिलें 15 दिनों के भीतर गन्ने का भुगतान कर रही हैं और गन्ने का मूल्य बढ़ाकर ₹400 प्रति क्विंटल किया गया है।
यह कार्यक्रम बाढ़, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि और चक्रवात से फसल क्षति झेलने वाले नौ लाख से अधिक किसानों को राहत राशि देने के लिए आयोजित किया गया था, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सहायता राशि जारी की। मंत्री के दावों का सीधा असर यूपी के करीब 48 लाख गन्ना किसान परिवारों पर पड़ता है — इसलिए हर दावे की जमीन समझना जरूरी है।
पहले एक तथ्य साफ कर दें: ₹400 प्रति क्विंटल जिस मूल्य का जिक्र हुआ, वह 2025-26 सीजन का एसएपी है (अगेती किस्म के लिए)। 2026-27 सीजन के गन्ना एसएपी की घोषणा अभी बाकी है, और पेराई सत्र अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में पूरी गति पकड़ने वाला है।
₹69,163 करोड़ का दावा: मायावती-अखिलेश से तीन गुना
शाही के मुताबिक मायावती सरकार ने किसानों पर ₹10,207 करोड़ और अखिलेश यादव सरकार ने करीब ₹12 हजार करोड़ खर्च किए थे, जबकि योगी सरकार अब तक ₹69,163 करोड़ खर्च कर चुकी है। उन्होंने कहा कि खुद को धरतीपुत्र कहने वाली पिछली सरकारों ने किसानों के लिए अपेक्षित काम नहीं किया।
मंत्री ने बताया कि 2017 में सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट में ही 86 लाख किसानों का ₹36 हजार करोड़ का कर्ज माफ किया गया था। उनके मुताबिक किसानों को समय पर बीज, बिजली और उर्वरक मिल रहे हैं, जिसका नतीजा है कि पिछले वर्ष प्रदेश में रिकॉर्ड 752 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ।
आपदा राहत पर उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान केंद्र से मिली ₹3,200 करोड़ की सहायता में से केवल ₹800 करोड़ किसानों तक पहुंचे थे, जबकि योगी सरकार बनने के बाद शेष राशि में से ₹1,200 करोड़ सात दिनों के भीतर खातों में भेजे गए।
गन्ना मूल्य ₹400 और ₹3.25 लाख करोड़ भुगतान का दावा
गन्ने को लेकर मंत्री के दो बड़े आंकड़े हैं: मूल्य बढ़ाकर ₹400 प्रति क्विंटल किया गया, और पिछली सरकार के पांच वर्षों के करीब ₹62 हजार करोड़ के मुकाबले योगी सरकार के कार्यकाल में ₹3.25 लाख करोड़ का गन्ना भुगतान हुआ।
यहां जरूरी तथ्य: ₹400 प्रति क्विंटल 2025-26 सीजन का एसएपी है (अगेती किस्म; सामान्य किस्म के लिए करीब ₹390)। 2026-27 का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है — कैबिनेट की हाल की बैठक में भी बढ़ोतरी का फैसला नहीं हुआ। पेराई शुरू होने से पहले किसानों की निगाह अब एसएपी की घोषणा पर है, और इस बयान के बाद दबाव और बढ़ गया है।
₹3.25 लाख करोड़ का आंकड़ा करीब दस वर्षों का संचयी भुगतान है। गन्ना विकास विभाग के मुताबिक 2025-26 के पेराई सत्र में 94 प्रतिशत से अधिक बकाया चुकता हो चुका है और 100 से अधिक मिलों ने शत-प्रतिशत भुगतान किया है।
“105 मिलें 15 दिन में भुगतान” — दावे की जमीन
मंत्री का दावा है कि प्रदेश की 105 चीनी मिलें 15 दिनों के भीतर भुगतान कर रही हैं। यूपी में चीनी मिलों की आधिकारिक संख्या 122 है। कागज पर यह मजबूत लगता है, लेकिन जमीन पर तस्वीर मिली-जुली है।
एक तरफ हरदोई की चारों निजी मिलों ने पिछले सत्र का शत-प्रतिशत भुगतान चुकता कर दिया है। दूसरी तरफ कासगंज की न्यौली चीनी मिल पर 3,965 किसानों का ₹18.54 करोड़ बकाया है, जिस पर तहसील प्रशासन ने आरसी जारी कर एक सप्ताह में भुगतान का निर्देश दिया है। सहारनपुर में भी बजाज की गंगनौली मिल को ₹88 करोड़ के बकाए पर अल्टीमेटम मिला है।
नियमानुसार 14 दिन से अधिक देरी पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का प्रावधान है — सुप्रीम कोर्ट ने भी बकाए पर 15 प्रतिशत ब्याज का आदेश बरकरार रखा है। असली सवाल यही है: आपकी मिल समय पर दे रही है या नहीं — यह केनयूपी पोर्टल पर भुगतान स्थिति देखकर तुरंत पता लगाइए।
फसल बीमा: ₹6,125 करोड़ क्षतिपूर्ति, बीमा कराने वाले 24 लाख
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 2017-18 से अब तक ₹6,125 करोड़ की क्षतिपूर्ति दी जा चुकी है। सिर्फ 2025-26 में आपदा प्रभावित 7.31 लाख किसानों को ₹812.76 करोड़ मिले। बीमा कराने वालों की संख्या पिछले वर्ष के 18 लाख से बढ़कर इस वर्ष 23-24 लाख हो गई है। जालौन में भी करीब ₹5 करोड़ खातों में भेजे जा रहे हैं।
गन्ना किसानों के लिए मतलब साफ है: अगर फसल बाढ़ या ओलावृष्टि से प्रभावित हुई है, तो सर्वे सूची में अपना नाम दर्ज होना जरूरी है — पैसा तभी मिलेगा। मुख्यमंत्री ने सर्वे और वितरण तेज करने के निर्देश दिए हैं।
पेराई से पहले 4 जरूरी काम
1. केनयूपी पर भुगतान स्थिति जांचें: पिछला बकाया है तो caneup.in पर देखिए। 14 दिन से अधिक देरी पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज आपका कानूनी हक है।
2. सर्वे-सट्टा रिकॉर्ड दुरुस्त रखें: रकबा, किस्म और बैंक खाता जांच लें — खाता आधार से लिंक और सक्रिय होना चाहिए, वरना भुगतान अटकेगा।
3. एसएपी घोषणा पर नजर रखें: 2026-27 का एसएपी अभी बाकी है। किसान संगठन ₹600 प्रति क्विंटल तक की मांग कर रहे हैं और 23 अक्टूबर को आंदोलन की चेतावनी भी है।
4. फसल बीमा की स्थिति देखें: बीमा कराया है और नुकसान हुआ है तो सर्वे सूची में नाम जरूर जांचें। टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर जानकारी मिल सकती है।
आपके सवाल
क्या ₹400 प्रति क्विंटल इस सीजन (2026-27) का गन्ना भाव है? नहीं। यह 2025-26 सीजन का एसएपी था (अगेती किस्म के लिए)। 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है — इसे इस सीजन का भाव समझने की भूल न करें।
105 मिलें 15 दिन में भुगतान कर रही हैं — क्या यह सभी मिलों पर लागू है? यह मंत्री का दावा है। यूपी में कुल 122 चीनी मिलें हैं, और जमीन पर कुछ मिलों पर अब भी करोड़ों का बकाया है (जैसे कासगंज की न्यौली मिल)। अपनी मिल की स्थिति केनयूपी पोर्टल पर जरूर जांचें।
मिल ने 14-15 दिन में भुगतान नहीं किया तो किसान क्या कर सकता है? 14 दिन से अधिक की देरी पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का प्रावधान है। जिला गन्ना अधिकारी या डीएम कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं — प्रशासन मिल के खिलाफ आरसी भी जारी कर सकता है, जैसा कासगंज में हुआ।
फसल बीमा का पैसा कैसे मिलेगा? सर्वे के बाद क्षतिपूर्ति सीधे खाते में आती है। 2025-26 में 7.31 लाख किसानों को ₹812.76 करोड़ मिले। फसल प्रभावित हुई है तो सर्वे सूची में नाम दर्ज होना जरूरी है — लेखपाल या कृषि विभाग से संपर्क करें।
इस बार पेराई सत्र कब से शुरू हो रहा है? पश्चिमी यूपी में 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू होने की संभावना है, सीतापुर में दीपावली से पहले सत्र शुरू करने की तैयारी है। अक्टूबर के आखिरी सप्ताह तक अधिकांश मिलों में पेराई गति पकड़ लेगी।
स्रोत: केसरीया न्यूज, एपीएन न्यूज हिंदी, यूनाइटेड भारत, फ्री प्रेस जर्नल (12-13 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टें)
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