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₹603 करोड़ का गन्ना तोहफ़ा: तमिलनाडु में 90,000 किसानों को दीपावली से पहले ₹4,000 प्रति टन रेट — यूपी की मांग ₹600

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 12, 2026 • 6 min read
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₹603 करोड़ का गन्ना तोहफ़ा: तमिलनाडु में 90,000 किसानों को दीपावली से पहले ₹4,000 प्रति टन रेट — यूपी की मांग ₹600
अंतिम अपडेट: October 12, 2026 12:21 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

दीपावली से ठीक पहले तमिलनाडु के गन्ना किसानों की झोली भरने वाली खबर आई है। राज्य सरकार ने 8 अक्टूबर 2026 को 90,000 गन्ना किसानों के लिए ₹603.34 करोड़ के विशेष प्रोत्साहन को मंजूरी दे दी है। इसके बाद राज्य में गन्ने का प्रभावी मूल्य ₹4,000 प्रति टन हो गया है — और यह राशि किसानों के आधार-लिंक्ड बैंक खातों में सीधे भेजी जाएगी। भुगतान दीपावली के आसपास शुरू करने की व्यवस्था बनाई गई है।

यह फैसला मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के निर्देश पर राज्य के खजाने से लागू किया गया है, जिसकी घोषणा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री एम.आर.के. पन्नीरसेल्वम ने की। उत्तर प्रदेश समेत देश भर के गन्ना किसानों के लिए भी यह खबर अहम है, क्योंकि यूपी में किसान संगठन 2026-27 सत्र के लिए ₹600 प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य की मांग कर रहे हैं — और तमिलनाडु का यह मॉडल राज्य के अपने खजाने से दिए गए अतिरिक्त प्रोत्साहन का उदाहरण बन गया है।

₹709.50 प्रति टन अतिरिक्त: पूरा हिसाब समझिए

सरकारी आदेश के मुताबिक तमिलनाडु सरकार केंद्र सरकार द्वारा तय उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) के ऊपर ₹709.50 प्रति टन का विशेष प्रोत्साहन देगी। 2025-26 पेराई सत्र के लिए केंद्र ने 9.5 प्रतिशत चीनी रिकवरी पर एफआरपी ₹3,290.50 प्रति टन तय किया था। राज्य का अतिरिक्त भुगतान जोड़ने पर किसानों को कुल ₹4,000 प्रति टन मिलेगा।

सरल भाषा में कहें तो: केंद्र का न्यूनतम रेट ₹3,290.50 प्रति टन था, राज्य सरकार अपने खजाने से ₹709.50 प्रति टन और जोड़ेगी, और किसान के हाथ में कुल ₹4,000 प्रति टन आएगा। यह प्रोत्साहन उन्हीं किसानों को मिलेगा जिन्होंने 2025-26 पेराई सत्र (1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026) के दौरान चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति की थी।

एक और राहत यह है कि जिन किसानों के गन्ने की चीनी रिकवरी 9.5 प्रतिशत से अधिक दर्ज हुई है, उन्हें आनुपातिक रूप से ज्यादा भुगतान मिलेगा — यानी उनका कुल मूल्य ₹4,000 प्रति टन से ऊपर जा सकता है।

कब और कैसे मिलेगा पैसा: आधार-लिंक्ड खाते में सीधा भुगतान

सरकार ने भुगतान की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी रखने का दावा किया है। किसानों का गन्ना आपूर्ति का ब्योरा, आधार नंबर और बैंक खाते की जानकारी पहले ही एकत्र कर ली गई है। अब हर जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला-स्तरीय समितियां पात्र किसानों की सूची की सिफारिश करेंगी, जिसकी जांच चीनी निदेशालय (Directorate of Sugar) करेगा। इसके बाद राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए किसानों के आधार-लिंक्ड बैंक खातों में भेजी जाएगी।

सरकारी आदेश के अनुसार भुगतान दीपावली के त्योहार के आसपास शुरू करने की व्यवस्था की जा रही है। राज्य सरकार का कहना है कि यह कदम किसानों की लंबे समय से चली आ रही बेहतर मूल्य की मांग का जवाब है और इससे गन्ने की खेती को बढ़ावा मिलेगा, चीनी मिलों का कामकाज सुधरेगा तथा चीनी और उप-उत्पादों के उत्पादन में वृद्धि होगी।

29 मिलें, 90,000 किसान: कौन होगा पात्र

यह प्रोत्साहन उन 29 चीनी मिलों से जुड़े किसानों को मिलेगा जिन्होंने 2025-26 सत्र में पेराई की — 12 सहकारी, 2 सार्वजनिक क्षेत्र की और 15 निजी चीनी मिलें। करीब 90,000 किसान इस योजना के दायरे में आने का अनुमान है। पात्रता की बुनियादी शर्त यही है कि किसान ने उस सत्र में इन्हीं मिलों को गन्ना आपूर्ति की हो और उसका ब्योरा, आधार और बैंक खाता सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो।

यूपी के किसान क्यों देख रहे हैं इस खबर को

तमिलनाडु की यह घोषणा उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए इसलिए अहम है क्योंकि यहां भी गन्ना मूल्य को लेकर आंदोलन और मांगें तेज हैं। समझने वाली बात यह है कि तमिलनाडु का ₹4,000 प्रति टन का कुल मूल्य क्विंटल में बदलने पर ₹400 प्रति क्विंटल बैठता है (एक टन में दस क्विंटल होते हैं)। 2025-26 सत्र में उत्तर प्रदेश का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) अगेती गन्ने के लिए ₹400 प्रति क्विंटल था — यानी तमिलनाडु का कुल भाव यूपी के पिछले सत्र के भाव के लगभग बराबर है।

लेकिन असली तुलना इससे आगे की है। केंद्र सरकार ने 2026-27 चीनी सत्र (अक्टूबर 2026 से सितंबर 2027) के लिए एफआरपी ₹365 प्रति क्विंटल तय किया है, जो 10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी से जुड़ा है और पिछले सत्र से अधिक है। वहीं उत्तर प्रदेश के किसान संगठन 2026-27 के लिए ₹600 प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य की मांग कर रहे हैं। अब तक 2026-27 सत्र के लिए यूपी के एसएपी की घोषणा नहीं हुई है — राज्य सरकार ने इस पर अभी कोई फैसला सार्वजनिक नहीं किया है।

तमिलनाडु के मॉडल से एक सीख यह मिलती है कि राज्य सरकार चाहे तो केंद्र के एफआरपी के ऊपर अपने खजाने से अतिरिक्त प्रोत्साहन देकर किसानों का भाव बढ़ा सकती है। उत्तर प्रदेश में 122 चीनी मिलें हैं और यहां देश का सबसे बड़ा गन्ना क्षेत्र है, इसलिए यहां हर रुपये की बढ़ोतरी का असर लाखों किसानों पर पड़ता है। तमिलनाडु में 90,000 किसानों को ₹603 करोड़ बांटना एक राज्य के लिए बड़ा फैसला है — यूपी जैसे बड़े गन्ना प्रदेश में ऐसा कदम कहीं ज्यादा बड़ी रकम मांगेगा, लेकिन किसान संगठनों का तर्क है कि चीनी के भाव में हुई 19 प्रतिशत तक की तेजी और इथेनॉल से मिलों को हो रही कमाई का हिस्सा किसानों तक पहुंचना चाहिए।

आगे क्या: नजर यूपी के एसएपी फैसले पर

उत्तर प्रदेश में 2026-27 का पेराई सत्र अक्टूबर के तीसरे-चौथे सप्ताह से शुरू होने की तैयारी है, और पश्चिमी यूपी की कई मिलों ने 20 अक्टूबर के आसपास पेराई की योजना बनाई है। किसानों की निगाहें अब राज्य सरकार के एसएपी फैसले पर टिकी हैं — तमिलनाडु का उदाहरण देकर किसान नेता अपनी ₹600 प्रति क्विंटल की मांग को और धार दे सकते हैं।

दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने 2026-27 इथेनॉल आपूर्ति वर्ष में गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे के इथेनॉल में उपयोग पर रोक की दिशा में कदम बढ़ाया है, ताकि चीनी की घरेलू उपलब्धता बनी रहे। चीनी उत्पादन में गिरावट के बीच मिलों पर पहले से दबाव है — ऐसे में गन्ना मूल्य का फैसला किसानों और मिलों, दोनों के लिए निर्णायक होगा।

आपके सवाल

क्या यह ₹603 करोड़ की राशि सिर्फ तमिलनाडु के किसानों के लिए है?

हां। यह राशि तमिलनाडु सरकार ने अपने राज्य के खजाने से मंजूर की है और इसका लाभ सिर्फ उन करीब 90,000 किसानों को मिलेगा जिन्होंने 2025-26 सत्र में राज्य की 29 चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति की थी। उत्तर प्रदेश के किसानों को इसका सीधा लाभ नहीं मिलेगा।

₹4,000 प्रति टन का मतलब प्रति क्विंटल कितना हुआ?

₹4,000 प्रति टन यानी ₹400 प्रति क्विंटल (1 टन = 10 क्विंटल)। यह 2025-26 में यूपी के अगेती गन्ने के ₹400 प्रति क्विंटल एसएपी के लगभग बराबर है।

पैसा कब तक मिलेगा और कैसे?

सरकार ने किसानों के आधार-लिंक्ड बैंक खातों में डीबीटी के जरिए भुगतान की व्यवस्था की है। सरकारी आदेश के मुताबिक दीपावली के आसपास भुगतान शुरू करने की तैयारी है। जिले के कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समितियां पात्र किसानों की सूची तय करेंगी और चीनी निदेशालय उसकी जांच करेगा।

क्या 2026-27 के लिए यूपी का गन्ना भाव घोषित हो गया है?

नहीं। 12 अक्टूबर 2026 तक उत्तर प्रदेश सरकार ने 2026-27 सत्र के एसएपी की घोषणा नहीं की है। किसान संगठन ₹600 प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं। केंद्र ने 2026-27 के लिए एफआरपी ₹365 प्रति क्विंटल (10.25 प्रतिशत रिकवरी पर) तय किया है।

रिकवरी 9.5 प्रतिशत से ज्यादा होने पर क्या होगा?

तमिलनाडु सरकार के मुताबिक 9.5 प्रतिशत से अधिक चीनी रिकवरी वाले गन्ने पर किसानों को आनुपातिक रूप से ज्यादा भुगतान मिलेगा — यानी उनका कुल मूल्य ₹4,000 प्रति टन से ऊपर जा सकता है।

स्रोत: आईएएनएस (पंजाब केसरी), लोकमत टाइम्स, डीटी नेक्स्ट, नेशन प्रेस, न्यूज टुडे नेट — 8 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टें।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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