तराई बेल्ट में भारी बारिश का येलो अलर्ट — गन्ने में लाल सड़न रोकने के लिए ट्रैक्टर बूम स्प्रेयर तैनात

लखीमपुर खीरी / पीलीभीत (CaneUp मौसम व ग्राउंड रिपोर्ट — 8 सितंबर, सुबह 7:55 बजे): भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों — लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, सीतापुर, हरदोई, बहराइच और बलरामपुर के लिए अगले 48 घंटों में भारी से बहुत भारी बारिश का येलो अलर्ट (Yellow Alert) जारी किया है।
घाघरा, शारदा और सुहेली नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने और निचले गन्ना खेतों में जलभराव की आशंका को देखते हुए गन्ना विकास विभाग और क्षेत्रीय चीनी मिलों (बलरामपुर, बजाज व गोविंद ग्रुप) ने संयुक्त रूप से 150 हाई-टेक ट्रैक्टर माउंटेड बूम स्प्रेयर (Boom Sprayers) और ड्रोन टीमों को अलर्ट मोड पर तैनात कर दिया है।
⚠️ अत्यधिक नमी में लाल सड़न (Red Rot) फैलने का 90% जोखिम
गन्ना शोध संस्थान गोला गोकर्णनाथ के पादप रोग वैज्ञानिकों के अनुसार:
- जब खेत में 3 दिन से अधिक पानी भरा रहता है और तापमान 28 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है, तो लाल सड़न के कारक फफूंद Colletotrichum falcatum के बीजाणु पानी की धार के साथ स्वस्थ गन्नों की जड़ों में प्रवेश कर जाते हैं।
- विशेष रूप से पुरानी संवेदनशील प्रजाति Co-0238 वाले खेतों में यह बीमारी 24 से 48 घंटे में पूरे खेत को सुखा सकती है।
| सुरक्षा उपाय | दवा का नाम व मात्रा (प्रति एकड़) | प्रयोग विधि |
|---|---|---|
| फफूंदनाशक स्प्रे | कार्बेन्डाजिम + मैंकोजेब (Saaf) 500 ग्राम | 200 लीटर पानी में घोलकर तने और जड़ क्षेत्र में छिड़काव |
| जैव नियंत्रण | ट्राइकोडर्मा विरिडी (Trichoderma) 2 किग्रा | गोबर की सड़ी खाद में मिलाकर जल निकासी के बाद खेत में बिखेरें |
| पोषक तत्व बूस्टर | म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किग्रा + सल्फर 3 किग्रा | पौधों की प्रतिरोधक क्षमता और गन्ने की मोटाई बढ़ाने हेतु |
🚜 मिलों द्वारा फ्री स्प्रेयर व सब्सिडी दवा वितरण
चीनी मिलों ने अपने-अपने कमान क्षेत्रों में जलभराव वाले गांवों को चिन्हित किया है:
- मिलों के बूम स्प्रेयर किसानों के खेतों में निःशुल्क दवा छिड़काव का कार्य कर रहे हैं।
- फफूंदनाशक दवाओं पर गन्ना समितियों द्वारा 50% का सीधा अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है।
जिलाधिकारी लखीमपुर खीरी ने राजस्व और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी ड्रेनेज नालों और साइफनों की गाद की सफाई तुरंत कराई जाए ताकि खेतों से अतिरिक्त पानी 24 घंटे में निकल सके।
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