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तराई बेल्ट में शारदा-घाघरा बेसिन में जलभराव अलर्ट — 24 घंटे में जल निकासी की कृषि एडवाइजरी

Aamir Raza Aamir Raza Sep 10, 2026 2 min read
तराई बेल्ट में शारदा-घाघरा बेसिन में जलभराव अलर्ट — 24 घंटे में जल निकासी की कृषि एडवाइजरी
अंतिम अपडेट: September 10, 2026 4:50 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

लखीमपुर खीरी/पीलीभीत (CaneUp ग्राउंड रिपोर्ट — 10 सितंबर 2026): नेपाल की तराई और उत्तराखंड की पहाड़ियों में पिछले 48 घंटों से हो रही मूसलाधार बारिश के चलते शारदा, घाघरा और सुहेली नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। बनबसा बैराज से अतिरिक्त पानी छोड़े जाने के कारण लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, बहराइच और सीतापुर जनपदों के 180 से अधिक निचले तराई गाँवों के गन्ना खेतों में 1 से 2 फीट तक पानी भर गया है।

उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद (UPCSR) और कृषि मौसम विज्ञान विभाग ने आज संयुक्त आपातकालीन परामर्श (Emergency Advisory) जारी करते हुए किसानों को तत्काल जल निकासी और फफूंदनाशक सुरक्षा उपाय करने का निर्देश दिया है।


⚠️ जलभराव से गन्ने को होने वाले 4 बड़े नुकसान

  1. जड़ों का दम घुटना (Root Asphyxiation): खेत में 72 घंटे से अधिक समय तक पानी जमा रहने से गन्ने की जड़ प्रणाली में ऑक्सीजन का संचार रुक जाता है, जिससे पोषक तत्व अवशोषण ठप हो जाता है।
  2. रेड रॉट (लाल सड़न) का तीव्र प्रसार: रुके हुए पानी और 28-32 डिग्री तापमान में फफूंद बीजाणु (Fungal Spores) तेजी से फैलते हैं।
  3. गन्ने का गिरना (Lodging): नरम मिट्टी में तेज हवा चलने से 10-12 फीट लंबा गन्ना जड़ सहित उखड़ जाता है, जिससे 30% वजन घट जाता है।
  4. सुक्रोज (मिठास) में भारी गिरावट: गन्ने के निचले पोरों में पानी भरने से रिकवरी 1.5% से 2% तक गिर जाती है।

🛠️ कृषि वैज्ञानिकों द्वारा सुझाई गई 5-सूत्रीय कार्ययोजना

चरणक्या करें?कैसे करें?लाभ
1. जल निकासीखेत की मेड़ काटकर नाली बनाएं24 घंटे के भीतर खेत से अतिरिक्त पानी बाहर निकालेंजड़ों में सड़न रुकेगी
2. बंधाई (Tying)गन्ने के 4-5 थानों को आपस में बांधेंपत्तों की रस्सी बनाकर कैंचीनुमा बंधाई करेंगन्ना आंधी में गिरने से बचेगा
3. पोटाश फोलियर स्प्रेपोटेशियम सल्फेट (0:0:50) का छिड़काव1 किग्रा 0:0:50 + 200 लीटर पानी प्रति एकड़गन्ने की तना शक्ति व मिठास बढ़ेगी
4. फफूंदनाशक सुरक्षाकॉपर ऑक्सीक्लोराइड का ड्रेचिंग500 ग्राम COC प्रति एकड़ जड़ों के पासलाल सड़न व उकठा रोग पर तुरंत रोक
5. यूरिया का प्रयोग रोकेंजलभराव वाले खेतों में यूरिया बिल्कुल न डालेंपानी सूखने तक कोई दानेदार खाद न देंपौधे में अनावश्यक कोमलता नहीं आएगी

जिला प्रशासन ने सिंचाई विभाग की 25 मोबाइल पम्पिंग मशीनों को संवेदनशील क्षेत्रों में जल निकासी के लिए तैनात किया है।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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