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तौल पर्ची पर लिखा 'शुद्ध वजन' ही आपका असली पैसा है: गन्ने की पर्ची की 8 लाइनों का मतलब और घटतौली पर सवाल कैसे उठाएं

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 3, 2026 • 6 min read
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तौल पर्ची पर लिखा 'शुद्ध वजन' ही आपका असली पैसा है: गन्ने की पर्ची की 8 लाइनों का मतलब और घटतौली पर सवाल कैसे उठाएं
अंतिम अपडेट: October 3, 2026 6:10 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

मिल के गेट पर ट्रॉली तौलने के बाद जो कागज की पर्ची हाथ में आती है, उसी पर आपका पूरा हिसाब टिका होता है। ज्यादातर किसान उस पर सिर्फ वजन की एक लाइन देखकर पर्ची जेब में रख लेते हैं। लेकिन पर्ची पर लिखी बाकी लाइनें भी उतनी ही अहम हैं — खासकर शुद्ध वजन वाली लाइन, क्योंकि भुगतान उसी पर मिलता है, न कि ट्रॉली समेत कुल वजन पर।

पेराई सत्र 2026-27 की शुरुआत 1 अक्टूबर से हो चुकी है और पश्चिमी यूपी की मिलें करीब 20 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं। मतलब गन्ना डालने का सीजन बिल्कुल सामने है। इस वक्त पर्ची पढ़ना सीख लेना सीधे पैसे से जुड़ा काम है।

पर्ची की 8 लाइनें और उनका मतलब

1. किसान का नाम और खाता/सट्टा संख्या

पर्ची पर सबसे ऊपर आपका नाम, पिता का नाम, गांव और गन्ना सट्टा संख्या या खाता संख्या लिखी होती है। नाम की स्पेलिंग या खाता संख्या में गड़बड़ी हो तो भुगतान गलत खाते में जाने का खतरा रहता है। पर्ची लेते ही यह पहली चीज चेक करें। अगर गलती है, तो उसी समय क्रय केंद्र प्रभारी से ठीक करवाएं।

2. क्रय केंद्र और मिल का नाम

पर्ची पर यह साफ लिखा होता है कि गन्ना किस क्रय केंद्र (तौल केंद्र) पर तौला गया और वह केंद्र किस मिल को जुड़ा है। यूपी में 122 चीनी मिलें हैं और ज्यादातर किसान मिल के बजाय नजदीकी तौल केंद्र पर गन्ना डालते हैं। केंद्र और मिल का नाम सही न होने पर बाद में शिकायत दर्ज कराने में दिक्कत आती है।

3. तारीख और समय

गन्ना तौलने की तारीख और समय पर्ची पर दर्ज होता है। यह लाइन इसलिए अहम है क्योंकि गन्ना तौलने की तारीख से ही भुगतान की गिनती शुरू होती है — कानूनी नियम के मुताबिक मिल को 14 दिन के भीतर भुगतान करना होता है। देरी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के 23 दिसंबर 2021 के फैसले के अनुसार 15% सालाना ब्याज का प्रावधान है।

4. सकल वजन (भरी ट्रॉली का वजन)

यह वह वजन है जो ट्रॉली या ट्रक के गन्ना समेत तौलने पर आता है। मान लीजिए भरी ट्रॉली का वजन 100 क्विंटल दिखा — यह आपका गन्ने का वजन नहीं है, इसमें ट्रॉली का वजन भी जुड़ा है।

5. खाली वजन (ट्रॉली/ट्रक का वजन)

गन्ना खाली करने के बाद खाली ट्रॉली दोबारा तौली जाती है। पर्ची पर यह अलग से दर्ज होता है। सकल वजन में से खाली वजन घटाकर ही शुद्ध गन्ना वजन निकलता है।

6. शुद्ध वजन (असली गन्ने का वजन)

यही वह लाइन है जिस पर आपका पैसा बनता है। शुद्ध वजन = सकल वजन − खाली वजन। भुगतान इसी शुद्ध वजन पर तय भाव से गुणा करके होता है। पर्ची लेते ही यह गणना खुद एक बार जरूर दोहरा लें।

7. घटतौली/कटौती (क्लैम्प, कचरा, पत्ती)

गन्ने में मिली मिट्टी, पत्ती, जड़ या सूखे गन्ने के बदले मिल एक तय कटौती काटती है। इसे ही किसान घटतौली कहते हैं। पर्ची पर यह कटौती क्विंटल या प्रतिशत में लिखी होती है। कटौती शुद्ध वजन से घटाकर भुगतान योग्य वजन निकाला जाता है। ध्यान रहे — कटौती मनमानी नहीं हो सकती; अगर आपको लगे कि कटौती ज्यादा काटी गई है, तो उसी समय आपत्ति दर्ज कराएं।

8. भाव और कुल राशि

अंतिम लाइन में प्रति क्विंटल भाव और कुल राशि लिखी होती है। भाव को लेकर एक बात साफ समझ लें: सत्र 2026-27 के लिए यूपी सरकार की ओर से SAP की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 में SAP ₹400 प्रति क्विंटल (अगेती) और ₹390 प्रति क्विंटल (सामान्य) था। वहीं केंद्र सरकार ने सत्र 2026-27 के लिए FRP ₹365 प्रति क्विंटल (10.25% रिकवरी पर) तय किया है। पर्ची पर जो भाव लिखा हो, वह किस सत्र और किस श्रेणी का है, यह जरूर देखें। FRP और SAP का पूरा गणित यहां समझें

तौल में गड़बड़ी के 5 संकेत

  1. शुद्ध वजन हर बार एक जैसा कम आना: एक ही खेत, एक ही ट्रॉली से हर बार वजन घटता जाए तो कांटे की जांच करवाएं।
  2. खाली वजन में अंतर: ट्रॉली का खाली वजन हर बार बदलता दिखे तो समझिए कुछ गड़बड़ है।
  3. बिना बताए ज्यादा कटौती: पर्ची पर घटतौली की लाइन खाली हो या कटौती का कारण न लिखा हो।
  4. पर्ची देने में देरी या मना करना: तौल के तुरंत बाद पर्ची किसान का अधिकार है; पर्ची न मिलना सबसे बड़ा लाल झंडा है।
  5. डिजिटल डिस्प्ले छिपाना: कांटे का डिजिटल डिस्प्ले किसान को दिखना चाहिए। अगर डिस्प्ले छिपाया जाए या तोड़-फोड़ दिखे तो आपत्ति उठाएं।

घटतौली या तौल पर सवाल कैसे उठाएं: 4 कदम

कदम 1 — मौके पर आपत्ति: पर्ची पर हस्ताक्षर करने से पहले ही क्रय केंद्र प्रभारी को लिखित आपत्ति दें और पर्ची की फोटो अपने फोन में रख लें।

कदम 2 — गन्ना समिति में शिकायत: अपनी गन्ना समिति के सचिव को लिखित शिकायत दें। समिति स्तर पर ही ज्यादातर तौल विवाद सुलझ जाते हैं।

कदम 3 — गन्ना अधिकारी/जिला गन्ना अधिकारी: समिति से समाधान न हो तो जिला गन्ना अधिकारी (DCO) को शिकायत दें। तौल केंद्रों की जांच का अधिकार इन्हीं के पास है।

कदम 4 — टोल-फ्री हेल्पलाइन: गन्ना विभाग की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। SMS के लिए सरकारी शॉर्टकोड 51969 है। शिकायत दर्ज कराने का पूरा तरीका यहां पढ़ें

eGanna ऐप में पर्ची का डिजिटल रिकॉर्ड

कागज की पर्ची खो जाए तो घबराने की जरूरत नहीं। eGanna ऐप में आपकी हर तौल पर्ची का डिजिटल रिकॉर्ड मिलता है — तारीख, वजन, कटौती और भुगतान की स्थिति समेत। पेराई सत्र शुरू होने से पहले ऐप में अपना सट्टा और बैंक खाता लिंक जरूर जांच लें, ताकि भुगतान में देरी न हो। eGanna में लाइव पर्ची ट्रैकिंग का तरीका

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: पर्ची खो गई तो क्या भुगतान नहीं मिलेगा? जवाब: भुगतान पर्ची के डिजिटल रिकॉर्ड पर होता है, सिर्फ कागज पर नहीं। eGanna ऐप या गन्ना समिति से डुप्लीकेट पर्ची/रिकॉर्ड मिल सकता है। फिर भी हर पर्ची की फोटो फोन में रखना सबसे सुरक्षित तरीका है।

सवाल: मिल को गन्ने का भुगतान कितने दिन में करना होता है? जवाब: गन्ना तौलने की तारीख से 14 दिन के भीतर। देरी होने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार 15% सालाना ब्याज का प्रावधान है।

सवाल: घटतौली की कटौती कितनी होनी चाहिए? जवाब: कटौती का कोई एक तय आंकड़ा पर्ची पर पहले से नहीं छपा होता — यह गन्ने की सफाई और गुणवत्ता पर निर्भर करती है। लेकिन कटौती का कारण और मात्रा पर्ची पर साफ लिखी होनी चाहिए। बिना कारण ज्यादा कटौती पर आपत्ति का अधिकार किसान के पास है।

सवाल: पर्ची पर भाव पुराने सत्र का लिखा हो तो क्या करें? जवाब: पर्ची पर हमेशा मौजूदा सत्र का घोषित भाव ही लिखा होना चाहिए। सत्र 2026-27 के लिए यूपी का SAP अभी घोषित नहीं हुआ है — घोषणा होते ही मिलों को उसी भाव से भुगतान करना होगा। पर्ची पर भाव की लाइन जरूर जांचें।

सवाल: तौल केंद्र पर कांटा सही है या नहीं, यह कैसे पता चलेगा? जवाब: यूपी में तौल कांटों की डिजिटल सीलिंग और किसान निगरानी समितियों का प्रावधान है। कांटे का डिजिटल डिस्प्ले किसान को दिखना चाहिए और खाली ट्रॉली का वजन हर बार एक जैसा आना चाहिए। शक हो तो जिला गन्ना अधिकारी से जांच की मांग करें।

स्रोत: द टाइम्स ऑफ इंडिया (पेराई सत्र 2026-27 की तैयारियां, SAP 2025-26, 122 मिलें), डेक्कन हेराल्ड/चिनीमंडी (FRP 2026-27 ₹365 प्रति क्विंटल), चिनीमंडी (इलाहाबाद हाईकोर्ट का 15% ब्याज आदेश)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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