तराई में गन्ने की लाल सड़न (Red Rot) पर कृषि विभाग का आपात मिशन — 50 मोबाइल टेस्टिंग लैब लखीमपुर-पीलीभीत रवाना: 15 मिनट में ऑन-फील्ड रिपोर्ट व मुफ्त स्प्रे किट वितरण शुरू

गोला गोकर्णनाथ / लखीमपुर खीरी (CaneUp विशेष रिपोर्ट — 16 सितंबर 2026, प्रातः 07:10 IST): तराई क्षेत्र के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, सीतापुर और शाहजहांपुर में भारी मानसूनी जलभराव के बाद Co 0238 प्रजाति के खेतों में तेजी से फैल रही ‘लाल सड़न’ (Red Rot / Colletotrichum falcatum) बीमारी पर काबू पाने के लिए गन्ना विकास विभाग ने बुधवार सुबह आपातकालीन मोर्चे की घोषणा कर दी है।
गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर के निदेशक और गोला गोकर्णनाथ अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ पादप रोग वैज्ञानिकों की अगुवाई में आज 50 हाई-टेक मोबाइल डायग्नोस्टिक वैन (चलंत गन्ना प्रयोगशालाएं) को हरी झंडी दिखाकर गांवों के लिए रवाना किया गया। यह टीमें सीधे किसान के खेत की मेड़ पर पहुंचकर 15 मिनट में पौधे के संक्रमित ऊतकों की रैपिड स्ट्रिप टेस्टिंग करेंगी।
🔬 मोबाइल वैन में क्या-क्या आधुनिक सुविधाएं हैं?
प्रत्येक मोबाइल लैब में 1 प्लांट पैथोलॉजिस्ट, 1 गन्ना विकास निरीक्षक और 2 फील्ड असिस्टेंट तैनात हैं, जो निम्नलिखित सेवाएं दे रहे हैं:
- रैपिड टिश्यू टेस्ट (15 Minutes Diagnostic): गन्ने के तने का क्रॉस-सेक्शन काटकर आंतरिक फंगल स्पोर्स की तुरंत डिजिटल माइक्रोस्कोपिक जांच।
- बीमारी का ग्रेडिंग स्तर (Disease Severity Rating): 1 से 9 के स्केल पर रोग की तीव्रता मापकर किसान को तुरंत लिखित पर्ची।
- मिट्टी का पीएच व नमी परीक्षण (Soil pH & Moisture): जलभराव वाले निचले खेतों में फफूंद के पनपने की संभावनाओं का ऑन-स्पॉट विश्लेषण।
- मुफ्त दवा किट आवंटन (Free Fungicide Distribution): गंभीर रूप से प्रभावित सीमांत व लघु किसानों को मौके पर ही सरकारी अनुदानित दवा किट।
📦 किसानों को मिलने वाली ‘रेड रॉट सुरक्षा किट’ में क्या है?
राज्य सरकार के विशेष आकस्मिक निधि से तैयार की गई इस किट में निम्नलिखित उपचार सामग्री शामिल है:
| सामग्री (Component) | मात्रा प्रति किट (Quantity) | उपयोग का वैज्ञानिक तरीका (Application Protocol) |
|---|---|---|
| कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50% WP (Fungicide) | 500 ग्राम | 200 लीटर पानी में घोलकर प्रभावित पौधों की जड़ों पर ड्रेंचिंग करें। |
| ट्राइकोडर्मा विरिडी (जैविक फफूंदनाशक) | 1.0 किलोग्राम | 50 किग्रा सड़ी गोबर की खाद में मिलाकर खेत की नालियों में बुरकाव करें। |
| ब्लीचिंग पाउडर (Sanitization Lime) | 2.5 किलोग्राम | रोगग्रस्त पौधे उखाड़ने के बाद गड्ढे में 20 ग्राम डालकर मिट्टी पलटें। |
| वैज्ञानिक एडवाइजरी चार्ट | 1 सचित्र ब्रोशर | आगामी शरदकालीन बुवाई हेतु स्वस्थ नर्सरी व किस्म चयन गाइड। |
📍 आज 16 सितंबर को किन-किन सर्किलों में घूमेंगी मोबाइल वैन?
- लखीमपुर खीरी सर्किल: गोला, पलिया कलां, बिजुआ, मोहम्मदी, ऐरा, खंभारखेड़ा और कुंभी ब्लॉक के 85 संवेदनशील गांव।
- पीलीभीत सर्किल: पूरनपुर, बीसलपुर, कलीनगर, बरखेड़ा और अमरिया क्षेत्र के 42 जलमग्न गांव।
- शाहजहांपुर सर्किल: पुवायां, तिलहर, बंडा और निगोही क्षेत्र के 30 गन्ना बहुल गांव।
📞 किसान हेल्पलाइन नंबर: घर बैठे बुलाएं मोबाइल वैन
यदि आपके खेत में गन्ने की तीसरी-चौथी पत्ती पीली पड़कर सूख रही है या तना चीरने पर शराब जैसी बदबू के साथ सफेद धारियां दिख रही हैं, तो तुरंत अपने गांव में मोबाइल वैन बुलाने के लिए गोला अनुसंधान केंद्र के कंट्रोल रूम नंबर 05876-222340 या व्हाट्सएप हेल्पलाइन 94544-16000 पर अपने खेत की फोटो और लोकेशन भेजें।
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