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लखीमपुर, पीलीभीत और बिजनौर के गन्ने के खेतों में बाघ-गुलदार का खतरा: वन विभाग ने जारी की 7 सावधानियां — समूह में जाएं खेत, बजाएं सायरन

Aamir Raza Sep 23, 2026 3 min read
लखीमपुर, पीलीभीत और बिजनौर के गन्ने के खेतों में बाघ-गुलदार का खतरा: वन विभाग ने जारी की 7 सावधानियां — समूह में जाएं खेत, बजाएं सायरन
अंतिम अपडेट: September 23, 2026 1:30 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

लखीमपुर खीरी / पीलीभीत / बिजनौर (CaneUp विशेष ब्यूरो — 23 सितंबर 2026): उत्तर प्रदेश के तराई अंचल और वन सीमावर्ती जनपदों (विशेषकर लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, बहराइच, श्रावस्ती और बिजनौर के अमानगढ़ बफर जोन) में आगामी पेराई सत्र की गन्ने की कटाई और बंधाई शुरू होने से पहले वन विभाग ने हाई-अलर्ट घोषित किया है। घने और 12 से 14 फीट ऊंचे गन्ने के खेत बाघ (Tiger) और गुलदार (Leopard) के लिए प्राकृतिक आवास जैसा सुरक्षित ठिकाना बन जाते हैं।

मानव-वन्यजीव संघर्ष (Man-Animal Conflict) की रोकथाम और किसानों के जीवन की रक्षा के लिए मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) ने 7-सूत्रीय सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है।


🛡️ गन्ने के खेतों में जाने वाले किसानों के लिए 7 जीवन रक्षक सावधानियां

  1. अकेले खेत में कदापि न जाएं: खेत में सिंचाई, बंधाई या कटाई के लिए हमेशा 4 से 5 लोगों के समूह में जाएं।
  2. साउंड और सायरन का प्रयोग: खेत में घुसने से पहले थाली, ढोल, लाठी या तेज आवाज वाला सायरन बजाएं ताकि यदि कोई हिंसक जानवर खेत में बैठा हो तो वह पहले ही जंगल की ओर निकल जाए।
  3. सुबह-शाम (Dawn & Dusk) खेत में जाने से बचें: सुबह 5 से 7 बजे और शाम को सूरज ढलने के बाद बाघ और गुलदार सबसे अधिक सक्रिय और आक्रामक होते हैं। इस समय खेतों में न जाएं।
  4. गन्ने के बीच झुककर काम करते समय विशेष सतर्कता: झुककर निराई या कटाई करते समय इंसान शिकारी जानवर को चार पैरों वाले शिकार जैसा प्रतीत होता है। सिर पर बांस की टोपी या चेहरे का मुखौटा पीछे की तरफ लगाएं।
  5. बच्चों और मवेशियों को गन्ने के पास न जाने दें: खेतों की मेड़ों पर छोटे बच्चों को अकेला न छोड़ें और बकरियों/बछड़ों को खुले में न बांधें।
  6. खेत के चारों ओर 10 फीट की खुली पट्टी: गन्ने के खेत और मुख्य रास्ते के बीच कम से कम 10 फीट घास साफ रखें ताकि दूर से ही हलचल दिखाई दे सके।
  7. सोलर झटका तार (Solar Fencing) पर अनुदान: जंगल से सटे खेतों की सुरक्षा के लिए सरकार सोलर फेंसिंग मशीन पर प्रति किसान ₹30,000 तक का 50% अनुदान दे रही है।

📞 वन विभाग आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर

यदि किसी भी गन्ने के खेत में बाघ, तेंदुआ या पगमार्क (पंजों के निशान) दिखाई दें, तो तुरंत इन नंबरों पर सूचना दें:

  • राज्य वन्यजीव आपातकालीन नियंत्रण कक्ष: 1926 (टोल-फ्री 24 घंटे)
  • दुधवा टाइगर रिजर्व कंट्रोल रूम: 05872-252106
  • पीलीभीत टाइगर रिजर्व हेल्पलाइन: 05882-255018

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्रश्न 1: खेत में बाघ दिखने पर क्या करें?

उत्तर: बिल्कुल न भागें और न ही पत्थर मारें। शांत रहकर धीरे-धीरे पीछे हटें और शोर मचाकर ग्रामीणों को इकट्ठा करें और वन विभाग को सूचित करें।

प्रश्न 2: सोलर फेंसिंग से जानवर को नुकसान पहुंचता है?

उत्तर: नहीं। सोलर झटका मशीन में केवल 12 वोल्ट का पल्स करंट होता है, जो जानवर को तेज झटका देकर दूर भगाता है लेकिन जान का कोई नुकसान नहीं होता।

प्रश्न 3: क्या वन्यजीव हमले में सरकारी मुआवजे का प्रावधान है?

उत्तर: उत्तर प्रदेश शासन के नियमानुसार वन्यजीव संघर्ष में जनहानि होने पर पीड़ित परिवार को ₹5 लाख का त्वरित आर्थिक मुआवजा दिया जाता है।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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