मुजफ्फरनगर में रातभर चली BKU की महापंचायत: गन्ना भाव ₹500 नहीं तो आंदोलन की चेतावनी, 16 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा

🚨 BREAKING: उत्तर प्रदेश में भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) ने अपनी पहली बड़ी रात्रि महापंचायत मुजफ्फरनगर के जीआईसी ग्राउंड में आयोजित की, जो आधी रात के बाद तक चली। महापंचायत में बीकेयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने साफ चेतावनी दी कि अगर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों की मांगें नहीं मानीं तो बड़ा आंदोलन होगा। सबसे अहम मांग — पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का भाव ₹500 से ₹600 प्रति क्विंटल तय किया जाए। महापंचायत के बाद बीकेयू ने 16 सूत्रीय मांगपत्र जिला अधिकारियों के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार को सौंपा।
मुजफ्फरनगर में रातभर क्यों जुटी किसानों की भीड़
महापंचायत गुरुवार की रात मुजफ्फरनगर के सरकारी इंटर कॉलेज (जीआईसी) ग्राउंड में हुई, जिसमें मुजफ्फरनगर के साथ-साथ आसपास के जिलों के किसान बड़ी संख्या में पहुंचे। आयोजकों के अनुसार यह उत्तर प्रदेश में इस तरह की पहली बड़ी रात्रि सभा थी। राकेश टिकैत ने बताया कि रात में होने वाली इस तरह की सभाएं किसानों और मजदूरों को संगठित करने और प्रशिक्षित करने में मदद करती हैं, और संकेत दिया कि व्यापक अभियान के तहत दूसरे जिलों में भी ऐसी बैठकें हो सकती हैं।
सभा आधी रात के बाद तक चली, जिसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामुदायिक भोज हुआ। टिकैत ने मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाने की अपील की। उत्तराखंड के खानपुर विधायक उमेश कुमार शर्मा, गठवाला खाप के मुखिया थानेदार श्याम सिंह मलिक और पंजाब, हरियाणा, दिल्ली समेत कई राज्यों के किसान प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
टिकैत की चेतावनी: ₹500 गन्ना भाव और MSP गारंटी कानून
महापंचायत में बीकेयू नेताओं ने मांग की कि गन्ने का भाव बढ़ाकर ₹500 से ₹600 प्रति क्विंटल किया जाए। राकेश टिकैत ने कहा कि केंद्र सरकार ने फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी की लंबे समय से चली आ रही मांग अब तक पूरी नहीं की है, जिससे किसानों के पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
बीकेयू अध्यक्ष नरेश टिकैत ने जमीन अधिग्रहण के मुद्दे पर कहा कि किसान विकास परियोजनाओं के विरोध में नहीं हैं, लेकिन जब कृषि भूमि सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए अधिगृहीत की जाती है तो उन्हें उचित मुआवजा मिलना ही चाहिए। महापंचायत में कृषि भूमि के सर्कल रेट बढ़ाने और कृषि क्षेत्रों की सुरक्षा की भी मांग उठी।
16 सूत्रीय मांगपत्र में क्या-क्या शामिल है
महापंचायत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित 16 सूत्रीय मांगपत्र जिला अधिकारियों के माध्यम से सौंपा गया। इसमें ये प्रमुख मांगें शामिल हैं — लाभकारी कृषि मूल्य और प्रभावी खरीद व्यवस्था, चीनी मिलों का बकाया भुगतान शीघ्र कराना, ग्रामीण बिजली आपूर्ति में सुधार, डीएपी और यूरिया खाद का निर्बाध वितरण, आवारा पशुओं की समस्या का समाधान, आपदा मुआवजा, फसल बीमा के दावे का उचित आकलन, नहर सिंचाई का मजबूत नेटवर्क, कृषि ऋण राहत, मंडी में किसानों के शोषण पर रोक, कृषि मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा, भूमि अधिग्रहण में किसान-अनुकूल नियम, विरोध कर रहे किसानों के खिलाफ दर्ज पुलिस केस वापस लेना, कृषि लागत पर नियंत्रण, किसान यूनियनों के साथ नियमित सरकारी परामर्श, और सोलानी नदी पर बैराज सहित क्षेत्रीय आधारभूत ढांचे का विकास।
अमेरिका ट्रेड डील पर टिकैत ने जताई गहरी चिंता
महापंचायत में प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भी गंभीर चर्चा हुई। राकेश टिकैत ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका से कम या शून्य शुल्क पर कृषि उत्पादों का आयात होगा तो भारतीय किसानों पर दबाव बढ़ेगा। उन्होंने विशेष रूप से अमेरिका से पशु आहार (एनिमल फीड) के आयात की संभावना पर चिंता जताई, जिसका असर खली और बिनौला जैसे घरेलू उत्पादों पर पड़ सकता है। टिकैत ने कृषि से जुड़े व्यापार प्रारूप (ड्राफ्ट फ्रेमवर्क) को रद्द करने की मांग की और कहा कि घरेलू बाजार की संप्रभुता से समझौता किया गया तो देशभर में प्रदर्शन होगा।
23 अक्टूबर को लखनऊ में गन्ना मुद्दे पर बड़ा कार्यक्रम
बीकेयू ने घोषणा की कि गन्ना से जुड़े मुद्दों पर उनका अभियान जारी रहेगा और 23 अक्टूबर को लखनऊ में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जो पूरी तरह गन्ना मुद्दों पर केंद्रित होगा। यह तारीख इसलिए भी अहम है क्योंकि उत्तर प्रदेश में पेराई सत्र 2026-27 इसी समय शुरू होने की उम्मीद है, और सरकार को पेराई शुरू होने से पहले राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) घोषित करना होता है।
अभी कितना मिल रहा है गन्ने का भाव
किसानों की ₹500 की मांग को समझने के लिए मौजूदा भाव जानना जरूरी है। केंद्र सरकार ने 2026-27 पेराई सत्र के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) ₹10 प्रति क्विंटल बढ़ाकर ₹365 प्रति क्विंटल तय किया है। उत्तर प्रदेश में पिछले सत्र के लिए राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) जल्दी पकने वाली किस्म के लिए ₹400 और सामान्य किस्म के लिए ₹390 प्रति क्विंटल था। यानी बीकेयू की ₹500 की मांग मौजूदा SAP से करीब ₹100 ज्यादा है।
गौरतलब है कि बीकेयू के ही दूसरे गुट (चौधरी करतार सिंह गुट) ने कुछ दिन पहले अमरोहा की महापंचायत में 2026-27 सत्र के लिए ₹600 प्रति क्विंटल गन्ना भाव की मांग की थी और चेतावनी दी थी कि अगर 20 अक्टूबर तक भाव घोषित नहीं हुआ तो 25 अक्टूबर को गन्ना जलाकर विरोध किया जाएगा। इस तरह अलग-अलग किसान संगठनों के बीच ₹500 से ₹600 तक की मांगें उभर रही हैं।
किसानों के लिए आगे क्या मायने रखता है
पेराई सत्र 2026-27 की शुरुआत नजदीक है और केंद्र सरकार ने राज्यों व चीनी मिलों को 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की सलाह दी है। उत्तर प्रदेश में SAP की घोषणा अभी बाकी है, और किसान संगठनों का दबाव बढ़ता जा रहा है। टिकैत का रात में महापंचायत करके किसानों को संगठित करना और लखनऊ में 23 अक्टूबर के कार्यक्रम की घोषणा यह संकेत देती है कि इस बार भाव की लड़ाई पेराई से पहले ही तेज होगी। किसानों को सलाह है कि अपने क्षेत्र की मिल की पेराई तिथि, पर्ची कैलेंडर और सर्वे डेटा eGanna पोर्टल पर जरूर जांचते रहें, ताकि भाव घोषित होते ही आपूर्ति में देरी न हो।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बीकेयू की रात्रि महापंचायत में मुख्य मांगें क्या थीं? मुख्य मांगें थीं — गन्ना भाव ₹500 से ₹600 प्रति क्विंटल, फसलों के MSP की कानूनी गारंटी, बढ़ती कृषि लागत पर रोक, बिजली आपूर्ति में सुधार, कृषि भूमि के सर्कल रेट में बढ़ोतरी और उचित भूमि अधिग्रहण मुआवजा।
महापंचायत में कितनी मांगों का ज्ञापन सौंपा गया? महापंचायत में 16 सूत्रीय मांगपत्र तैयार कर गुरुवार रात जिला अधिकारियों के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार को सौंपा गया।
लखनऊ में गन्ना मुद्दे पर कब कार्यक्रम होगा? बीकेयू ने 23 अक्टूबर को लखनऊ में गन्ना मुद्दों पर विशेष कार्यक्रम की घोषणा की है।
अभी गन्ने का FRP और UP में SAP कितना है? 2026-27 सत्र के लिए केंद्र का FRP ₹365 प्रति क्विंटल है, जबकि उत्तर प्रदेश में पिछले सत्र का SAP जल्दी पकने वाली किस्म के लिए ₹400 और सामान्य किस्म के लिए ₹390 प्रति क्विंटल था।
अमेरिका ट्रेड डील पर टिकैत ने क्या कहा? टिकैत ने चेतावनी दी कि अमेरिका से कम या शून्य शुल्क पर कृषि उत्पादों और पशु आहार के आयात से भारतीय किसानों पर दबाव पड़ेगा, इसलिए कृषि व्यापार प्रारूप को रद्द किया जाना चाहिए।
स्रोत: द इकोनॉमिक टाइम्स, द टाइम्स ऑफ इंडिया, चिनीमंडी, एग्रीइनसाइट (सितंबर 2026)
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