आज 18 मंडलों में किसानों का धरना: गन्ना भाव 500 रुपये की मांग, बकाया भुगतान पर ब्याज और जलभराव का मुआवजा भी एजेंडे में

आज, 3 नवंबर को उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों ने एक साथ आवाज उठाई है। भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के आह्वान पर प्रदेश के सभी 18 मंडलों में धरना-प्रदर्शन हो रहा है, और सबसे बड़ी मांग एक ही है — गन्ने का लाभकारी मूल्य कम से कम 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया जाए। पेराई सत्र 2026-27 शुरू हो चुका है, लेकिन इस सत्र का गन्ना मूल्य यानी एसएपी अब तक घोषित नहीं हुआ है।
बरेली मंडल: मंडलायुक्त कार्यालय पर धरने की घोषणा
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, पीलीभीत में रविवार को जिलाध्यक्ष मंजीत सिंह के आवास पर हुई बैठक में तय हुआ कि 3 नवंबर को बरेली मंडलायुक्त कार्यालय पर धरना दिया जाएगा। बैठक में कहा गया कि सरकार ने अभी तक गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी नहीं की है, जबकि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और किसान आर्थिक तंगी में हैं। संगठन ने पिछले सत्र का बकाया गन्ना मूल्य ब्याज सहित तुरंत चुकाने की मांग भी की है।
बरेली मंडल के किसानों के लिए बकाया भुगतान का मुद्दा सिर्फ नारा नहीं है। बहेड़ी की केसर चीनी मिल पर करीब 162 करोड़ रुपये बकाया है, और मिल की जमीन की नीलामी 17 नवंबर को तय है।
मुरादाबाद में 600 रुपये की मांग, गांव-गांव में नुक्कड़ सभाएं
मुरादाबाद मंडल में प्रदर्शन की धार और तेज है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधरी महेंद्र सिंह रंधावा ने कहा है कि किसी भी कीमत पर 600 रुपये प्रति क्विंटल से कम गन्ना मूल्य मंजूर नहीं होगा। धरने की सफलता के लिए पदाधिकारियों ने कांठ तहसील के दर्जन भर गांवों में भ्रमण कर नुक्कड़ सभाएं कीं और किसानों से सीधा संपर्क किया।
रंधावा ने कहा कि संगठन निरंतर किसानों के हितों के लिए संघर्ष कर रहा है और इस बार किसी दशा में कम गन्ना मूल्य बर्दाश्त नहीं होगा। मुरादाबाद में धरने के साथ पंचायत भी होगी और मंडलायुक्त को ज्ञापन दिया जाएगा। बरेली में 500 और मुरादाबाद में 600 रुपये की मांग अलग-अलग है, लेकिन संदेश एक है — मौजूदा भाव किसानों को मंजूर नहीं।
मांगों की पूरी सूची: सिर्फ भाव नहीं, पांच मुद्दे एक साथ
इस आंदोलन की खास बात यह है कि यह सिर्फ गन्ने के भाव तक सीमित नहीं है। संगठन के प्रेस नोट और नेताओं के बयानों के अनुसार, 3 नवंबर के प्रदर्शन में पांच मुद्दे एक साथ उठाए गए हैं। पहला, गन्ने का मूल्य कम से कम 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया जाए। दूसरा, चीनी मिलों पर बकाया गन्ना मूल्य का ब्याज सहित तत्काल भुगतान हो। तीसरा, धान की खरीद में आ रही अनियमितताएं दूर की जाएं। चौथा, जलनिकासी की समस्या का स्थायी समाधान हो। पांचवां, जलभराव से फसल को हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाए।
जलभराव का मुद्दा भी अहम है — लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, हरदोई और शाहजहांपुर समेत कई जिलों में जलभराव से फसल को भारी नुकसान हुआ है, और किसानों ने नुकसान के आकलन के बाद मुआवजे की मांग की है।
23 अक्टूबर की लखनऊ मुलाकात से शुरू हुआ था यह दबाव
आज का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन अचानक नहीं हुआ है। इसकी जमीन 23 अक्टूबर को तैयार हुई थी, जब संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने लखनऊ में अपर मुख्य सचिव गन्ना एवं चीनी उद्योग वीना कुमारी से मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक और युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह शामिल थे, और उन्होंने पेराई सत्र शुरू होने से पहले गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने की मांग की थी।
उस मुलाकात में मलिक ने कहा था कि उत्तर प्रदेश में गन्ना ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और प्रदेश के करीब 48 लाख किसान परिवार प्रत्यक्ष रूप से इससे जुड़े हैं। उन्होंने यह भी बताया था कि कोल्हू और क्रेशर पर गन्ने की खरीद 480 रुपये प्रति क्विंटल तक की जा रही है, जिससे मिलों के सामने गन्ना आपूर्ति का संकट पैदा हो सकता है। अपर मुख्य सचिव ने मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और गन्ना सुरक्षण आदेश की समीक्षा कराने का आश्वासन दिया था, जिसके बाद संगठन ने 3 नवंबर को सभी 18 मंडलों में प्रदर्शन की घोषणा की थी।
2026-27 एसएपी की स्थिति: घोषणा अब भी बाकी है
सबसे जरूरी बात साफ-साफ समझ लें: पेराई सत्र 2026-27 के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले पेराई सत्र 2025-26 में अगेती किस्म के लिए 400 रुपये, सामान्य किस्म के लिए 390 रुपये और अनुपयुक्त किस्म के लिए 355 रुपये प्रति क्विंटल एसएपी निर्धारित हुआ था। इस सत्र के लिए मीडिया में बढ़ोतरी की अटकलें चल रही हैं, लेकिन सरकार की अधिसूचना आने तक किसी दावे को पक्का न मानें। अंतिम निर्णय राज्य मंत्रिमंडल को लेना है।
यूपी में कुल 122 चीनी मिलें हैं, और इस सत्र में हरियावां, बघौली, मवाना, दौराला और रोहाना कलां जैसी कई मिलों ने पेराई शुरू कर दी है। किसानों की चिंता यही है कि भाव की घोषणा में देरी हुई तो मिलें पुराने भाव पर ही गन्ना लेती रहेंगी।
मिलों का पक्ष और किसानों की लागत का गणित
दूसरी ओर मिल संचालक बढ़ते परिचालन खर्च का हवाला देकर मूल्य वृद्धि का विरोध कर रहे हैं। उनके आकलन में ढुलाई, वेतन और प्रक्रिया खर्च जोड़कर एक क्विंटल चीनी की लागत करीब 4,200 से 4,300 रुपये तक पहुंचती है। किसानों का तर्क अलग है — उनके अनुसार इस सत्र में गन्ने की औसत उत्पादन लागत करीब 2,22,520 रुपये प्रति हेक्टेयर है, जो पिछले वर्ष से लगभग 10,477 रुपये प्रति हेक्टेयर अधिक है। किसानों का कहना है कि जब कोल्हू 480 रुपये तक दे रहे हैं, तो मिलों का भाव उससे कम होना समझ से बाहर है।
किसानों के लिए आगे क्या देखें
आज के धरने के बाद नजर इस बात पर रहेगी कि मंडलायुक्तों को सौंपे गए ज्ञापनों पर शासन क्या जवाब देता है और एसएपी की घोषणा कब आती है। किसान भाइयों के लिए इस दौरान तीन बातों का ध्यान रखना जरूरी है: अपनी पर्ची और कैलेंडर पर नजर रखें, तौल पर्ची और आपूर्ति रसीद संभालकर रखें, और किसी समस्या पर अपनी गन्ना समिति या जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें। गन्ना विभाग का टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 भी मदद के लिए उपलब्ध है।
यह भी याद रखें कि एसएपी की घोषणा सिर्फ सरकार की अधिसूचना से मानी जाएगी — सोशल मीडिया पर घूम रहे भाव के दावों को तब तक पक्का न मानें, जब तक शासन का आदेश सामने न आ जाए।
जवाब जानिए
प्रश्न: 3 नवंबर को किसानों ने धरना क्यों दिया? उत्तर: मुख्य मांग गन्ने का भाव कम से कम 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करना है, क्योंकि पेराई सत्र 2026-27 शुरू हो चुका है लेकिन एसएपी की घोषणा अब तक नहीं हुई है।
प्रश्न: किसानों की अन्य मांगें क्या हैं? उत्तर: बकाया गन्ना मूल्य का ब्याज सहित तत्काल भुगतान, धान खरीद की अनियमितताएं दूर करना, जलनिकासी का स्थायी समाधान और जलभराव से हुए फसल नुकसान का मुआवजा।
प्रश्न: 2026-27 का एसएपी कब घोषित होगा? उत्तर: अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। पिछले सत्र 2025-26 में अगेती के लिए 400 रुपये और सामान्य किस्म के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल एसएपी था। नई घोषणा मंत्रिमंडल के फैसले के बाद अधिसूचना से होगी।
प्रश्न: बकाया भुगतान में देरी पर किसान क्या कर सकते हैं? उत्तर: अपनी गन्ना समिति और जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें, या टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 पर शिकायत दर्ज कराएं। तौल पर्ची और आपूर्ति रसीद संभालकर रखना जरूरी है।
स्रोत: अमर उजाला (बदायूं, मुरादाबाद), फ्रेंड्स रिपोर्टर, भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक का प्रेस नोट।
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