यूपी में 9 चीनी मिलों में गन्ना पेराई शुरू, 33 मिलों ने जारी किया इंडेंट — दिवाली से पहले आपकी तौल कब शुरू होगी, पूरी जानकारी

उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए इस हफ्ते की सबसे बड़ी राहत की खबर यही है कि पेराई सत्र 2026-27 ने अब रफ्तार पकड़ ली है। गन्ना विकास विभाग के अनुसार प्रदेश की 9 चीनी मिलों में गन्ने की पेराई शुरू हो चुकी है, जबकि 33 चीनी मिलों ने गन्ना खरीद के लिए इंडेंट जारी कर दिया है। जिनकी मिल चल पड़ी है, वहां तौल और आपूर्ति शुरू हो गई है, और जिनकी मिल अभी नहीं चली है, वहां भी इंडेंट का मतलब है कि खरीद की तैयारी अंतिम चरण में है।
यह खबर इसलिए भी अहम है क्योंकि अक्टूबर की बारिश ने पेराई की शुरुआत को पीछे धकेल दिया था। अक्टूबर के आखिर तक यूपी में सिर्फ 3 मिलें ही चल पाई थीं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 10 मिलें चल चुकी थीं। अब 9 मिलों के चलने और 33 मिलों के इंडेंट से साफ है कि सत्र ने गति पकड़ ली है।
9 मिलें कहां-कहां चलीं
गन्ना विकास विभाग के अनुसार पेराई शुरू करने वाली 9 मिलों में सहकारी क्षेत्र की 1 और निजी क्षेत्र की 8 मिलें शामिल हैं। परिक्षेत्र के हिसाब से बंटवारा इस तरह है — सहारनपुर की 3, मेरठ की 1, मुरादाबाद की 2 और लखनऊ परिक्षेत्र की 3 मिलें।
यह बंटवारा इसलिए मायने रखता है क्योंकि गन्ना आपूर्ति हमेशा अपने आवंटित क्रय केंद्र और अपनी मिल से ही होती है। अगर आपकी मिल इन 9 में शामिल है तो आपका गन्ना अब मिल के शेड्यूल के अनुसार तौल केंद्रों पर लिया जा रहा होगा।
33 मिलों का इंडेंट क्या बताता है
आसान भाषा में समझें तो इंडेंट वह आदेश है जिसके जरिए मिल यह बताती है कि वह किस क्रय केंद्र से, किस दिन, कितना गन्ना खरीदेगी। इंडेंट के बाद ही क्रय केंद्रों पर तौल का शेड्यूल बनता है और किसानों को पर्ची के अनुसार गन्ना लाने की सूचना मिलती है।
प्रदेश की 33 चीनी मिलों द्वारा गन्ना खरीद के लिए इंडेंट जारी कर दिया गया है। इसमें वे 9 मिलें भी शामिल हैं जहां पेराई शुरू हो चुकी है और वे मिलें भी हैं जहां पेराई शुरू होना बाकी है। अगर आपकी मिल के क्रय केंद्र का इंडेंट आ गया है तो आपकी तौल का नंबर अब दूर नहीं है।
इंडेंट के बाद तीन काम तुरंत कर लें — पर्ची और आपूर्ति की तारीख की पुष्टि करें, कटाई तौल के नंबर के क्रम में कराएं ताकि कटा गन्ना सूखे नहीं, और ट्रांसपोर्ट पहले से तय कर लें क्योंकि तौल शुरू होने के बाद केंद्रों पर भीड़ बढ़ जाती है।
दिवाली से पहले 24 और मिलें, बाकी दिवाली के बाद
गन्ना विकास विभाग के अनुसार अन्य चीनी मिलों ने भी पेराई शुरू करने की औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। इनमें से 24 चीनी मिलों ने इंडेंट जारी कर दिया है और इनके दिवाली से पहले शुरू होने का प्रस्ताव है। यानी दिवाली तक चलने वाली मिलों की संख्या 9 से बढ़कर 33 तक पहुंच सकती है। बाकी मिलें दिवाली के बाद अपना सत्र शुरू करेंगी।
अक्टूबर की बारिश ने सत्र को क्यों पीछे धकेला
इस साल पेराई की शुरुआत धीमी रहने की एक बड़ी वजह अक्टूबर की बेमौसम बारिश रही। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज के 31 अक्टूबर तक के आंकड़ों के अनुसार देश में तब तक 152 मिलें चल चुकी थीं, लेकिन उत्तर प्रदेश में सिर्फ 3 मिलें ही संचालन में थीं। पिछले साल इसी तारीख तक यूपी की 10 मिलों में पेराई हो रही थी।
प्रदेश में इस सीजन 28.14 लाख हेक्टेयर में गन्ने की खेती हुई है और 47 लाख से अधिक किसान मिलों को गन्ना बेचते हैं। जैसे-जैसे यूपी की मिलें चलेंगी, उत्पादन के आंकड़े भी तेजी से बदलेंगे।
भाव का सवाल अभी बाकी है, भ्रम न पालें
पेराई शुरू होने के साथ किसानों का सबसे बड़ा सवाल भाव को लेकर है, और इस पर स्थिति अभी साफ नहीं है। पेराई सत्र 2026-27 के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। इसलिए किसी भी पुराने भाव को इस सीजन का भाव मानकर गन्ना न बेचें।
पिछले सत्र 2025-26 के लिए एसएपी अगेती के लिए 400 रुपये और सामान्य के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल था। यह दर पिछले सीजन की है, चालू सीजन की नहीं। केंद्र का एफआरपी 2026-27 के लिए 365 रुपये प्रति क्विंटल तय है, जो 10.25 प्रतिशत की मूल रिकवरी दर पर आधारित है।
किसान संगठन भाव में बड़ी बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। भाकियू अध्यक्ष नरेश टिकैत ने मूल्य कम से कम 100 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि उत्पादन लागत 400 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक हो चुकी है, इसलिए भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल किया जाना चाहिए। चीनी उद्योग भाव स्थिर रखने के पक्ष में है।
किसान अब क्या करें — पांच जरूरी जांच
पहला, अपने क्रय केंद्र का इंडेंट और तौल शेड्यूल पता करें। दूसरा, तौल के समय पर्ची, वजन की पर्ची और मिल की रसीद संभालकर रखें। तीसरा, नियमानुसार भुगतान 14 दिन के भीतर होना चाहिए; देरी हो तो समिति और जिला गन्ना अधिकारी से शिकायत करें। चौथा, गड़बड़ी दिखे तो लिखित शिकायत दें। पांचवां, हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर संपर्क कर सकते हैं।
आगे क्या देखना होगा
अगले कुछ दिनों में तीन चीजों पर नजर रहेगी — दिवाली से पहले प्रस्तावित 24 मिलें चल पाती हैं या नहीं, 2026-27 के लिए एसएपी की घोषणा कब आती है, और नई मिलों में भुगतान की रफ्तार कैसी रहती है। फिलहाल इतना तय है कि पेराई सत्र 2026-27 अब पटरी पर लौट रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
यूपी में अब तक कितनी चीनी मिलों में पेराई शुरू हो चुकी है?
प्रदेश की 9 चीनी मिलों में पेराई शुरू हो चुकी है। इनमें सहकारी क्षेत्र की 1 और निजी क्षेत्र की 8 मिलें हैं — सहारनपुर की 3, मेरठ की 1, मुरादाबाद की 2 और लखनऊ की 3।
33 मिलों के इंडेंट जारी होने का मतलब क्या है?
इंडेंट का मतलब है कि मिल ने गन्ना खरीद का आदेश जारी कर दिया है। इसके बाद क्रय केंद्रों पर तौल का शेड्यूल बनता है और किसानों को पर्ची के अनुसार गन्ना लाने की सूचना मिलती है।
दिवाली से पहले कितनी और मिलें चलेंगी?
24 चीनी मिलों ने गन्ना खरीद के लिए इंडेंट जारी कर दिया है और इनके दिवाली से पहले शुरू होने का प्रस्ताव है। बाकी मिलें दिवाली के बाद अपना सत्र शुरू करेंगी।
पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का नया भाव क्या है?
2026-27 के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 का भाव अगेती के लिए 400 रुपये और सामान्य के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल था। केंद्र का एफआरपी 2026-27 के लिए 365 रुपये प्रति क्विंटल तय है।
गन्ना भुगतान में देरी हो तो किसान क्या करें?
नियमानुसार भुगतान 14 दिन के भीतर होना चाहिए। देरी होने पर अपनी गन्ना समिति और जिला गन्ना अधिकारी से शिकायत करें और पर्ची व तौल की रसीद संभालकर रखें।
स्रोत: किसान तक (4 नवंबर 2026), गांव जंक्शन (3 नवंबर 2026), आईबीसी24/भाषा (3 नवंबर 2026), नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज के आंकड़े (रूरल वॉयस, 2 नवंबर 2026)।
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