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उत्तर प्रदेश में बारिश-आंधी से गन्ना फसल तबाह: 56 मौतें, किसान सभा की ₹30,000 प्रति एकड़ मुआवजे की मांग

Aamir Raza Aamir Raza • Sep 28, 2026 • 6 min read
उत्तर प्रदेश में बारिश-आंधी से गन्ना फसल तबाह: 56 मौतें, किसान सभा की ₹30,000 प्रति एकड़ मुआवजे की मांग
अंतिम अपडेट: September 28, 2026 4:00 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

🚨 BREAKING: उत्तर प्रदेश में पिछले तीन दिनों से जारी अतिवृष्टि और आंधी-तूफान ने किसानों की मेहनत को बुरी तरह ध्वस्त कर दिया है। राहत आयुक्त के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 60 घंटों में प्रदेश भर में 56 लोगों की मौत, 107 पशुओं की हानि और 1021 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिली है। खेतों में खड़ी धान की फसल तेज हवा से गिरकर पानी में डूब गई है, और गन्ने की फसल कई जिलों में जमीन पर बिछ गई है। देवरिया में किसान सभा की बैठक में प्रभावित किसानों को 30 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने और गांव-गांव सर्वे कराने की मांग जोरदार तरीके से उठी है।


पिछले 60 घंटों में प्रदेश का हाल

राहत आयुक्त के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार दिनों में उत्तर प्रदेश के 75 में से 56 मिलीमीटर क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा दर्ज की गई। कुछ जिलों में तो सामान्य से हजारों प्रतिशत अधिक बारिश हुई — फर्रुखाबाद में सामान्य से 7385 प्रतिशत, कन्नौज में 5664 प्रतिशत, शाहजहांपुर में 4408 प्रतिशत, हमीरपुर में 4240 प्रतिशत और महोबा में 4100 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई। अतिवृष्टि और आंधी-तूफान की इस चपेट में 56 लोगों की जान गई, 46 लोग घायल हुए और 107 पशुओं की मौत हो गई। प्रदेश में 1000 से ज्यादा मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं और हजारों परिवार बेघर हो गए हैं। बाराबंकी में तो सरयू नदी में मस्जिद तक समा गई।

फसलों की हालत सबसे चिंताजनक है। तेज हवा और लगातार बारिश के कारण धान की फसल खेतों में गिर गई है, जिससे दानों के सड़ने का खतरा बढ़ गया है। गन्ना, मक्का और सब्जियों की फसलों को भी व्यापक नुकसान पहुंचा है। बाजार में सब्जियों के दाम बढ़ने लगे हैं और कई जिलों में स्कूल बंद करने पड़े हैं। प्रशासन ने फसल बीमा कराने वाले किसानों से टोल फ्री नंबर 14447 पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की है।

गन्ने की फसल पर सबसे गहरा घाव

आंधी-तूफान का सबसे बुरा असर गन्ने पर पड़ा है। अयोध्या के तारुन विकासखंड के करनाईपुर गांव के किसान राज बहादुर वर्मा ने बताया कि तेज हवा और बारिश के कारण उनका गन्ने का पूरा प्लॉट धराशायी हो गया। उन्होंने गन्ने को सहारा देने के लिए कई बार बांधने की प्रक्रिया भी की थी, लेकिन तूफान के सामने फसल टिक नहीं सकी। किसान के मुताबिक, गिरे हुए गन्ने को दोबारा खड़ा कराने में अतिरिक्त लागत आएगी। खेत में नमी अधिक होने से फिलहाल गन्ने को उठाना भी मुश्किल है। अगर गन्ना लंबे समय तक जमीन पर पड़ा रहा तो गांठों के आसपास फटने और सड़न का खतरा बढ़ जाएगा, जिससे पेराई के समय चीनी रिकवरी भी घटेगी।

कुशीनगर में भी हालात ऐसे ही हैं। जिले में लगातार तीन दिनों से बारिश हो रही है और निचले इलाकों के खेतों में जलभराव हो गया है। तेज हवाओं से तैयार धान की फसल जमीन पर गिर गई और कई जगह गन्ने की फसल भी गिरने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि खाद, बीज, सिंचाई और जुताई पर हजारों रुपये खर्च करके उन्होंने फसल तैयार की थी — अब बारिश ने पूरी पूंजी डूबो दी है।

देवरिया में किसान सभा की बैठक: ₹30,000 प्रति एकड़ की मांग

भाटपाररानी के छोटका गांव में किसान सभा की बैठक में फसलों के हुए भारी नुकसान पर गंभीर चिंता जताई गई। बैठक को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश किसान सभा के संयुक्त सचिव साधुशरण ने कहा कि बीते दिनों हुई बारिश और तेज आंधी-तूफान से किसानों की धान, गन्ना, साग-सब्जी समेत अन्य फसलों को व्यापक नुकसान हुआ है। खेतों में खड़ी फसलें गिरने से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

बैठक में जिला प्रशासन से तीन ठोस मांगें रखी गईं — पहला, प्रभावित किसानों को 30 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया जाए; दूसरा, राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम बनाकर गांव-गांव जाकर फसलों के नुकसान का वास्तविक सर्वे कराया जाए; और तीसरा, फसल बीमा का लाभ पाने वाले किसानों को नियमानुसार बीमा क्षतिपूर्ति दिलाई जाए। बैठक में जयप्रकाश यादव, नथुनी सिंह, पौहारी कुशवाहा, रमाकांत यादव, रमावती देवी, चन्द्रावती देवी समेत कई किसान मौजूद रहे। किसान सभा ने कहा कि तेज हवा से गन्ने की फसल जमीन पर बिछ गई है और अगर सर्वे में वास्तविक नुकसान का आकलन न किया गया तो किसान बर्बाद हो जाएंगे।

अभी किसानों को क्या करना चाहिए: कृषि परामर्श

भारत मौसम विज्ञान विभाग के लखनऊ स्थित प्रादेशिक मौसम केंद्र की कृषि परामर्श के अनुसार, किसानों को धान, गन्ना और सब्जियों के खेतों से पानी निकालने की व्यवस्था सबसे पहले दुरुस्त करनी चाहिए। खेत में पानी भरा रहने से फसल की जड़ों में सड़न शुरू हो जाती है और गन्ने में चीनी की मात्रा घटती है। जिन खेतों में गन्ना गिर गया है, वहां नमी कम होते ही फसल को बांधकर दोबारा खड़ा करने का काम शुरू करें — देर होने पर गन्ना सड़ सकता है।

जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना या मौसम आधारित फसल बीमा कराया है, वे टोल फ्री नंबर 14447 पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं और नुकसान की फोटो-वीडियो सुरक्षित रखें। साथ ही गांव के लेखपाल और कृषि विभाग को भी लिखित सूचना दें, ताकि सरकारी सर्वे में आपका नुकसान दर्ज हो सके।

मौसम का आगे का हाल: राहत कब मिलेगी?

मौसम विभाग के अनुसार, पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसून अभी सक्रिय है। 26 और 27 सितंबर को कई स्थानों पर बारिश, गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलीं और कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई थी। 28 से 30 सितंबर तक कहीं-कहीं हल्की बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान है। एक अक्तूबर को मौसम मुख्यतः शुष्क रहने का पूर्वानुमान है। यानी किसानों को अभी 2-3 दिन सतर्क रहना होगा, उसके बाद मौसम साफ होने पर खेतों की मरम्मत का काम शुरू हो सकेगा।

गौरतलब है कि यह आपदा ठीक पेराई सत्र से पहले आई है। गिरे हुए गन्ने से चीनी मिलों को भी खराब गुणवत्ता का गन्ना मिलने का खतरा है, जिससे रिकवरी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में किसान और मिल दोनों को मिलकर इस नुकसान से निपटने की रणनीति बनानी होगी।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल 1: गन्ना गिर गया है, क्या उसे दोबारा खड़ा किया जा सकता है? हां। नमी कम होते ही गन्ने को पत्तियों से बांधकर दोबारा खड़ा करें। देर होने पर गन्ना सड़ सकता है और चीनी की मात्रा घट जाती है।

सवाल 2: फसल नुकसान की शिकायत कहां दर्ज कराएं? फसल बीमा धारक किसान टोल फ्री नंबर 14447 पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही गांव के लेखपाल और जिला कृषि अधिकारी को लिखित में सूचित करें ताकि सरकारी सर्वे में नुकसान दर्ज हो।

सवाल 3: क्या सरकार ने मुआवजे की घोषणा की है? अभी तक राज्य सरकार ने मुआवजे की औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन किसान सभा ने ₹30,000 प्रति एकड़ मुआवजे की मांग उठाई है। राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम से सर्वे कराने की अपील की गई है।

सवाल 4: खेत में भरा पानी कितनी जल्दी निकालना चाहिए? जितनी जल्दी हो सके। 48-72 घंटे से ज्यादा जलभराव रहने पर गन्ने की जड़ों में सड़न शुरू हो जाती है। मेढ़ों को काटकर या नालियों से पानी की निकासी करें।

सवाल 5: बीमा क्लेम के लिए क्या दस्तावेज चाहिए? फसल बीमा पॉलिसी की प्रति, खसरा-खतौनी, बैंक खाते की जानकारी और नुकसान की फोटो-वीडियो रखें। 14447 पर दर्ज शिकायत का संदर्भ नंबर नोट करके रखें।

सवाल 6: अगले दिनों का मौसम कैसा रहेगा? 28 से 30 सितंबर तक कहीं-कहीं हल्की बारिश या बौछारें संभव हैं। 1 अक्तूबर को मौसम मुख्यतः शुष्क रहने का अनुमान है।

स्रोत: दैनिक जागरण (28 सितंबर 2026), दैनिक जागरण देवरिया (27 सितंबर 2026), किसान तक (27 सितंबर 2026), लाइव हिंदुस्तान कुशीनगर (27 सितंबर 2026), भारत मौसम विज्ञान विभाग लखनऊ केंद्र।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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