गन्ना किसानों के लिए योगी कैबिनेट का बड़ा तोहफा — ड्रिप सिंचाई के लिए ₹450 करोड़ का नया पैकेज, 90% तक सरकारी अनुदान

मुख्य बिंदु (Quick Summary): उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ कैबिनेट ने आज लोकभवन में आयोजित बैठक में राज्य के गन्ना किसानों के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। गिरते भूजल स्तर को बचाने और गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने के लिए ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ (PMKSY) के तहत गन्ना बेल्ट हेतु ₹450 करोड़ के विशेष ‘माइक्रो-इरिगेशन संवर्धन पैकेज’ को मंजूरी दी गई है। इसके तहत लघु व सीमांत गन्ना किसानों को ड्रिप (टपक) सिंचाई संयंत्र लगाने पर 90% तक का भारी सरकारी अनुदान मिलेगा।
लखनऊ (CaneUp ब्यूरो — 12 सितंबर 2026): उत्तर प्रदेश में टिकाऊ कृषि और आधुनिक जल प्रबंधन की दिशा में आज का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आज लोकभवन में संपन्न राज्य कैबिनेट की बैठक में गन्ना बहुल 44 जिलों के लिए ₹450 करोड़ के ‘गन्ना ड्रिप सिंचाई संवर्धन पैकेज 2026-27’ को औपचारिक हरी झंडी दे दी गई।
कृषि एवं उद्यान मंत्री ने कैबिनेट ब्रीफिंग में बताया कि राज्य के कई गन्ना उत्पादक क्षेत्रों (विशेषकर शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत और मेरठ) में भूजल स्तर डार्क जोन की सीमा में पहुंच गया है। पारंपरिक बाढ़ सिंचाई (Flood Irrigation) में पानी का 60% हिस्सा वाष्पीकरण और रिसाव में बर्बाद हो जाता है, जबकि ड्रिप प्रणाली से न केवल 45% पानी की बचत होती है बल्कि गन्ने की पैदावार में 25 से 30 क्विंटल प्रति बीघा की भारी वृद्धि होती है।
💧 कैबिनेट द्वारा स्वीकृत सब्सिडी संरचना (Subsidy Structure)
| किसान की श्रेणी | भूमि की जोत | कुल लागत पर सरकारी अनुदान (%) | किसान का अंशदान (%) | अधिकतम देय सब्सिडी (प्रति हेक्टेयर) |
|---|---|---|---|---|
| लघु एवं सीमांत किसान | 2 हेक्टेयर (5 एकड़) तक | 90% अनुदान (राज्य 55% + केंद्र 35%) | मात्र 10% | ₹1,12,500 तक |
| सामान्य श्रेणी के किसान | 2 हेक्टेयर से अधिक | 80% अनुदान (राज्य 45% + केंद्र 35%) | मात्र 20% | ₹98,000 तक |
| महिला एवं अनुसूचित जाति/जनजाति | किसी भी जोत आकार पर | 90% पूर्ण प्राथमिकता | मात्र 10% | ₹1,15,000 तक |
🌿 ड्रिप फर्टीगेशन (Fertigation) से उर्वरक लागत में 40% की कमी
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, ड्रिप सिंचाई केवल पानी देने की प्रणाली नहीं है बल्कि इसके साथ लगे ‘वेंचुरी इंजेक्टर’ (Venturi Injector) के माध्यम से घुलनशील खाद (यूरिया, डीएपी, पोटाश और सूक्ष्म पोषक तत्व) सीधे पौधे की जड़ों में पहुंचाई जाती है:
- उर्वरक की बचत: सामान्य छिड़काव की तुलना में 40% कम खाद लगती है।
- खरपतवारों का खात्मा: कतारों के बीच की जमीन सूखी रहने के कारण खरपतवार (घास-फूस) नहीं उगते, जिससे निराई-गुड़ाई का भारी खर्च बच जाता है।
- बिजली व डीजल की बचत: नलकूप चलाने का समय आधा रह जाता है, जिससे बिजली बिल में 50% तक की कमी आती है।
💻 आवेदन कैसे और कहां करें?
इच्छुक किसान कृषि विभाग के पोर्टल upagriculture.com पर जाकर ‘टपक/फव्वारा सिंचाई योजना’ के अंतर्गत ऑनलाइन टोकन जनरेट कर सकते हैं।
- पंजीकरण के समय आधार कार्ड, खतौनी, बैंक पासबुक और खेत में बिजली नलकूप या सोलर पंप का विवरण देना आवश्यक होगा।
- स्वीकृत कंपनियों (नेटाफिम, जैन इरिगेशन आदि) के अधिकृत इंजीनियर स्वयं किसान के खेत पर पहुंचकर निःशुल्क सर्वे और पाइपलाइन बिछाने का कार्य करेंगे।
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