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यूपी में चीनी ₹5,700 प्रति क्विंटल तक पहुंची, महाराष्ट्र से कानपुर आ रही चीनी: तेज भाव से किसानों के भुगतान की उम्मीद बढ़ी

Aamir Raza Aamir Raza • Nov 2, 2026 • 6 min read
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यूपी में चीनी ₹5,700 प्रति क्विंटल तक पहुंची, महाराष्ट्र से कानपुर आ रही चीनी: तेज भाव से किसानों के भुगतान की उम्मीद बढ़ी
अंतिम अपडेट: November 2, 2026 12:16 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

उत्तर प्रदेश के चीनी बाजार में इस वक्त एक नई तस्वीर बन रही है। प्रदेश में चीनी का एक्स-मिल भाव ₹5,600 से ₹5,700 प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है, और इस मांग को पूरा करने के लिए महाराष्ट्र की चीनी कानपुर तक पहुंच रही है। वजह साफ है — देश में चीनी का शुरुआती स्टॉक कई सालों के सबसे निचले स्तर पर है, महाराष्ट्र में पेराई आंदोलन के कारण रुकी हुई है, और यूपी की मिलें अभी पूरी ताकत से पेराई शुरू ही कर रही हैं।

गन्ना किसानों के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि चीनी का भाव तेज होने से मिलों के पास नकदी आती है, और नकदी से ही समय पर गन्ना भुगतान संभव होता है। लेकिन तेज भाव अपने आप भुगतान की गारंटी नहीं है।

यूपी में भाव ₹5,700 तक, महाराष्ट्र में ₹5,200

चीनीमंडी के ताजा विश्लेषण के अनुसार महाराष्ट्र में चीनी का एक्स-मिल भाव ₹5,200 प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है, जबकि उत्तर प्रदेश में यही भाव ₹5,600 से ₹5,700 प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है। दोनों राज्यों में ₹400-500 प्रति क्विंटल का अंतर ही वजह है जिससे यूपी के खरीदार महाराष्ट्र से चीनी उठाकर कानपुर तक ला रहे हैं। इतने सालों बाद महाराष्ट्र से यूपी की ओर चीनी का बहाव अपने आप में संकेत है — यूपी में उपलब्धता तंग है।

चीनीमंडी के 31 अक्टूबर के अपडेट में भी यही तस्वीर दिखी थी: मुजफ्फरनगर में एम-ग्रेड चीनी ₹5,450 से ₹5,550 प्रति क्विंटल और कोल्हापुर में एस-ग्रेड ₹5,040 से ₹5,100 प्रति क्विंटल पर थी। भाव ऊंचा रहने से मिलों की बिक्री आय बढ़ती है, और पिछले सत्रों में भुगतान में देरी की एक बड़ी वजह मिलों की कमजोर नकदी ही रही है। इसलिए किसानों की यह मांग वाजिब है कि तौल के सात दिनों के भीतर भुगतान खाते में आए।

स्टॉक सबसे निचले स्तर पर, नवंबर की मांग 23 लाख टन

भाव तेज होने की जड़ स्टॉक की कमी में है। 2025-26 का सत्र 30 सितंबर को समाप्त हुआ और नया सत्र करीब 36 लाख टन के शुरुआती स्टॉक के साथ शुरू हुआ — कई सालों में सबसे कम। दूसरी ओर नवंबर की मांग का अनुमान करीब 23 लाख टन है, जबकि अक्टूबर के बाद नवंबर के लिए उपलब्ध मात्रा करीब 15 लाख टन आंकी गई है।

भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (इस्मा) के अनुसार 25 अक्टूबर तक देश में 107 मिलों ने पेराई शुरू कर दी थी, जिनमें महाराष्ट्र की 87 मिलें शामिल हैं। यूपी में अब पेराई की रफ्तार बढ़ रही है — मेरठ में किनौनी 1 नवंबर से और मवाना, नंगलामल व दौराला 2 नवंबर से चल रही हैं, मोहिउद्दीनपुर और सकौती 4 नवंबर से चलेंगी, और धामपुर ने 2 नवंबर से तौल शुरू कर दी है।

सरकार के दो फैसले: 13 लाख टन का कोटा और इथेनॉल डायवर्जन पर रोक

केंद्र सरकार ने नवंबर के पहले पखवाड़े के लिए 13 लाख टन का चीनी बिक्री कोटा तय किया है। खाद्य विभाग ने मिलों को छूट भी दी है — वे 15 नवंबर तक उत्पादित चीनी को कोटे से ऊपर बेच सकेंगी, ताकि नई चीनी जल्दी बाजार में आए।

दूसरा फैसला इथेनॉल को लेकर है। सरकार ने 2026-27 के इथेनॉल आपूर्ति वर्ष (नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027) के लिए गन्ने के रस, सिरप और बी-हैवी शीरे से इथेनॉल बनाने पर रोक लगा दी है। तेल कंपनियों के करीब 11 अरब लीटर के टेंडर में चीनी आधारित फीडस्टॉक शामिल ही नहीं है। मक्का इथेनॉल का भाव ₹68.86 और सी-हैवी शीरे के इथेनॉल का भाव ₹57.97 प्रति लीटर है। जो गन्ना पहले इथेनॉल में जाता, वह अब चीनी बनाने में लगेगा — पिछले सत्र में करीब 30 लाख टन चीनी इथेनॉल में डायवर्ट हुई थी।

महाराष्ट्र में पेराई क्यों रुकी, और यूपी से इसका क्या लेना-देना

महाराष्ट्र में पेराई रुकने की वजह किसान आंदोलन है। स्वाभिमानी शेतकरी संघटना ने 27 अक्टूबर से ‘चावणी आंदोलन’ शुरू किया है, जिसमें कार्यकर्ता मिलों तक गन्ना ले जाने वाले वाहनों को रोक रहे हैं। उनकी मांग है कि पहली किस्त के रूप में ₹4,500 प्रति टन का भाव घोषित किया जाए, और संगठन ने 3 नवंबर को राजमार्ग जाम की चेतावनी दी है। कर्नाटक में किसान ₹5,500 प्रति टन मांग रहे हैं, जबकि केंद्र का एफआरपी ₹3,650 प्रति टन है।

यूपी के किसानों के लिए इसका मतलब दोहरा है। महाराष्ट्र में पेराई रुकने से देश में आपूर्ति तंग हुई है, जिससे यूपी में भाव मजबूत हुए हैं; वहीं यूपी में किसान 2026-27 के एसएपी पर फैसले का इंतजार कर रहे हैं। साफ बता दें — 2025-26 के लिए एसएपी अगेती किस्म के लिए ₹400 और सामान्य के लिए ₹390 प्रति क्विंटल था, और वही दर 2026-27 की दर नहीं मानी जा सकती। नए सत्र की दर की घोषणा अलग से होगी।

किसान क्या करें: तेज भाव का फायदा भुगतान में बदलवाएं

तेज भाव का फायदा तभी मिलेगा जब भुगतान समय पर हो। पहला — पर्ची और तौल की रसीद संभालकर रखें और ई-गन्ना ऐप से सट्टे का मिलान करते रहें। दूसरा — देरी हो तो गन्ना समिति और जिला गन्ना अधिकारी से लिखित शिकायत करें। तीसरा — सत्यापित हेल्पलाइन नंबरों का इस्तेमाल करें: टोल-फ्री 1800-121-3203 और 1800-180-5129, तथा सरकारी एसएमएस शॉर्टकोड 51969। किसी अनजान नंबर पर निजी जानकारी साझा न करें।

चौथा — बारिश से गिरे गन्ने की कटाई में दो-तीन दिन अतिरिक्त लग सकते हैं, इसलिए पर्ची की तारीख से योजना पहले से बनाएं और साफ गन्ना केंद्र पर ले जाएं। पांचवां — चीनी के भाव को गन्ने के भाव से न जोड़ें: चीनी का भाव बाजार का है, गन्ने का भाव एसएपी/एफआरपी से तय होता है। आने वाले दो हफ्ते निर्णायक होंगे — 3 नवंबर को महाराष्ट्र में राजमार्ग जाम की चेतावनी, इस सप्ताह पूरी क्षमता पर आती पश्चिमी यूपी की मिलें, और नवंबर के दूसरे पखवाड़े का बिक्री कोटा।

पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी में चीनी का भाव इस वक्त कितना है?

यूपी में एक्स-मिल भाव ₹5,600-5,700 और महाराष्ट्र में ₹5,200 प्रति क्विंटल तक है।

महाराष्ट्र की चीनी कानपुर क्यों आ रही है?

यूपी में उपलब्धता तंग है और दोनों राज्यों में ₹400-500 प्रति क्विंटल का भाव अंतर है, इसलिए ढुलाई के बाद भी महाराष्ट्र की चीनी सस्ती पड़ रही है।

नवंबर के पहले पखवाड़े के लिए चीनी का कोटा कितना है?

13 लाख टन। मिलें 15 नवंबर तक उत्पादित चीनी को कोटे से ऊपर भी बेच सकेंगी।

इथेनॉल पर रोक का किसानों पर क्या असर होगा?

2026-27 में गन्ने के रस, सिरप और बी-हैवी शीरे से इथेनॉल नहीं बनेगा, इसलिए वह गन्ना चीनी बनाने में लगेगा और बिक्री से समय पर भुगतान की उम्मीद बढ़ेगी।

2026-27 के लिए गन्ने का भाव (एसएपी) कितना है?

2025-26 का एसएपी अगेती के लिए ₹400 और सामान्य के लिए ₹390 प्रति क्विंटल था। 2026-27 के एसएपी की घोषणा का इंतजार है। केंद्र का एफआरपी ₹3,650 प्रति टन है।

भुगतान में देरी हो तो किसान कहां शिकायत करें?

पहले गन्ना समिति और जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें। टोल-फ्री 1800-121-3203, 1800-180-5129 और एसएमएस शॉर्टकोड 51969 भी उपलब्ध हैं।

स्रोत: चीनीमंडी (2 नवंबर 2026), एग्रीइनसाइट (2 नवंबर 2026), द हिंदू बिजनेसलाइन (27 अक्टूबर और 22 अक्टूबर 2026), द इकोनॉमिक टाइम्स (26 अक्टूबर 2026), द टाइम्स ऑफ इंडिया (5 अक्टूबर 2026), द फाइनेंस इकोनॉमी (अक्टूबर 2026)।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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