यूपी के गोदामों में 70.64 लाख क्विंटल चीनी का स्टॉक: कमी की अफवाहों पर न दें ध्यान, गन्ना आयुक्त ने हर डीएम को लिखा पत्र

दिवाली से ठीक पहले बाजार में एक डर फैल रहा था — क्या त्योहारों में चीनी की किल्लत होगी और दाम बढ़ जाएंगे? इस अफवाह को लेकर राज्य सरकार ने अब आधिकारिक आंकड़े सामने रख दिए हैं। चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के गोदामों में इस समय कुल 70.64 लाख क्विंटल चीनी का स्टॉक मौजूद है। विभाग का साफ कहना है कि त्योहारों के दौरान चीनी की कोई कमी नहीं होगी और लोग अफवाहों पर ध्यान न दें।
यह जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा चीनी की उपलब्धता की जानकारी मांगे जाने के बाद दी गई है। मुख्यमंत्री के पूछने पर विभाग ने आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की और नतीजा सार्वजनिक किया — फिलहाल प्रदेश में चीनी की भरपूर उपलब्धता है।
कितना और कहां है स्टॉक
विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 70.64 लाख क्विंटल के इस स्टॉक में सहकारी चीनी मिलों, निगम की मिलों और निजी क्षेत्र की मिलों — तीनों का भंडार शामिल है।
- सहकारी चीनी मिलों के पास 13.40 लाख क्विंटल चीनी
- निगम की चीनी मिलों के पास 2.93 लाख क्विंटल चीनी
- निजी क्षेत्र की मिलों के पास 54.3 लाख क्विंटल से अधिक चीनी
सरकार का कहना है कि यह स्टॉक प्रदेश में चीनी की मौजूदा उपलब्धता को दर्शाता है। हालांकि, त्योहारों के दौरान मांग और आपूर्ति की स्थिति बनाए रखने के लिए अधिकारियों को नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
केंद्र से राज्य तक: कीमतों पर दोहरी नज़र
चीनी की उपलब्धता के साथ-साथ उसकी कीमतों को नियंत्रित रखना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी सिलसिले में केंद्र सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव ने मंगलवार को एक उच्चस्तरीय बैठक कर देशभर में चीनी की आपूर्ति बनाए रखने और कीमतों पर नियंत्रण रखने के निर्देश दिए थे।
इसी क्रम में बुधवार को राज्य की गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस ने क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में चीनी के स्टॉक का भौतिक सत्यापन करने और बाजार में कीमतों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। व्यवस्था का उद्देश्य यह पता लगाना है कि मिलों में उपलब्ध चीनी की निकासी और बाजार में उसकी आपूर्ति सुचारु रूप से हो रही है या नहीं, और कीमतों में किसी असामान्य बढ़ोतरी की स्थिति पर भी नज़र रखी जा सके।
सभी जिलाधिकारियों को पत्र, बनेंगी विशेष जांच टीमें
निगरानी को जमीन पर उतारने के लिए गन्ना आयुक्त ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर चीनी की उपलब्धता और कीमतों की निगरानी का अनुरोध किया है। पत्र में तीन बातों पर जोर है — जिलों की चीनी मिलों से होने वाली चीनी की निकासी, बाजार में स्टॉक की स्थिति, और थोक व खुदरा कीमतों की नियमित समीक्षा।
इसके अलावा विभागीय स्तर पर विशेष टीमें गठित कर बाजारों और चीनी मिलों में भौतिक जांच की योजना है। ये टीमें मिलों में मौजूद स्टॉक और बाजार में आपूर्ति की वास्तविक स्थिति का सत्यापन करेंगी। यानी अब कागज पर बताया गया स्टॉक और गोदाम में असल स्टॉक — दोनों की मिलान होगी।
अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से नया पेराई सत्र
प्रदेश में चीनी की उपलब्धता को लेकर सरकार को आगामी पेराई सत्र से भी राहत मिलने की उम्मीद है। विभाग की जानकारी के मुताबिक, अक्टूबर 2026 के अंतिम सप्ताह से चीनी मिलों के दोबारा चालू होने की संभावना है। इसके बाद नवंबर में नए पेराई सत्र 2026-27 की चीनी बाजार में आने लगेगी, जिससे बाजार में उपलब्ध स्टॉक और मांग के अनुरूप आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलेगी।
नई चीनी की उपलब्धता त्योहारों के आसपास बाजार पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है। हालांकि, वास्तविक आपूर्ति मिलों के संचालन और उत्पादन पर निर्भर करेगी।
गन्ना किसानों के लिए इसका क्या मतलब है
सवाल यह है कि चीनी के स्टॉक की यह खबर गन्ना किसान के लिए कितनी मायने रखती है। जवाब है — काफी हद तक। चीनी का स्टॉक सीधे मिलों की नकदी स्थिति से जुड़ा है, और मिलों की नकदी स्थिति से जुड़ा है किसानों के गन्ना मूल्य का भुगतान।
जब गोदामों में चीनी बिकने के लिए तैयार है और प्रशासन खुद निकासी व कीमतों पर नज़र रख रहा है, तो मिलों को चीनी बेचकर किसानों का बकाया चुकाने में आसानी होती है। निगरानी का दूसरा फायदा यह है कि चीनी की जमाखोरी या कृत्रिम कमी के बहाने कीमतें नहीं बढ़ेंगी — स्थिर कीमतें किसानों के हित में भी होती हैं, क्योंकि सरकार और मिलों के बीच का हिसाब-किताब खुला रहता है।
इसके अलावा, गन्ना आयुक्त की यह सक्रियता नए पेराई सत्र 2026-27 की तैयारी का भी संकेत है। किसानों के लिए यह समय महत्वपूर्ण है — गन्ना कटाई से पहले पर्ची, सट्टा और क्रय केंद्र की व्यवस्था दुरुस्त कर लें, ताकि पेराई शुरू होते ही आपूर्ति में कोई अड़चन न आए।
उपभोक्ताओं से अपील: घबराकर खरीदारी न करें
त्योहारी सीजन में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने से चीनी की खपत में इजाफा हो सकता है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे चीनी की कमी को लेकर फैलने वाली अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराकर ज़रूरत से ज्यादा खरीदारी न करें। पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने के साथ बाजार में नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने का भरोसा दिया गया है।
हालांकि, यह भी सच है कि प्रशासन की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी रहती है, यह आने वाले दिनों में बाजार में चीनी की उपलब्धता और कीमतों से स्पष्ट होगा। किसान और उपभोक्ता — दोनों के लिए यही सबसे बड़ी कसौटी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
यूपी में इस समय चीनी का कितना स्टॉक है?
चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के अनुसार, प्रदेश के गोदामों में कुल 70.64 लाख क्विंटल चीनी का स्टॉक मौजूद है। इसमें सहकारी मिलों के पास 13.40 लाख क्विंटल, निगम की मिलों के पास 2.93 लाख क्विंटल और निजी मिलों के पास 54.3 लाख क्विंटल से अधिक चीनी शामिल है।
क्या त्योहारों में चीनी की कीमतें बढ़ेंगी?
सरकार का कहना है कि पर्याप्त स्टॉक के कारण कीमतों पर दबाव नहीं पड़ेगा। इसके साथ ही गन्ना आयुक्त ने डीएम को पत्र लिखकर थोक और खुदरा कीमतों की नियमित समीक्षा के निर्देश दिए हैं, और विशेष जांच टीमें बाज़ार व मिलों में भौतिक सत्यापन करेंगी।
नया पेराई सत्र कब शुरू होगा?
विभाग की जानकारी के मुताबिक, अक्टूबर 2026 के अंतिम सप्ताह से चीनी मिलों के दोबारा चालू होने की संभावना है। नवंबर में पेराई सत्र 2026-27 की नई चीनी बाज़ार में आने लगेगी।
यह खबर गन्ना किसानों के लिए क्यों अहम है?
चीनी का स्टॉक मिलों की नकदी स्थिति तय करता है, और मिलों की नकदी स्थिति से ही किसानों का गन्ना मूल्य भुगतान जुड़ा है। गोदामों में तैयार स्टॉक और प्रशासन की निगरानी का मतलब है कि मिलों को चीनी बेचकर बकाया चुकाने में आसानी होगी।
चीनी के स्टॉक की जांच कैसे होगी?
गन्ना आयुक्त ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर मिलों से चीनी की निकासी, बाज़ार में स्टॉक की स्थिति और कीमतों की नियमित समीक्षा को कहा है। विभागीय स्तर पर विशेष टीमें बाज़ारों और चीनी मिलों में जाकर भौतिक जांच करेंगी।
स्रोत: कृषिभूमि (21 अक्टूबर 2026), गांव जंक्शन (अक्टूबर 2026)।
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