UP में चीनी उत्पादन 126.4 लाख टन से घटकर 89.5 लाख टन: लाल सड़न ने उजाड़ा Co-0238, अब Karan-20 से बड़ी उम्मीद

🚨 BREAKING: उत्तर प्रदेश की चीनी इंडस्ट्री को बड़ा झटका लगा है। देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य का चीनी उत्पादन 2019-20 में 126.4 लाख टन से गिरकर 2025-26 में सिर्फ 89.5 लाख टन रह गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह है लाल सड़न रोग (Red Rot), जिसने कभी सुपरस्टार रही गन्ना प्रजाति Co-0238 को लगभग बेकार कर दिया। अब किसानों और चीनी उद्योग की सारी उम्मीदें नई प्रजाति Co-20016 यानी Karan-20 पर टिकी हैं, जिसे अक्टूबर में सरकारी मंजूरी मिल सकती है।
कितना गिरा उत्पादन: 2019-20 से 2025-26 का पूरा हिसाब
आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ चीनी उत्पादन ही नहीं, पूरी गन्ना अर्थव्यवस्था डगमगा रही है। पिछले छह सालों में प्रदेश की करीब 120 चीनी मिलों द्वारा कुचली गई गन्ने की मात्रा में एक-चौथाई से ज्यादा की कमी आई है। ये आंकड़े अक्टूबर से सितंबर तक के उत्पादन वर्ष के हिसाब से हैं।
गौर करने वाली बात यह है कि कभी यही Co-0238 वरदान थी — 2011-12 में राज्य का उत्पादन 69.7 लाख टन से बढ़कर 2019-20 में 126.4 लाख टन पहुंचा, और 2016-17 में UP महाराष्ट्र को पछाड़कर देश का नंबर एक चीनी उत्पादक बना था।
Co-0238: कभी सुपरस्टार, आज बीमार
Co-0238 (जिसे Karan-4 भी कहा जाता है) को 2009 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कोयंबटूर स्थित Sugarcane Breeding Institute (ICAR-SBI) ने रिलीज़ किया था। इसके प्रजनक डॉ. बख्शी राम की इस प्रजाति के मोटे डंठल से किसानों की औसत उपज 60 टन से बढ़कर 80 टन प्रति हेक्टेयर से ऊपर चली गई। यह अगेती प्रजाति थी, यानी इसमें जल्दी शक्कर जमा हो जाती थी, जिससे मिलें नवंबर से अप्रैल अंत तक पूरे पेराई सत्र में ज्यादा चीनी रिकवरी पाती थीं।
नतीजा यह हुआ कि 2019-20 तक UP के गन्ना क्षेत्र का 82.2% और 2020-21 तक 86.7% हिस्सा इसी एक प्रजाति के कब्जे में आ गया। और यही अंधाधुंध मोनोकल्चर (एक ही किस्म की खेती) इसकी तबाही का कारण बना।
CF13: वह खतरनाक कवक जिसने प्रजाति की प्रतिरोधक क्षमता तोड़ दी
लाल सड़न रोग गन्ने के संवहनी तंत्र (vascular system) पर हमला करता है, जिसके जरिए जड़ों से पूरे पौधे तक पानी और पोषक तत्व पहुंचते हैं। संक्रमण के बाद यह तंत्र अवरुद्ध हो जाता है, पौधा मुरझाने लगता है और अंत में गन्ने के डंठल सिकुड़कर खोखले हो जाते हैं।
जब Co-0238 विकसित हुई थी, तब यह लाल सड़न के CF07 और CF08 नाम के कवक प्रकारों के खिलाफ मध्यम रूप से प्रतिरोधी थी। लेकिन UP में इस एक ही प्रजाति की सघन खेती ने कवक Colletotrichum falcatum को उत्परिवर्तित होकर एक नया, बेहद घातक प्रकार — CF13 — विकसित करने का मौका दे दिया। डॉ. बख्शी राम ने खुद चेतावनी दी थी कि खासकर मध्य, पूर्वी UP और तराई के जलभराव वाले इलाकों में इस प्रजाति की ज्यादा खेती न करें, क्योंकि जलभराव वाले खेत रोग के संक्रमण और कवक के बीजाणुओं के फैलाव के लिए सबसे अनुकूल होते हैं।
न तो मिलों ने और न ही किसानों ने उनकी सलाह मानी। डॉ. राम ने कहा था कि किसी भी क्षेत्र में कोई एक गन्ना प्रजाति 40-50% से ज्यादा क्षेत्र में नहीं होनी चाहिए, वरना बीमारी के खिलाफ आनुवंशिक प्रतिरोध खत्म हो जाता है। लेकिन UP में Co-0238 अकेले 86% से ज्यादा क्षेत्र में फैली — और रोग ने अपना शिकंजा कस दिया।
Karan-20 (Co-20016): नई उम्मीद की पूरी जानकारी
अब उद्योग की सारी नजरें नई प्रजाति Co-20016 (Karan-20) पर हैं, जिसे ICAR-SBI कोयंबटूर ने विकसित किया है। अखिल भारतीय समन्वित गन्ना अनुसंधान परियोजना (AICRP) की Varietal Identification Committee ने 27 मई की बैठक में इसे Co-0238 के संभावित विकल्प के रूप में चुना है। अब इसे अक्टूबर में होने वाली Central Varietal Release Committee की बैठक के सामने रखा जाएगा। मंजूरी के बाद किसान इसे वसंत (फरवरी-मार्च), ग्रीष्म (अप्रैल-मई) या शरद (मध्य सितंबर से मध्य नवंबर) ऋतु में बो सकेंगे।
ISMA ने अगस्त 2023 में ICAR-SBI के साथ मिलकर संयुक्त परीक्षण शुरू किए थे, जिनमें Co-20016 और Co-21012 का तीन साल तक मूल्यांकन हुआ — दो प्लांट केन और एक रैटून फसल के जरिए। इन परीक्षणों में 16 चीनी मिलों ने हिस्सा लिया, जिनमें UP की 11 मिलें भी शामिल थीं: त्रिवेणी इंजीनियरिंग (मिलक नारायणपुर, रामकोला), बलरामपुर चीनी मिल्स, DCM श्रीराम (अजबापुर), DCM श्रीराम इंडस्ट्रीज (दौराला), मवाना शुगर्स, अवध शुगर एंड एनर्जी (सेहोरा), धामपुर बायो ऑर्गेनिक्स (असमोली), K.M. शुगर मिल्स (अयोध्या), सेक्सरिया बिसवां और यूनाइटेड प्रोविंसेस शुगर कंपनी (सेहोराही)।
परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे। Co-20016 की तीन साल की औसत गन्ना उपज 144.6 टन प्रति हेक्टेयर रही, जबकि Co-0238 की सिर्फ 116.4 टन। 10 महीने की फसल अवधि में गन्ने के रस में औसत शर्करा भी Co-20016 में 18.7% रही, जबकि Co-0238 में 18.3%। सबसे अहम बात — यह प्रजाति लाल सड़न के घातक CF13 प्रकार के खिलाफ प्रतिरोधी पाई गई है।
एक और प्रजाति Co-21012 का भी परीक्षण हो रहा है, जिसकी औसत उपज 129.4 टन प्रति हेक्टेयर और शर्करा 18% दर्ज की गई है (Co-0238 के 119.7 टन और 17.8% से बेहतर)। लेकिन इसके लाल सड़न प्रतिरोध का परीक्षण 2027 के मध्य तक AICRP ट्रायल पूरे होने के बाद ही हो पाएगा।
किसान अभी क्या करें: जब तक Karan-20 न मिले
सबसे बड़ा सवाल यही है — Karan-20 का बीज कब मिलेगा? अक्टूबर में Central Varietal Release Committee की मंजूरी के बाद सरकारी गजट में अधिसूचना जारी होगी। ICAR-SBI के निदेशक डॉ. पी. गोविंदराज के मुताबिक Co-20016 नॉर्थ-वेस्ट जोन (हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड और पश्चिमी UP के हिस्सों) के लिए अगेती प्रजाति के तौर पर चिह्नित की गई है और 2026 के अंत तक गजट अधिसूचना की उम्मीद है।
बीज बड़े पैमाने पर मिलने में समय लगेगा। तब तक किसान Co-0118 और Co-15023 जैसी उपलब्ध प्रतिरोधी प्रजातियों की ओर मुड़ें, जिनका बीज UPCSR के टिश्यू कल्चर लैब और मिल फार्मों से मिल रहा है। जलभराव वाले खेतों में जल निकासी सुधारें और याद रखें: किसी एक प्रजाति को फिर से 40-50% से ज्यादा क्षेत्र में न बोएं।
खेत से आवाज़: शामली के किसान की कहानी
पश्चिमी UP के शामली जिले के खेड़ी बैरागी गांव के किसान जितेंद्र सिंह हुड्डा की कहानी आज हजारों किसानों की हकीकत है। उन्होंने 2025 में अपना गन्ना क्षेत्र 8 एकड़ से घटाकर 6 एकड़ किया और इस साल और काटकर सिर्फ 4 एकड़ कर दिया। बची जमीन पर उन्होंने मक्का, उड़द और अल्पावधि Pusa-1509 बासमती धान बोया है।
जितेंद्र कहते हैं, “पहले मेरी उपज 38-39 टन प्रति एकड़ थी, आज सिर्फ 22-23 टन रह गई है। लाल सड़न रोग ने गन्ने में किसानों का भरोसा तोड़ दिया है।” यह बयान बताता है कि यह सिर्फ उत्पादन का आंकड़ा नहीं, बल्कि किसानों के आत्मविश्वास का संकट है।
एक सबक: एक ही किस्म पर दांव क्यों खतरनाक
सबक साफ है — कोई प्रजाति कितनी भी शानदार हो, उस पर पूरा क्षेत्र दांव पर लगाना खतरनाक है। डॉ. बख्शी राम ने खुद उस प्रजाति के बारे में चेताया था जिसे उन्होंने पाला-पोसा था। Karan-20, Co-21012 और UPCSR की नई प्रजातियां विकल्प हैं, लेकिन फायदा तभी होगा जब किसान और मिलें प्रजाति विविधीकरण (varietal diversification) का नियम अपनाएं। फरवरी-मार्च 2027 के विधानसभा चुनाव में भी गन्ना किसानों का यह मुद्दा एजेंडे पर रहेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
UP में चीनी उत्पादन कितना घटा है? 2019-20 में 126.4 लाख टन से घटकर 2025-26 में 89.5 लाख टन रह गया है। करीब 120 चीनी मिलों द्वारा कुचली गई गन्ने की मात्रा में भी एक-चौथाई से ज्यादा की गिरावट आई है।
लाल सड़न रोग गन्ने को कैसे नुकसान पहुंचाता है? लाल सड़न कवक Colletotrichum falcatum से फैलने वाला रोग है। यह गन्ने के संवहनी तंत्र पर हमला करता है, जिससे पानी और पोषक तत्वों का परिवहन रुक जाता है, पौधा मुरझाता है और डंठल सिकुड़कर खोखले हो जाते हैं।
Karan-20 (Co-20016) क्या है और यह कब मिलेगी? Karan-20 ICAR-SBI कोयंबटूर की विकसित नई लाल सड़न प्रतिरोधी गन्ना प्रजाति है। इसकी औसत उपज 144.6 टन प्रति हेक्टेयर और शर्करा 18.7% दर्ज की गई है। अक्टूबर में Central Varietal Release Committee की मंजूरी के बाद यह रिलीज़ हो सकती है।
जब तक Karan-20 न मिले, किसान क्या करें? किसान Co-0118 और Co-15023 जैसी उपलब्ध प्रतिरोधी प्रजातियों की ओर मुड़ें, जलभराव वाले खेतों में जल निकासी सुधारें और किसी एक प्रजाति को 40-50% से ज्यादा क्षेत्र में न बोएं।
स्रोत: The Indian Express और Public Lokpal (28 सितंबर 2026), ChiniMandi, Global Agriculture (18 सितंबर 2026)
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