यूपी की 24 सहकारी चीनी मिलों को ₹600 करोड़ का प्री-सीजन पैकेज — आधुनिकीकरण और त्वरित भुगतान की तैयारी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने आगामी पेराई सत्र 2026-27 के दौरान प्रदेश के लाखों गन्ना किसानों को निजी मिलों की तरह ही सहकारी क्षेत्र में भी समयबद्ध भुगतान और आधुनिक सुविधाएं सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक बड़ा वित्तीय फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल्स संघ लिमिटेड (UP Cooperative Sugar Mills Federation) ने राज्य में संचालित सभी 24 सहकारी चीनी मिलों के प्री-सीजन ओवरहॉलिंग, तकनीकी आधुनिकीकरण और प्रारंभिक कार्यशील पूंजी (Working Capital) के लिए ₹600 करोड़ का विशेष पैकेज जारी कर दिया है।
सहकारिता एवं गन्ना विकास मंत्री ने आज लखनऊ में आयोजित विभागीय बोर्ड बैठक के बाद बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार सहकारी चीनी मिलों को आत्मनिर्भर और घाटे से उबारने के लिए यह धनराशि सीधे मिलों के खातों में हस्तांतरित कर दी गई है।
मिलों की पेराई क्षमता और टरबाइन दक्षता में सुधार
इस ₹600 करोड़ के वित्तीय पैकेज में से ₹240 करोड़ का उपयोग मिलों की पुरानी पेराई मशीनों की री-ग्रूविंग, हाई-एफिशिएंसी जूस क्लैरिफायर की स्थापना, बॉयलरों के ऑटोमेशन और स्टीम कंजम्पशन (भाप की खपत) को 45% से घटाकर 38% पर लाने के लिए किया जाएगा। इससे मिलों की चीनी रिकवरी में औसतन 0.40% का सीधा सुधार होगा।
सहकारी चीनी मिल्स संघ के प्रबंध निदेशक ने बताया, “बागपत, ननौता (सहारनपुर), सरसावा, अनूपशहर, स्नेहरोड (बिजनौर), गजरौला, तिलहर (शाहजहांपुर), कायमगंज और महमूदाबाद सहकारी मिलों में मेंटेनेंस कार्य तेजी से चल रहा है। इस पैकेज की बदौलत मिलें बिना किसी ब्रेकडाउन के लगातार 160 से 180 दिन तक पेराई करने में सक्षम होंगी।”
किसानों के 14 दिन के भुगतान के लिए ₹360 करोड़ का रिवॉल्विंग फंड
पैकेज का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ₹360 करोड़ का वह रिवॉल्विंग फंड है, जिसे किसानों के गन्ना भुगतान के लिए आरक्षित किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि पहले सहकारी मिलों में चीनी बिक्री में देरी होने पर किसानों का भुगतान दो से तीन महीने तक अटक जाता था। अब इस समर्पित फंड के जरिए मिलें पेराई शुरू होने के पहले दिन से ही 14 दिन के वैधानिक नियम का कड़ाई से पालन करेंगी। जैसे ही किसान का गन्ना क्रय केंद्र पर तुलेगा, 14 दिन के भीतर उसके सहकारी बैंक खाते में डीबीटी द्वारा धनराशि पहुंच जाएगी।
राज्य सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि 25 अक्टूबर से सभी सहकारी मिलों में पेराई का काम औपचारिक रूप से शुरू कर दिया जाए ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिल सके।
सहकारी डिस्टिलरियों में एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा
पैकेज के अंतर्गत ननौता और गजरौला सहकारी मिलों में लगी एथेनॉल डिस्टिलरियों की क्षमता विस्तार का काम भी शामिल है। इससे सहकारी मिलें सीधे गन्ने के रस और बी-हैवी शीरे से तेल कंपनियों को एथेनॉल बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित करेंगी, जिससे किसानों के भुगतान में किसी सरकारी सब्सिडी की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
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