यूपी में एथेनॉल सप्लाई चेन में ₹1000 करोड़ का निवेश, डिस्टिलरी कंपनियों में होड़; गन्ना किसानों को होगा बड़ा फायदा

🚨 ब्रेकिंग: उत्तर प्रदेश की एथेनॉल सप्लाई चेन में ₹1000 करोड़ से ज्यादा का निजी निवेश पाइपलाइन में आ गया है। देश की बड़ी डिस्टिलरी और शराब कंपनियां — यूनाइटेड ब्रुअरीज से लेकर एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स तक — यूपी में नई इकाइयां लगा रही हैं। इसी बीच राज्य का एथेनॉल उत्पादन एक साल में 23 प्रतिशत बढ़कर 2.23 अरब लीटर तक पहुंच गया है और एक्साइज एक्सपोर्ट में 45 प्रतिशत का उछाल आया है। गन्ने की खेती से जुड़े करीब 50 लाख किसान परिवारों के लिए यह खबर बड़ी राहत वाली है, क्योंकि मिलों की कमाई का सीधा जुड़ाव गन्ने के भुगतान से होता है।
₹1000 करोड़ का निवेश पाइपलाइन: कौन-कौन सी कंपनियां आ रही हैं
बिजनेस स्टैंडर्ड की 28 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में इस समय ₹1000 करोड़ से ज्यादा के निजी निवेश की पाइपलाइन तैयार है, जो पूरी तरह डिस्टिलरी और डाउनस्ट्रीम सप्लाई चेन से जुड़ी है। निवेश करने वाली प्रमुख कंपनियों में यूनाइटेड ब्रुअरीज, एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स (ABD) जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
- यूनाइटेड ब्रुअरीज मध्य यूपी के उन्नाव जिले में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगा रही है।
- माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज हरदोई में इकाई स्थापित कर रही है।
- वुडपेकर ग्रीनएग्री न्यूट्रिएंट्स ने फर्रुखाबाद में अपनी इकाई का कमीशनिंग भी कर दिया है।
- एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स (ABD) अकेले ₹600 करोड़ का निवेश कर रही है, जिसमें एक ग्रीनफील्ड डिस्टिलरी भी शामिल है, जिसका कमीशन अगले 24 महीनों में होना है। कंपनी की मुरादाबाद बॉटलिंग यूनिट भी आने वाले महीनों में चालू हो जाएगी।
ABD के प्रबंध निदेशक अमर सिन्हा ने कहा है कि उत्तर प्रदेश की प्रगतिशील एक्साइज नीति और लंबी अवधि के निवेश के अनुकूल कारोबारी माहौल ने बाजार की संभावनाओं को काफी बढ़ा दिया है। यही वजह है कि कंपनियां यहां पूंजी लगाने में झिझक नहीं रहीं।
एथेनॉल उत्पादन में 23 प्रतिशत की छलांग
निवेश की यह होड़ अचानक नहीं आई है — आंकड़े इसकी ठोस वजह बता रहे हैं। उत्तर प्रदेश, जो पहले ही देश का सबसे बड़ा गन्ना और एथेनॉल उत्पादक राज्य है, उसका एथेनॉल उत्पादन 2023-24 के 1.8 अरब लीटर से बढ़कर 2024-25 में 2.23 अरब लीटर तक पहुंच गया। यानी एक साल में 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी।
एथेनॉल दरअसल चीनी का ही उप-उत्पाद है, जो गन्ने के शीरे (मोलासेज) से बनता है। डिस्टिलरियां इस एथेनॉल को परिष्कृत करके पेट्रोल में मिलाने (ब्लेंडिंग), शराब, दवाइयों और कई औद्योगिक कामों में इस्तेमाल करती हैं। जितनी ज्यादा डिस्टिलरियां, उतनी ज्यादा शीरे की मांग — और जितनी ज्यादा शीरे की मांग, उतनी मजबूत चीनी मिलों की जेब।
एक्साइज एक्सपोर्ट में 45 प्रतिशत का उछाल
निवेश के साथ-साथ यूपी का एक्साइज कारोबार भी तेजी से बढ़ रहा है। मौजूदा वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में राज्य के एक्साइज एक्सपोर्ट में 45 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- अप्रैल-जून 2026 में यूपी का एक्साइज एक्सपोर्ट 1.278 करोड़ डॉलर (लगभग ₹124 करोड़) रहा, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि में यह 87.9 लाख डॉलर था।
- राष्ट्रीय एक्साइज एक्सपोर्ट में यूपी की हिस्सेदारी 10.2 प्रतिशत से बढ़कर 12.6 प्रतिशत हो गई है। अब यूपी इस मामले में महाराष्ट्र और पंजाब के बाद देश में तीसरे स्थान पर है।
- अप्रैल-जुलाई 2026 के बीच यूपी की डिस्टिलरियों ने दूसरे राज्यों को 1.64 करोड़ बोतल अतिरिक्त भेजीं — पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 45.7 प्रतिशत की वृद्धि।
एक्साइज एक्सपोर्ट पॉलिसी 2026-29: सरकार की रणनीति
उत्तर प्रदेश के आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल का कहना है कि राज्य की तीन साल की प्रगतिशील एक्साइज एक्सपोर्ट पॉलिसी 2026-29 भी गन्ने की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत कर रही है — गन्ने और शीरे से लेकर प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, भंडारण और परिवहन तक।
इसका मतलब है कि सरकार सिर्फ मिलें लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि गन्ने से बनने वाले हर उत्पाद — चीनी, एथेनॉल, शीरा, शराब — की पूरी श्रृंखला को एक साथ बढ़ावा दे रही है। जब वैल्यू चेन मजबूत होती है, तो हर कड़ी में पैसा बढ़ता है, और किसान उस श्रृंखला की पहली कड़ी है।
गन्ना किसानों को क्या फायदा मिलेगा?
उत्तर प्रदेश में गन्ना नकदी फसल है और इससे करीब 50 लाख किसान परिवारों की आजीविका जुड़ी है। एथेनॉल और डिस्टिलरी सेक्टर की यह तेजी किसानों के लिए कई तरह से फायदेमंद हो सकती है:
- शीरे की मांग बढ़ेगी: डिस्टिलरियां बढ़ेंगी तो मिलों के शीरे की बिक्री आसान होगी। शीरा मिलों की गैर-चीनी आय का बड़ा स्रोत है — यह आय बढ़ेगी तो गन्ना भुगतान की क्षमता भी बढ़ेगी।
- भुगतान में सुधार की उम्मीद: जिन मिलों की कमाई के रास्ते बढ़ते हैं, वे किसानों का बकाया चुकाने में ज्यादा सक्षम होती हैं। राज्य में पहले ही 102 चीनी मिलों ने पेराई सत्र 2025-26 का शत-प्रतिशत गन्ना भुगतान कर दिया है — मजबूत वैल्यू चेन इस रिकॉर्ड को बनाए रखने में मदद करेगी।
- रोजगार और सहायक कारोबार: नई डिस्टिलरी इकाइयों से उन्नाव, हरदोई, फर्रुखाबाद और मुरादाबाद जैसे इलाकों में सीधा रोजगार बढ़ेगा। ट्रांसपोर्ट, पैकेजिंग और भंडारण जैसे सहायक कारोबारों में भी ग्रामीण युवाओं को काम मिलेगा।
- गन्ने की खेती की अहमियत बढ़ेगी: जब सरकार और निजी कंपनियां दोनों गन्ने की वैल्यू चेन में पैसा लगा रही हैं, तो गन्ना सिर्फ चीनी की फसल नहीं रह जाता — वह ऊर्जा, दवा और औद्योगिक क्षेत्र का कच्चा माल बन जाता है।
क्या सावधानी रखनी चाहिए?
यह जरूर समझना चाहिए कि यह निवेश अभी पाइपलाइन में है — यानी ज्यादातर परियोजनाएं निर्माण या योजना के चरण में हैं, चालू होने में 1-2 साल लग सकते हैं। ABD की ग्रीनफील्ड डिस्टिलरी का कमीशन ही अगले 24 महीनों में होना है। इसलिए इसका पूरा फायदा किसानों तक पहुंचने में थोड़ा समय लगेगा।
फिर भी दिशा साफ है: यूपी सरकार की नीति और निजी निवेश दोनों गन्ने की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की ओर बढ़ रहे हैं। किसानों के लिए सलाह यही है कि वे अपनी गन्ना सर्वे रिकॉर्ड, बैंक खाते और सट्टा-संबंधी कागजात दुरुस्त रखें, ताकि पेराई सत्र 2026-27 में भुगतान में कोई अड़चन न आए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
यूपी में एथेनॉल सेक्टर में कितना निवेश आ रहा है?
₹1000 करोड़ से ज्यादा का निजी निवेश पाइपलाइन में है। इसमें ABD अकेले ₹600 करोड़ लगा रही है। यूनाइटेड ब्रुअरीज उन्नाव में, माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज हरदोई में इकाई लगा रही हैं, जबकि वुडपेकर ग्रीनएग्री न्यूट्रिएंट्स ने फर्रुखाबाद में इकाई चालू कर दी है।
यूपी का एथेनॉल उत्पादन कितना बढ़ा है?
2024-25 में उत्पादन 2.23 अरब लीटर रहा, जो 2023-24 के 1.8 अरब लीटर से 23 प्रतिशत ज्यादा है। यूपी देश का सबसे बड़ा एथेनॉल उत्पादक राज्य है।
एक्साइज एक्सपोर्ट में कितनी बढ़ोतरी हुई है?
वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में एक्साइज एक्सपोर्ट 45 प्रतिशत बढ़कर 1.278 करोड़ डॉलर पहुंचा। राष्ट्रीय एक्सपोर्ट में यूपी की हिस्सेदारी 12.6 प्रतिशत हो गई है — देश में तीसरा स्थान।
इसका गन्ना किसानों पर क्या असर पड़ेगा?
डिस्टिलरियां बढ़ने से शीरे की मांग बढ़ेगी, मिलों की आय के रास्ते खुलेंगे और गन्ना भुगतान की क्षमता मजबूत होगी। साथ ही नई इकाइयों से ग्रामीण इलाकों में रोजगार भी बढ़ेगा।
स्रोत: बिजनेस स्टैंडर्ड (28 सितंबर 2026), चिनीमंडी (29 सितंबर 2026)
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