गन्ने की 4 नई किस्मों को मिली मंजूरी: 95.56 टन उपज वाला को.शा. 23232 बना को.0238 का विकल्प — लाल सड़न से सुरक्षित

अक्टूबर का महीना उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए बीज चुनने का महीना होता है — इस बार कौन-सी किस्म लगाएं, यही सबसे बड़ा सवाल रहता है। ठीक इसी समय गन्ना विभाग ने किसानों को बड़ी राहत दी है: 29 सितंबर को हुई ‘उत्तर प्रदेश बीज गन्ना एवं गन्ना किस्म स्वीकृति उप समिति’ की बैठक में गन्ने की चार नई किस्मों को खेती के लिए औपचारिक मंजूरी दे दी गई है। सबसे ज्यादा चर्चा में है शाहजहांपुर के गन्ना शोध परिषद की अगेती किस्म को.शा. 23232, जिसकी औसत उपज 95.56 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई — पुरानी मानक किस्म को.0238 से 9.44 प्रतिशत ज्यादा। लाल सड़न रोग से जूझ रहे किसानों के लिए राहत यह है कि यह किस्म इस रोग के प्रति रोगरोधी भी पाई गई है।
29 सितंबर की बैठक में क्या फैसला हुआ
उत्तर प्रदेश बीज गन्ना एवं गन्ना किस्म स्वीकृति उप समिति की बैठक 29 सितंबर को गन्ना आयुक्त की अध्यक्षता में हुई, जिसमें वैज्ञानिकों, प्रगतिशील किसानों और चीनी मिल प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तावित किस्मों की उपज और पोल प्रतिशत के आंकड़े पेश किए गए। इसके बाद चारों किस्मों को खेती के लिए अनुमोदित कर दिया गया।
इनमें उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर की तीन किस्में — को.शा. 23232, को.शा. 19235 और को.शा. 18232 — और भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ की एक किस्म को.लख. 21201 शामिल है। को.शा. 23232 और को.लख. 21201 अगेती किस्में हैं, जबकि बाकी दो मध्य एवं देर से पकने वाली हैं।
को.शा. 23232: उपज में को.0238 को पछाड़ा
अगेती किस्म को.शा. 23232 इस फैसले की सबसे बड़ी खबर है। पौधा गन्ने की औसत उपज 95.56 टन प्रति हेक्टेयर — मानक किस्म को.0238 से 9.44 प्रतिशत अधिक। पेड़ी की औसत उपज 80.57 टन प्रति हेक्टेयर रही, जो को.0238 से 3.16 प्रतिशत ज्यादा है — और पेड़ी ही किसानों की असल कमाई का बड़ा हिस्सा होती है।
चीनी परता की बात करें तो नवंबर, जनवरी और मार्च में इसका पोल प्रतिशत केन क्रमशः 13.10, 13.77 और 14.31 दर्ज हुआ — तीनों महीनों में को.0238 से अधिक। विभाग के प्रेस नोट के अनुसार को.शा. 23232 लाल सड़न रोग के प्रति रोगरोधी है और पेड़ी की अच्छी क्षमता वाली है। इसे पूरे प्रदेश में खेती के लिए स्वीकृत किया गया है।
को.लख. 21201: लखनऊ संस्थान की अगेती किस्म
भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ की अगेती किस्म को.लख. 21201 की औसत उपज 86.57 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई — मानक किस्म को.0238 के लगभग बराबर। लेकिन चीनी परता में यह आगे है: इसका पोल इन केन 13.94 प्रतिशत पाया गया, जबकि को.0238 में 13.71 प्रतिशत था। यह किस्म लाल सड़न रोग के प्रति उच्च प्रतिरोधक क्षमता रखती है और पेड़ी की अच्छी क्षमता वाली है। इसे भी पूरे प्रदेश में खेती के लिए अवमुक्त किया गया है। ज्यादा चीनी परता का फायदा मिलों को भी होता है, जिससे किसानों को समय पर भुगतान की बेहतर उम्मीद रहती है।
को.शा. 19235 और को.शा. 18232 को भी मंजूरी
मध्य एवं देर से पकने वाली दो किस्मों को भी खेती के लिए मंजूरी मिली है। को.शा. 19235 की औसत उपज 87.58 टन प्रति हेक्टेयर और को.शा. 18232 की औसत उपज 92.38 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई है। ये उन किसानों के लिए विकल्प हैं जो देर से बुवाई करते हैं या जिनके क्षेत्र में पेराई देर से शुरू होती है। इस तरह शुरुआती, मध्य और देर — तीनों बुवाई-कैलेंडर के लिए नई तकनीक का विकल्प तैयार है।
लाल सड़न से जूझ रहे किसानों के लिए क्यों अहम है यह फैसला
पश्चिमी यूपी के बड़े हिस्से में लाल सड़न (रेड रॉट) रोग ने को.0238 जैसी पुरानी किस्मों को बुरी तरह प्रभावित किया है — उपज गिरती है, चीनी परता घटता है। नई मंजूर किस्मों में इस रोग के प्रति रोगरोधी या उच्च प्रतिरोधक क्षमता दर्ज होना इसी समस्या का जवाब है। वैज्ञानिकों के मुताबिक रोगरोधी किस्मों की ओर बढ़ना सबसे सस्ता उपाय है: न अतिरिक्त दवा का खर्च, न खेती की विधि बदलनी पड़ती है — बस अधिकृत स्रोत से स्वस्थ बीज गन्ना लेना होता है। ट्रेड शो में प्रदर्शित चार अन्य नई किस्मों की तुलना यहां देखें — वहां भी 90 से 100 टन प्रति हेक्टेयर उपज क्षमता वाली किस्में दिखाई गई थीं।
शरदकालीन बुवाई से पहले किसान क्या करें
नई किस्में मंजूर हो गई हैं, लेकिन खेत तक पहुंचने में थोड़ा समय लगेगा। नई किस्म का बीज शुरू में सीमित मात्रा में मिलता है, इसलिए किसान अभी से ये काम कर लें:
1. गन्ना समिति से बीज की पूछताछ करें: नई किस्मों के बीज गन्ने की उपलब्धता और वितरण कार्यक्रम की जानकारी जिला गन्ना अधिकारी या सहकारी गन्ना विकास समिति से मिलेगी। शरदकालीन बुवाई की पूरी तैयारी के साथ बीज की व्यवस्था भी समय पर कर लें।
2. अधिकृत स्रोत से ही बीज लें: नई किस्मों के नाम पर मिलावटी बीज की शिकायतें हर साल आती हैं। बीज गन्ना हमेशा विभागीय नर्सरी, शोध संस्थान या अधिकृत विक्रेता से खरीदें और रसीद जरूर लें।
3. सर्वे रिकॉर्ड दुरुस्त रखें: किस्म का नाम गन्ना सर्वे में सही दर्ज हो, यह सुनिश्चित करें — गलत किस्म दर्ज होने पर पर्ची और भुगतान में दिक्कत आ सकती है।
4. मिट्टी और मिल के हिसाब से किस्म चुनें: अगेती किस्में वहां बेहतर हैं जहां पेराई जल्दी शुरू होती है; देर से पकने वाली वहां, जहां मिल देर से चलती है। अपने क्षेत्र की चीनी मिल के गन्ना विभाग की सलाह सबसे सुरक्षित है।
गौरतलब है कि गन्ने के भाव में एफआरपी और एसएपी की पूरी गणित समझना भी उतना ही जरूरी है — अच्छी किस्म से उपज बढ़ेगी, लेकिन आय का दूसरा पहिया भाव है, जिस पर किसानों की नजर बनी हुई है।
आपके सवाल
सवाल: ये चारों नई किस्में कौन-सी हैं? जवाब: को.शा. 23232, को.शा. 19235 और को.शा. 18232 (उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर) तथा को.लख. 21201 (भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ)। इन सभी को 29 सितंबर की किस्म स्वीकृति उप समिति की बैठक में खेती के लिए मंजूरी मिली है।
सवाल: को.शा. 23232 को.0238 से कितना बेहतर है? जवाब: औसत उपज 95.56 टन प्रति हेक्टेयर — को.0238 से 9.44 प्रतिशत ज्यादा। पेड़ी की उपज 80.57 टन प्रति हेक्टेयर — 3.16 प्रतिशत ज्यादा। पोल प्रतिशत भी तीनों महीनों में को.0238 से अधिक, और लाल सड़न रोग के प्रति रोगरोधी।
सवाल: क्या ये किस्में पूरे यूपी में बोई जा सकती हैं? जवाब: हां, को.शा. 23232 और को.लख. 21201 को पूरे प्रदेश में खेती के लिए स्वीकृत किया गया है। फिर भी अपने क्षेत्र की मिट्टी और मिल की सलाह के हिसाब से किस्म चुनें।
सवाल: नई किस्म का बीज गन्ना कहां से मिलेगा? जवाब: विभागीय नर्सरी, गन्ना शोध संस्थानों और अधिकृत विक्रेताओं से। जिला गन्ना अधिकारी या सहकारी गन्ना विकास समिति से बीज वितरण कार्यक्रम की जानकारी लें — नई किस्मों का बीज शुरू में सीमित होता है।
सवाल: क्या लाल सड़न से पूरी तरह सुरक्षा मिलेगी? जवाब: नई किस्मों में रोगरोधी या उच्च प्रतिरोधक क्षमता दर्ज है, लेकिन कोई किस्म शत-प्रतिशत अमर नहीं होती। स्वस्थ बीज, सही बुवाई विधि और खेत की सफाई के साथ ही रोग प्रबंधन पूरा होता है। लक्षण दिखें तो तुरंत कृषि विभाग से सलाह लें।
स्रोत: किसान तक (1 अक्टूबर 2026), प्रभात खबर (30 सितंबर 2026)।
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