उत्तर प्रदेश में गन्ने का भाव ₹600 करने और बकाया भुगतान की मांग पर किसानों की हुंकार: हापुड़ कलेक्ट्रेट में भाकियू का बड़ा प्रदर्शन, प्रशासन को अल्टीमेटम

हापुड़ / लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पेराई सत्र 2026-27 की औपचारिक शुरुआत से ठीक पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना बेल्ट में असंतोष की आग भड़क उठी है। गन्ने की लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी, पिछले सत्र के बकाये भुगतान में देरी और राजस्व भ्रष्टाचार के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के बैनर तले बुधवार को हापुड़ जिला कलेक्ट्रेट परिसर में किसानों ने विशाल धरना-प्रदर्शन किया।
हाथों में गन्ने के हरे डंठल और यूनियन के झंडे लिए सैकड़ों किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी किसानों ने उत्तर प्रदेश सरकार से आगामी पेराई सत्र के लिए गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) बढ़ाकर ₹600 प्रति क्विंटल करने की दो-टूक मांग रखी। इसके साथ ही मिलों द्वारा 14 दिनों के भीतर वैधानिक भुगतान, 35 दिनों में भूमि नामांतरण (Mutation) और कृषि वाहनों पर अवैध वसूली पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि पेराई सत्र शुरू होने से पहले सरकार ने गन्ने के भाव में ठोस वृद्धि नहीं की और मिलों से शत-प्रतिशत भुगतान नहीं कराया, तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सड़कों और चीनी मिलों के पहिये अनिश्चितकाल के लिए जाम कर दिए जाएंगे।
📢 हापुड़ कलेक्ट्रेट प्रदर्शन: किसानों की 5 प्रमुख मांगें
भाकियू (अराजनैतिक) के नेतृत्व में आयोजित इस महापंचायत में किसानों ने शासन-प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित 5 सूत्रीय मांग पत्र रखा:
- गन्ने का भाव ₹600 प्रति क्विंटल घोषित हो: चालू पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का मूल्य ₹370 से बढ़ाकर सीधे ₹600 प्रति क्विंटल किया जाए ताकि किसान को लागत पर 50% शुद्ध मुनाफा मिल सके।
- 14 दिनों में ब्याज सहित बकाया भुगतान: सिंभावली (Simbhaoli) और ब्रजनाथपुर (Brajnathpur) सहित जिले व प्रदेश की सभी बकायेदार चीनी मिलों से किसानों का पाई-पाई भुगतान 15% ब्याज सहित तत्काल कराया जाए।
- 35 दिनों में नामांतरण (म्यूटेशन) की अनिवार्य समय-सीमा: राजस्व संहिता के तहत वरासत और भूमि नामांतरण की प्रक्रिया को तहसील स्तर पर 35 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से पूरा किया जाए।
- खतौनी में हिस्सेदारी (अंश निर्धारण) का त्वरित निस्तारण: भूमि अभिलेखों में संयुक्त खातेदारों की हिस्सेदारी को लेकर लेखपालों द्वारा की जा रही मनमानी और भ्रष्टाचार पर रोक लगाकर रिकॉर्ड दुरुस्त किए जाएं।
- कृषि वाहनों से अवैध वसूली पर कठोर कानूनी कार्रवाई: हाईवे और लिंक मार्गों पर गन्ना व कृषि उत्पाद ले जा रहे किसानों के ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से पुलिस और आरटीओ (RTO) द्वारा की जा रही कथित अवैध वसूली पर तत्काल रोक लगे।
🌾 गन्ने का भाव ₹600/क्विंटल क्यों मांग रहे हैं किसान? पूरा गणित समझें
उत्तर प्रदेश में वर्तमान समय में गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) अगेती प्रजाति के लिए ₹370 प्रति क्विंटल, सामान्य प्रजाति के लिए ₹360 प्रति क्विंटल और अस्वीकृत प्रजाति के लिए ₹355 प्रति क्विंटल है।
किसानों का कहना है कि पिछले 3 वर्षों में गन्ने की खेती की उत्पादन लागत (Cost of Cultivation) दोगुनी हो चुकी है, जबकि सरकारी मूल्य में मामूली बढ़ोतरी की गई है।
📈 लागत बनाम सरकारी भाव का वास्तविक आंकड़ा:
- डीजल की कीमत: ₹90 प्रति लीटर के पार पहुंच चुकी है। एक हेक्टेयर खेत की 6-7 बार गहरी जुताई, पाटा और सिंचाई में हजारों रुपये का डीजल जल जाता है।
- खाद व पोषण का संकट: डीएपी (DAP), एनपीके (NPK) और पोटाश की बढ़ती कीमतें और सीजन के समय सहकारी समितियों पर होने वाली किल्लत से किसानों को महंगे दामों पर निजी दुकानों से खाद खरीदनी पड़ती है।
- कीट व लाल सड़न (Red Rot) की मार: गन्ने की प्रमुख प्रजाति Co 0238 में लाल सड़न रोग और चोटी बेधक (Top Borer) के प्रकोप से बचाव के लिए महंगी कीटनाशक दवाइयों (जैसे कोराजन व फंगीसाइड) पर प्रति एकड़ ₹6,000 से ₹8,000 का अतिरिक्त खर्च हो रहा है।
- मजदूरी दर में उछाल: बुवाई, छिलाई, बंधाई और कटाई के लिए दिहाड़ी मजदूरी ₹450 से ₹550 प्रतिदिन तक पहुंच गई है।
- बिजली व नलकूप की लागत: निजी नलकूपों पर मीटर लगाने और फिक्स चार्ज के कारण सिंचाई का खर्च लगातार बढ़ रहा है।
स्वामीनाथन आयोग का $C2+50%$ फॉर्मूला: किसान नेताओं के अनुसार, वैज्ञानिक गणना के आधार पर गन्ने की व्यापक वास्तविक लागत ($C2$) लगभग ₹380 से ₹400 प्रति क्विंटल बैठती है। यदि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के तहत 50% लाभांश जोड़ा जाए, तो गन्ने का न्यायसंगत मूल्य कम से कम ₹570 से ₹600 प्रति क्विंटल होना चाहिए।
📊 देश के प्रमुख राज्यों में गन्ने का भाव: उत्तर प्रदेश कहां खड़ा है?
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना और चीनी उत्पादक राज्य है, लेकिन जब पड़ोसी राज्यों से गन्ने के भाव की तुलना की जाती है, तो यूपी के किसान खुद को ठगा सा महसूस करते हैं:
| राज्य / निकाय | गन्ने का वर्तमान भाव (₹/क्विंटल) | स्थिति व घोषणा |
|---|---|---|
| हरियाणा (Haryana) | ₹400 | देश में सर्वाधिक SAP देने वाला राज्य |
| पंजाब (Punjab) | ₹391 | अगेती प्रजाति हेतु निर्धारित |
| उत्तर प्रदेश (UP - वर्तमान) | ₹370 | अगेती प्रजाति (सत्र 2025-26) |
| केंद्र सरकार (FRP) | ₹340 | 10.25% बेसिक रिकवरी पर |
| भाकियू की मांग (UP 2026-27) | ₹600 | स्वामीनाथन आयोग $C2+50%$ आधार पर |
हरियाणा और पंजाब की तुलना में उत्तर प्रदेश में गन्ने का भाव ₹21 से ₹30 प्रति क्विंटल कम है। किसानों का तर्क है कि जब बीज, खाद, डीजल और मजदूरी की दरें पूरे उत्तर भारत में एक समान हैं, तो उत्तर प्रदेश के किसानों को गन्ने का कम दाम क्यों दिया जा रहा है?
⚖️ 14 दिन के भीतर भुगतान का कानूनी नियम: कानून क्या कहता है?
उत्तर प्रदेश गन्ना (पूर्ति एवं खरीद विनियमन) अधिनियम, 1953 (UP Sugarcane Supply and Purchase Act, 1953) की धारा 17 के तहत नियम बिल्कुल स्पष्ट है:
“चीनी मिल में गन्ना तौलने के ठीक 14 दिनों के भीतर किसान के बैंक खाते में गन्ना मूल्य का भुगतान होना अनिवार्य है। यदि 14 दिनों के भीतर भुगतान नहीं होता है, तो चीनी मिल को 15% वार्षिक साधारण ब्याज सहित भुगतान करना होगा।”
⚠️ जमीन पर हकीकत क्या है?
हापुड़ जनपद की सिंभावली शुगर मिल और ब्रजनाथपुर शुगर मिल सहित प्रदेश की कई निजी मिलों पर पिछले पेराई सत्र का करोड़ों रुपये का गन्ना मूल्य बकाया है।
भुगतान न मिलने से किसानों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है:
- रबी बुवाई के लिए नकदी का अभाव: गेहूं, सरसों और आलू की बुवाई का समय सिर पर है, लेकिन किसानों के पास खाद-बीज खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं।
- केसीसी (KCC) लोन का ब्याज चक्र: बैंक गन्ने के भुगतान का इंतजार नहीं करते और समय पर किस्त न जमा होने पर किसानों के लोन पर पेनल्टी और चक्रवृद्धि ब्याज लगा रहे हैं।
- घरेलू व शैक्षणिक खर्च: बच्चों की स्कूल फीस और परिवार के दवा-इलाज के लिए किसानों को स्थानीय साहूकारों से 24% से 36% सालाना ब्याज पर कर्ज लेने को मजबूर होना पड़ रहा है।
🏛️ भूमि अभिलेख और नामांतरण: 35 दिनों की समय-सीमा की मांग क्यों?
हापुड़ प्रदर्शन में किसानों ने गन्ने के भाव के अलावा तहसील और राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी कड़ा प्रहार किया।
किसानों ने आरोप लगाया कि:
- वरासत व नामांतरण में देरी: किसी किसान की मृत्यु के बाद उसके उत्तराधिकारियों के नाम खतौनी में दर्ज कराने (नामांतरण) के लिए महीनों तक तहसीलों के चक्कर काटने पड़ते हैं। कानून में 35 दिनों का प्रावधान होने के बावजूद लेखपाल और राजस्व निरीक्षक सुविधा शुल्क के बिना फाइल आगे नहीं बढ़ाते।
- सट्टा और पर्ची ट्रांसफर में अड़चन: जब तक खतौनी में नाम दर्ज नहीं होता, गन्ना समिति मृतक किसान का सट्टा उसके वारिसों के नाम ट्रांसफर नहीं करती। इससे पेराई सत्र में किसान का गन्ना बेचने का कोटा (Basic Quota) शून्य हो जाता है और पर्चियां जारी नहीं होतीं।
- अंश निर्धारण (हिस्सेदारी सुधार): संयुक्त खातों में किस भाई या खातेदार का कितना हिस्सा है, इसे पोर्टल पर दर्ज करने में भारी अनियमितताएं हो रही हैं, जिससे सर्वे के दौरान विवाद खड़े हो रहे हैं।
🚛 ट्रैक्टर-ट्रॉली पर अवैध वसूली पर सख्त रुख
प्रदर्शनकारी किसानों ने एक अन्य गंभीर मुद्दा उठाते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-9) और संपर्क मार्गों पर पुलिस व परिवहन विभाग (RTO) के कुछ कर्मचारियों द्वारा कृषि कार्य में लगे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को रोककर अनावश्यक चालान काटे जा रहे हैं और अवैध वसूली की जा रही है।
किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम के तहत ट्रैक्टर-ट्रॉली कृषि उपकरण की श्रेणी में आते हैं, न कि व्यावसायिक वाहन में। यदि किसान अपने खेत का गन्ना मिल या क्रेशर ले जा रहा है, तो उस पर कोई व्यावसायिक कर या रोक नहीं लगाई जा सकती। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि संबंधित पुलिस और परिवहन अधिकारियों को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए जाएंगे।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: हापुड़ में किसानों ने क्या मुख्य मांगें रखी हैं?
उत्तर: भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने गन्ने का भाव ₹600 प्रति क्विंटल करने, चीनी मिलों से 14 दिन में बकाया भुगतान कराने, भूमि नामांतरण 35 दिनों में पूरा करने और कृषि वाहनों पर अवैध वसूली बंद करने की मांग की है।
प्रश्न 2: वर्तमान में उत्तर प्रदेश में गन्ने का सरकारी भाव (SAP) क्या है?
उत्तर: उत्तर प्रदेश में वर्तमान समय में गन्ने का अगेती प्रजाति का भाव ₹370 प्रति क्विंटल और सामान्य प्रजाति का भाव ₹360 प्रति क्विंटल है।
प्रश्न 3: गन्ने के भुगतान में देरी होने पर किसान को क्या अधिकार है?
उत्तर: यूपी गन्ना आपूर्ति अधिनियम 1953 के अनुसार, गन्ने की आपूर्ति के 14 दिनों के भीतर भुगतान न होने पर मिल प्रबंधन को 15% वार्षिक ब्याज सहित बकाया भुगतान करना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
प्रश्न 4: किसान गन्ने का भाव ₹600 प्रति क्विंटल क्यों मांग रहे हैं?
उत्तर: डीजल, डीएपी, पोटाश, कीटनाशक और लेबर खर्च में भारी बढ़ोतरी के कारण गन्ने की उत्पादन लागत ₹380-400/क्विंटल पहुंच चुकी है। स्वामीनाथन आयोग के $C2+50%$ फॉर्मूले के आधार पर किसान ₹600/क्विंटल की मांग कर रहे हैं।
🎯 निष्कर्ष: सरकार के पाले में गेंद, बड़े आंदोलन की आहट
हापुड़ कलेक्ट्रेट में उमड़ा किसानों का जनसैलाब इस बात का साफ संकेत है कि पेराई सत्र 2026-27 में गन्ना मूल्य और बकाये का मुद्दा उत्तर प्रदेश की सियासत और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु बनने जा रहा है।
यदि उत्तर प्रदेश सरकार ने अक्टूबर में शुरू होने वाले पेराई सत्र से पहले गन्ने के भाव में सम्मानजनक और ऐतिहासिक वृद्धि नहीं की, तो मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बागपत, बिजनौर और हापुड़ समेत समूचे पश्चिमी यूपी में आंदोलन की चिंगारी शोला बन सकती है।
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