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कच्चा कैलेंडर 2026-27 जारी: एक गलती हुई तो पर्चियां कट जाएंगी — सट्टा ऐसे जांचें

Aamir Raza Aamir Raza • Sep 25, 2026 • अपडेट: Sep 30, 2026 10:30 PM IST • 9 min read
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कच्चा कैलेंडर 2026-27 जारी: एक गलती हुई तो पर्चियां कट जाएंगी — सट्टा ऐसे जांचें
अंतिम अपडेट: September 30, 2026 10:30 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

गन्ना प्री-कैलेंडर 2026-27 (कच्चा कैलेंडर): उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए पेराई सत्र 2026-27 का सबसे अहम चरण शुरू हो चुका है। चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा राज्य के सभी 60 गन्ना जनपदों की 120 से अधिक चीनी मिलों के लिए गन्ना प्री-कैलेंडर (Pre-Calendar / कच्चा कैलेंडर) आधिकारिक पोर्टल enquiry.caneup.in और eGanna App पर ऑनलाइन लाइव कर दिया गया है।

ग्रामीण अंचल में किसान भाई इसे आम बोलचाल में “कच्चा कैलेंडर” कहते हैं। यह वह महत्वपूर्ण दस्तावेज है जो बताता है कि आपके सर्वे किए गए रकबे और पिछले 5 वर्षों के बेसिक कोटे के आधार पर इस साल चीनी मिल आपको कुल कितनी पर्चियां (सप्लाई टिकट) देने जा रही है। यदि इस प्री-कैलेंडर में आपके उत्पादन, बेसिक कोटे या वाहन मोड (Cart/Trolley) में कोई त्रुटि रह गई, तो अंतिम 12 पखवाड़ा कैलेंडर में पर्चियां कट जाएंगी।


🔴 लाइव अपडेट — 28 सितंबर 2026

आज अंतिम दिन — 30 सितंबर अंतिम तिथि: चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के अनुसार गन्ना समिति की नई सदस्यता और उपज बढ़ोतरी (Yield Enhancement) के आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 है। तय तारीख तक सदस्य न बनने वाले किसानों को पेराई सत्र 2026-27 में चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति की अनुमति नहीं मिलेगी। जिन किसानों की उपज जिले की औसत उत्पादकता से अधिक है, वे भी इसी तिथि तक उपज बढ़ोतरी का निर्धारित प्रपत्र भरें। किसानों की मदद के लिए मुख्यालय स्तर पर टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 चल रहा है।

बहेड़ी सट्टा प्रदर्शन मेला आज अंतिम दिन: बरेली की बहेड़ी सहकारी गन्ना विकास समिति परिसर में 22 सितंबर से लगा सात दिवसीय गन्ना सर्वे सट्टा प्रदर्शन मेला आज 28 सितंबर को समाप्त हो रहा है। समिति क्षेत्र के 333 राजस्व ग्रामों में प्री-कैलेंडर का वितरण पूरा हो चुका है। भू-क्षेत्रफल, गन्ना क्षेत्रफल, बैंक खाता, आधार नंबर, मोबाइल नंबर या गन्ना आपूर्ति के साधन में कोई त्रुटि हो तो आज ही मेले में सुधार करा लें — ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक संजय राव के अनुसार त्रुटि सुधार का यह अंतिम अवसर है, मेले के बाद किसी प्रकार का संशोधन नहीं होगा।

मुजफ्फरनगर में 15 अक्टूबर के बाद शुरू होगा पेराई सत्र: जनपद की आठों चीनी मिलों में नए गन्ना पेराई सत्र की तैयारियां अंतिम दौर में हैं। इस बार मिलें पिछले साल के मुकाबले करीब 15 दिन पहले — 15 अक्टूबर के बाद — चलाने की योजना है। जिले के लगभग सवा दो लाख किसानों को प्री-कैलेंडर (प्राथमिक गन्ना सप्लाई कैलेंडर) वितरित किए जा चुके हैं, हालांकि बड़ी संख्या में किसानों ने कैलेंडर न मिलने की शिकायत भी दर्ज कराई है। जिला गन्ना अधिकारी संजय सिंह सिसौदिया के अनुसार 30 सितंबर के बाद सारा डेटा पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाएगा, निर्धारित तिथि के बाद कोई संशोधन नहीं होगा और डाटा फीडिंग पूर्ण होते ही पक्का कैलेंडर जारी कर दिया जाएगा।


आइए आधिकारिक पोर्टल के लाइव स्क्रीनशॉट और वास्तविक आंकड़ों के साथ इसके पूरे गणित को विस्तार से समझते हैं।


📸 लाइव पोर्टल स्क्रीनशॉट: गन्ना प्री-कैलेंडर (कच्चा कैलेंडर) का वास्तविक स्वरूप

नीचे दिए गए आधिकारिक स्क्रीनशॉट में आप देख सकते हैं कि enquiry.caneup.in के “प्री कैलेंडर” टैब पर क्लिक करने के बाद किसान के खेत का उत्पादन, 85% नियम, कुल सट्टा और पर्चियों का आवंटन किस प्रकार प्रदर्शित होता है:

UP Cane Department enquiry.caneup.in Live Pre-Calendar Screenshot 2026-27
▲ उत्तर प्रदेश गन्ना विकास विभाग: enquiry.caneup.in पर लाइव प्री-कैलेंडर / कच्चा कैलेंडर का वास्तविक स्क्रीनशॉट (असमोली चीनी मिल, सम्भल)

🔍 वास्तविक केस-स्टडी: असमोली चीनी मिल के किसान का प्री-कैलेंडर विश्लेषण

उपरोक्त लाइव स्क्रीनशॉट उत्तर प्रदेश के सम्भल जनपद की असमोली चीनी मिल के एक वास्तविक किसान का है। आइए इसके एक-एक आंकड़े को डिकोड करते हैं:

1. किसान एवं सट्टा प्रोफाइल विवरण

  • चीनी मिल एवं समिति: Asmauli (असमोली), जनपद: सम्भल
  • किसान का नाम: RIFAUL HASAN (Grower Code: 26479)
  • पिता का नाम: GARUL HASAN
  • गांव का नाम: SALEM PUR HAJI PUR (Village Code: 4071)
  • आपूर्ति केंद्र (Centre Name): DHAKIYA (Centre Code: 6)
  • आपूर्ति माध्यम (Mode of Supply): Cart-18 (18 क्विंटल बुग्गी)
  • सदस्यता वर्ष (Membership Year): 2013
  • मूल बेसिक कोटा (Basic Quota): 1,451.00 क्विंटल
  • कुल जोत क्षेत्रफल (Cultivable Area): 2.606 हेक्टेयर
  • प्रभावी गन्ना क्षेत्रफल (Eff. Cane Area): 1.784 हेक्टेयर
  • औसत फसल उत्पादकता (Crop Yield): 861.08 क्विंटल/हेक्टेयर (फैक्टरी औसत: 410.83 क्विंटल/हेक्टेयर)
  • बैंक खाता: CANARA BANK ASMOLI (IFSC: CNRB0018602)

📊 गन्ना सर्वेक्षण, उत्पादन व प्री-कैलेंडर तालिका (संपूर्ण डेटा)

स्क्रीनशॉट में दिए गए लाल हेडर वाले बॉक्स “गन्ना सर्वेक्षण/उत्पादन /सट्टा पर्ची एवं प्री कैलेंडर/कच्चा कैलेंडर का विवरण” की संपूर्ण तालिका नीचे प्रस्तुत है:

विवरण (Item)शीघ्र प्रजाति (Early Variety)सामान्य प्रजाति (General Variety)अनुपयुक्त प्रजाति (Rejected)महा योग (Grand Total)
पेड़ीशरद पौधापौधायोगपेड़ीशरद पौधापौधायोगपेड़ीशरद पौधापौधायोग
गन्ना क्षेत्रफल (हे०)0.0000.0001.7841.7840.0000.0000.0000.0000.0000.0000.0000.0001.784 हे०
प्रभावी क्षेत्रफल (हे०)0.0000.0001.7841.7840.0000.0000.0000.0000.0000.0000.0000.0001.784 हे०
गन्ना उत्पादन (कु०)00.0000.001,536.171,536.1700.0000.0000.0000.0000.0000.0000.0000.001,536.17 कु०
गन्ना उत्पादन (85%) (कु०)00.0000.001,305.741,305.7400.0000.0000.0000.0000.0000.0000.0000.001,305.74 कु०
कुल सट्टा (कु०)00.0000.001,305.741,305.7400.0000.0000.0000.0000.0000.0000.0000.001,305.74 कु०
कुल पर्ची (Cart 9 Qtls.)0014514500000000145 पर्ची
वास्तविक वाहन अनुसार कुल पर्चियां (Total Purchee as per Supply Mode in Cart-18):73 पर्ची

🧮 गन्ना प्री-कैलेंडर का गणित: समझें 4 बड़े नियम

अक्सर किसान भाई यह देखकर चौंक जाते हैं कि उनका बेसिक कोटा 1,451 क्विंटल था लेकिन सट्टा केवल 1,305.74 क्विंटल क्यों बना? अथवा 145 पर्चियों की जगह 73 पर्चियां क्यों लिखी हैं? आइए इसके संपूर्ण फॉर्मूले को समझें:

नियम 1: कुल गन्ना उत्पादन (Gross Production Formula)

गन्ना विभाग द्वारा प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन तय किया जाता है (इस मिल क्षेत्र में 861.08 क्विंटल/हेक्टेयर): $$\text{कुल उत्पादन} = \text{प्रभावी रकबा} \times \text{प्रति हेक्टेयर उपज}$$ $$\text{कुल उत्पादन} = 1.784 \text{ हेक्टेयर} \times 861.08 \text{ कु./हे.} = \mathbf{1,536.17 \text{ क्विंटल}}$$

नियम 2: 85% गन्ना आपूर्ति का अनिवार्य सरकारी नियम (The 85% Rule)

उत्तर प्रदेश गन्ना आपूर्ति नियमावली 1954 के नियम 22 के अनुसार, किसान के कुल गन्ने का केवल 85% हिस्सा ही चीनी मिल सट्टे के लिए स्वीकार्य होता है। शेष 15% गन्ना किसान के घरेलू उपयोग (गुड़, बीज, चारे और प्राकृतिक सूख) के लिए आरक्षित रखा जाता है: $$\text{85% उत्पादन} = 1,536.17 \times 0.85 = \mathbf{1,305.74 \text{ क्विंटल}}$$

नियम 3: बेसिक कोटा बनाम 85% उत्पादन में से कौन सा मान्य होगा?

शासन का कड़ा नियम है: $$\text{कुल सट्टा (Total Bonding)} = \min(\text{मूल बेसिक कोटा}, \text{85% सर्वे उत्पादन})$$

  • इस किसान का मूल बेसिक कोटा = 1,451.00 क्विंटल था।
  • लेकिन इस वर्ष खेत में सर्वे के अनुसार 85% उत्पादन = 1,305.74 क्विंटल ही हुआ।
  • चूंकि 85% उत्पादन (1,305.74) बेसिक कोटे (1,451.00) से कम है, इसलिए विभाग ने सट्टा घटाकर 1,305.74 क्विंटल ही स्वीकृत किया।
    (यदि किसान ने अधिक क्षेत्रफल में गन्ना बोया होता और 85% उत्पादन 1,600 क्विंटल आता, तो उसे बेसिक कोटे के बराबर 1,451 क्विंटल सट्टा मिलता और शेष पर अतिरिक्त सट्टा लागू होता।)

नियम 4: 9 कुंतल पर्ची का 18 कुंतल बुग्गी में रूपांतरण (Cart-9 to Cart-18 Conversion)

कंप्यूटर सॉफ्टवेयर में प्राथमिक गणना हमेशा मानक छोटी पर्ची Cart-9 (9 क्विंटल) के आधार पर होती है: $$\text{9 कुंतल वाली कुल पर्चियां} = \frac{1,305.74}{9} = 145.08 \approx \mathbf{145 \text{ पर्ची}}$$

चूंकि किसान का आपूर्ति साधन Cart-18 (18 क्विंटल की बड़ी बुग्गी/बैलगाड़ी) पंजीकृत है: $$\text{18 कुंतल वाली वास्तविक पर्चियां} = \frac{1,305.74}{18} = 72.54 \approx \mathbf{73 \text{ पर्चियां}}$$ यही कारण है कि अंतिम पंक्ति में “Total Purchee In Cart-18 (18 Qtls.) = 73” लिखा हुआ है! यदि यही किसान 45 क्विंटल या 54 क्विंटल की ट्रैक्टर-ट्रॉली चुनता, तो पर्चियों की संख्या घटकर क्रमशः 29 या 24 हो जाती (गन्ने का कुल वजन 1,305 क्विंटल ही रहता)।


💻 पोर्टल पर अपना प्री-कैलेंडर (कच्चा कैलेंडर) कैसे देखें?

अपना प्री-कैलेंडर जांचने के लिए निम्न आसान चरणों का पालन करें:

  1. आधिकारिक वेबसाइट enquiry.caneup.in खोलें।
  2. स्क्रीन पर दिख रहा कैप्चा कोड भरकर View दबाएं।
  3. अपना जिला, चीनी मिल, समिति और गांव चुनें।
  4. सूची में से अपना नाम या Grower Code चुनें।
  5. प्रोफाइल खुलने के बाद हरे टैब बार में दूसरे नंबर पर दिए गए “प्री कैलेंडर” टैब पर क्लिक करें।
  6. आपके सामने उपरोक्त तालिका खुल जाएगी जिसमें आपका रकबा, 85% उत्पादन और कुल पर्चियां दिखाई देंगी।

⚠️ प्री-कैलेंडर में ये 4 गलतियां दिखें तो तुरंत कराएं सुधार

प्री-कैलेंडर का मुख्य उद्देश्य ही यह है कि किसान पेराई सत्र शुरू होने से पूर्व अपनी आपत्तियां दर्ज करा सके:

  1. वाहन मोड गलत होना: यदि आप ट्रैक्टर-ट्रॉली से गन्ना ले जाते हैं लेकिन पोर्टल पर Cart-18 (बुग्गी) चढ़ा है, तो आपको बार-बार छोटी पर्चियों पर ट्रॉली ले जाने में परेशानी होगी। इसे तुरंत संशोधित कराएं।
  2. रकबे का कम दिखना: यदि आपका वास्तविक रकबा 2 हेक्टेयर है लेकिन प्रभावी रकबा 1.2 हेक्टेयर दिख रहा है, तो खतौनी लगाकर आपत्ति दर्ज कराएं।
  3. किस्म का गलत वर्गीकरण: यदि आपकी अगेती किस्म को सामान्य में डाल दिया गया है, तो पर्चियां लेट हो जाएंगी।
  4. बेसिक कोटे में कटौती: यदि पिछले सत्रों में आपने भरपूर गन्ना दिया है लेकिन बेसिक कोटा कम चढ़ा है, तो ‘गत वर्ष गन्ना तौल’ टैब से मिलान करके आपत्ति दें।

आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तिथि:

उत्तर प्रदेश गन्ना आयुक्त कार्यालय के अनुसार प्री-कैलेंडर आपत्तियों के निस्तारण के बाद 30 सितंबर 2026 तक सट्टा लॉक हो जाएगा और अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में अंतिम 12 पखवाड़ा गन्ना कैलेंडर जारी कर दिया जाएगा।


हेल्पलाइन नंबर

  • राज्य स्तरीय गन्ना किसान टोल-फ्री नंबर: 1800-121-3203
  • मुख्यालय लखनऊ किसान हेल्पलाइन: 1800-180-1551
  • पोर्टल लिंक: https://enquiry.caneup.in/ एवं https://caneup.xyz/

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. प्री-कैलेंडर और मुख्य गन्ना कैलेंडर में क्या अंतर है?

उत्तर: प्री-कैलेंडर (कच्चा कैलेंडर) में केवल कुल उत्पादन, 85% कोटा और कुल पर्चियों की संख्या दिखती है। जबकि मुख्य गन्ना कैलेंडर में यह दिखता है कि 12 पखवाड़ों के 15-15 कॉलम में किस निश्चित तारीख को कौन सी पर्ची कटेगी।

2. क्या प्री-कैलेंडर में पर्चियों की संख्या बदल सकती है?

उत्तर: हां, यदि किसान 30 सितंबर से पहले अपनी खतौनी या सर्वे सुधार के लिए प्रार्थना पत्र देता है, तो जांच के बाद प्री-कैलेंडर की पर्चियां बढ़ाई जा सकती हैं।

3. Cart-18 और Trolley पर्ची में क्या फर्क है?

उत्तर: Cart-18 की पर्ची पर 18 क्विंटल गन्ना तौला जाता है, जबकि Trolley की पर्ची पर 45 से 54 क्विंटल गन्ना तौला जाता है। वाहन के अनुसार पर्चियों की संख्या घट या बढ़ जाती है लेकिन कुल गन्ने का वजन समान रहता है।


निष्कर्ष (Conclusion)

गन्ना प्री-कैलेंडर प्रत्येक गन्ना किसान के लिए अपनी साल भर की आपूर्ति और कमाई का अग्रिम आईना है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पोर्टल पर प्री-कैलेंडर लाइव किए जाने के बाद अब प्रत्येक किसान का कर्तव्य है कि वह 30 सितंबर से पहले अपने 85% उत्पादन और पर्ची संख्या का मिलान अवश्य कर ले।

गन्ना पर्ची, सट्टा और चीनी मिल से जुड़ी पल-पल की सटीक जानकारी के लिए CaneUp.xyz के साथ जुड़े रहें।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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