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यूपी में गन्ने का रकबा 47,000 हेक्टेयर घटा, मक्का और धान की ओर मुड़े किसान

Randhir Patil Randhir Patil Aug 30, 2026 3 min read
यूपी में गन्ने का रकबा 47,000 हेक्टेयर घटा, मक्का और धान की ओर मुड़े किसान
अंतिम अपडेट: August 30, 2026 10:10 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

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यूपी में गन्ने का रकबा 47,000 हेक्टेयर घटा, मक्का और धान की ओर मुड़े किसान

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Randhir Patil - 2026-08-30

मेरठ/मुजफ्फरनगर (विशेष संवाददाता)। ### चीनी उत्पादन और आपूर्ति पर संभावित प्रभाव

कृषि अर्थशास्त्रियों के अनुसार, गन्ने के क्षेत्रफल में 47,000 हेक्टेयर की शुद्ध कमी से उत्तर प्रदेश में लगभग 35 से 40 लाख टन गन्ने का उत्पादन कम हो सकता है। इससे चीनी के कुल उत्पादन में लगभग 3.5 से 4 लाख टन की गिरावट का अनुमान है।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार ने समय रहते गन्ने का समर्थन मूल्य (एसएपी) बढ़ाकर 400 रुपये प्रति क्विंटल नहीं किया, तो आगामी वर्षों में रकबे में और बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। मिल प्रबंधकों ने शासन से मांग की है कि वे किसानों को ड्रिप इरिगेशन और बीज सब्सिडी के लिए विशेष पैकेज जारी करें।

उत्तर प्रदेश के कृषि क्षेत्र से बड़ी खबर है। गन्ना विकास विभाग द्वारा कराए गए जीपीएस डिजिटल सर्वे 2026-27 की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में गन्ने के कुल क्षेत्रफल में लगभग 47,000 हेक्टेयर की कमी आई है। पश्चिमी और मध्य यूपी के किसानों का रुझान गन्ने के स्थान पर मक्का और धान जैसी कम अवधि वाली फसलों की तरफ बढ़ा है।

क्षेत्रफल में आई इस गिरावट से आगामी पेराई सत्र में प्रदेश के कुल चीनी उत्पादन में 12 से 14 प्रतिशत तक की कमी आने का अनुमान लगाया जा रहा है।

रकबा घटने के प्रमुख कारण

मुजफ्फरनगर के किसान संगठन पदाधिकारी सत्येंद्र बालियान ने बताया, “बीते तीन वर्षों में लाल सड़न रोग ने किसानों की कमर तोड़ दी। महंगी कीटनाशकों के छिड़काव के बाद भी खेत सूख गए। दूसरी ओर, मक्का 90 से 100 दिनों में तैयार हो जाता है और एथेनॉल डिस्टिलरीज व पोल्ट्री उद्योग के कारण इसका बाजार भाव 2,200 से 2,400 रुपये प्रति क्विंटल नकद मिल रहा है। इसलिए छोटे किसानों ने फसल चक्र बदला है।”

मंडलपूर्व रकबा (हेक्टेयर)वर्तमान रकबा 2026-27शुद्ध कमी
मुरादाबाद मंडल (अमरोहा, संभल, रामपुर)2,15,0002,04,500-10,500 हेक्टेयर
मेरठ मंडल (मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर)1,98,0001,89,200-8,800 हेक्टेयर
सहारनपुर मंडल (मुजफ्फरनगर, शामली)2,42,0002,30,800-11,200 हेक्टेयर
तराई क्षेत्र (लखीमपुर, पीलीभीत, सीतापुर)3,10,0002,93,500-16,500 हेक्टेयर
कुल योग9,65,0009,18,000-47,000 हेक्टेयर

ग्राउंड रिपोर्ट: फसल चक्र बदलने से किसानों को क्या मिला?

अमरोहा के धनौरा क्षेत्र के किसान ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने 6 बीघा खेत में गन्ने की जगह मक्के की खेती की थी। जून में मक्के की कटाई के बाद खेत खाली हो गया और उन्होंने धान की रोपाई कर दी। नवंबर में धान कटने के बाद वे आलू या सरसों की बुवाई करेंगे।

सिंह ने कहा, “गन्ना पूरे 12 से 14 महीने खेत में खड़ा रहता है और साल में सिर्फ एक बार भुगतान मिलता है। मक्का और धान से हमें साल में तीन फसलें और हर चार महीने पर नकद आमदनी मिल रही है।”

चीनी मिलों ने शुरू किए प्रोत्साहन कार्यक्रम

गन्ने का रकबा घटने से चीनी मिल प्रबंधन सतर्क हो गया है। मिलों ने आगामी सत्र में पूर्ण क्षमता से चलने के लिए किसानों को आकर्षित करना शुरू किया है।

अमरोहा जिले की 16 चीनी मिलों के अंतर्गत आने वाली चंदनपुर चीनी मिल, असमौली चीनी मिल और अगवानपुर चीनी मिल ने शरदकालीन बुवाई करने वाले किसानों को उन्नत किस्मों के बीजों पर 25 से 30 प्रतिशत अनुदान और कीटनाशकों पर छूट देने का ऐलान किया है।

विभागीय अधिकारियों ने कहा है कि किसान अपने वास्तविक सर्वे की पुष्टि enquiry.caneup.in पर कर लें। यदि किसी किसान के रकबे में विसंगति है, तो वे समिति में प्रार्थना पत्र देकर सुधार करवा सकते हैं। भुगतान की नियमित जानकारी के लिए गन्ना भुगतान स्थिति और ई-गन्ना ऐप का उपयोग करें।

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Randhir Patil

गन्ना उद्योग विशेषज्ञ — ChiniMandi पर 425+ लेख। गन्ना खेती, शुगर मिल, MSP रेट, सरकारी योजनाओं पर विश्वसनीय जानकारी।

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