यूपी में गन्ना भाव 10-20 रुपये बढ़ाने पर सरकार कर रही विचार, किसान बोले- 500 से कम मंजूर नहीं, जानिए कब होगा फैसला

उत्तर प्रदेश के करीब 50 लाख गन्ना किसानों के लिए इस वक्त सबसे बड़ा सवाल यही है कि पेराई सत्र 2026-27 में गन्ने का भाव क्या होगा। पेराई शुरू हो चुकी है, पर भाव की आधिकारिक घोषणा अब तक नहीं हुई है। 3 नवंबर को आई खबरों ने तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है: सरकार गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य यानी एसएपी में 10 से 20 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी पर विचार कर रही है, जबकि किसान संगठन भाव को 500 रुपये प्रति क्विंटल तक ले जाने की मांग पर अड़े हैं। मिल मालिक भाव को मौजूदा स्तर पर ही स्थिर रखना चाहते हैं। साफ कर लें कि यह बढ़ोतरी अभी घोषित नहीं हुई है; अंतिम फैसला कैबिनेट को लेना है।
सरकार के पास क्या प्रस्ताव है
बिज़नेस स्टैंडर्ड की 3 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले योगी सरकार चालू पेराई सत्र में एसएपी बढ़ाने पर विचार कर रही है। सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि बढ़ोतरी 10 से 20 रुपये प्रति क्विंटल के बीच हो सकती है — पिछले सत्र की 30 रुपये की बढ़ोतरी से कम। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के हवाले से चिनीमंडी ने लिखा है कि नई दरों की घोषणा दीपावली से पहले हो सकती है, पर अंतिम बैठक अभी होनी है, इसलिए तारीख पक्की नहीं है।
किसान क्या मांग रहे हैं, और क्यों
किसान संगठनों की मांग सरकार के विचार से कहीं ज्यादा है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा है कि लागत काफी बढ़ गई है, इसलिए चालू सत्र के लिए एसएपी में 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी होनी चाहिए। कई संगठनों की मांग इससे भी आगे है — वे मौजूदा 400 रुपये के भाव को बढ़ाकर 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग कर रहे हैं। टिकैत का तर्क है कि प्रति क्विंटल उत्पादन लागत अब 400 रुपये को पार कर चुकी है, इसलिए पुराना भाव लागत भी नहीं निकालता। इंडिया टुडे हिंदी के अनुसार, पौध और पैड़ी को मिलाकर औसत लागत करीब 2,22,520 रुपये प्रति हेक्टेयर है, जबकि पिछले वर्ष यह 2,12,043 रुपये थी — यानी लगभग 10,477 रुपये की वृद्धि।
मिल मालिकों का पक्ष भी समझिए
मिल मालिकों की दलील भी समझनी होगी। उत्तर प्रदेश शुगर मिल्स एसोसिएशन का कहना है कि पिछले साल ही बड़ी बढ़ोतरी हो चुकी है, इसलिए इस बार दरों को मौजूदा स्तर पर रखा जाए। मिलों का तर्क है कि लगातार बढ़ती गन्ना कीमतों और संचालन खर्च से उनकी आर्थिक स्थिति पर दबाव है, जबकि चीनी के बिक्री मूल्य में लागत के अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई है। प्रदेश में 122 चीनी मिलें हैं। सरकार के लिए यही कठिन संतुलन है — मिल बंद हुई तो किसान का गन्ना ही अटक जाएगा।
फैसला कैसे होगा: तीन दौर की प्रक्रिया
एसएपी की एक तय प्रक्रिया है जिसमें तीन दौर की बैठकें होती हैं। पहला दौर विभाग के अपर मुख्य सचिव और गन्ना आयुक्त की ओर से होता है। दूसरा दौर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होता है, जिसमें मिलों और किसान प्रतिनिधियों दोनों की बात सुनी जाती है। तीसरा और अंतिम दौर विभागीय मंत्री की अध्यक्षता में होता है। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता वाली समिति की बैठक पिछले सप्ताह हो चुकी है। अब अंतिम बैठक होनी है, और मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने कहा है कि यह जल्द होगी, संभवतः दीपावली से पहले। मंत्री ने बढ़ोतरी संभव होने का संकेत भी दिया है। इसके बाद प्रस्ताव अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट के पास जाएगा।
पिछले सत्र के भाव से भ्रम न पालें
इसी में सबसे ज्यादा भ्रम फैलता है। अगेती के लिए 400 रुपये और सामान्य के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल — ये पेराई सत्र 2025-26 के भाव हैं, इस सत्र के नहीं। पिछले सत्र में अगेती का मूल्य 30 रुपये बढ़ाकर 400 रुपये और सामान्य का 30 रुपये बढ़ाकर 390 रुपये किया गया था, जबकि अनुपयुक्त किस्म 355 रुपये पर ही रही थी। 2026-27 एसएपी की घोषणा अभी बाकी है, इसलिए असली भाव कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही पता चलेगा।
किसान की जेब पर क्या असर पड़ेगा
अगर 10 से 20 रुपये की बढ़ोतरी लागू होती है, तो अगेती का भाव 400 से बढ़कर 410 से 420 रुपये हो जाएगा। 100 क्विंटल गन्ना देने वाले किसान को 1,000 से 2,000 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। वहीं भाव 500 रुपये होने पर यही रकम 10,000 रुपये तक पहुंच जाएगी। यह हिसाब सिर्फ समझने के लिए है। ध्यान रखें: नया भाव उसी सत्र के गन्ने पर लागू होता है, जिसके लिए वह घोषित हुआ है; पुराना बकाया पुराने भाव से ही मिलेगा।
अब किसान को क्या करना चाहिए
पहला, किसी भी घोषणा की पुष्टि गन्ना विभाग की वेबसाइट, जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय या अपनी समिति से करें। दूसरा, पर्ची और कैलेंडर की प्रक्रिया जारी रखें; देरी से कटाई करने पर गन्ना सूखकर वजन घटाता है। तीसरा, अपनी किस्म का रिकॉर्ड संभालकर रखें, क्योंकि अगेती और सामान्य के भाव अलग हैं। चौथा, भुगतान में देरी हो तो समिति और जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें। सत्यापित हेल्पलाइन: टोल-फ्री 1800-121-3203 और 1800-180-5129, एसएमएस शॉर्टकोड 51969। अनजान नंबर पर पर्ची, बैंक खाता या ओटीपी साझा न करें।
आगे क्या होगा
अगले कुछ दिन निर्णायक होंगे। मंत्री की अंतिम बैठक और कैबिनेट का फैसला ही बताएगा कि 10-20 रुपये की राहत मिलती है, बड़ी बढ़ोतरी होती है, या भाव यथावत रहता है। प्रदेश में 47 लाख से अधिक किसान मिलों को गन्ना देते हैं। अंतिम घोषणा होते ही caneup.xyz पर पूरी जानकारी दी जाएगी।
जवाब जानिए
सवाल: पेराई सत्र 2026-27 का गन्ना भाव घोषित हो गया है क्या? जवाब: नहीं। 2026-27 एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। सरकार 10-20 रुपये की बढ़ोतरी पर विचार कर रही है, पर अंतिम फैसला कैबिनेट को लेना है।
सवाल: अभी किस भाव पर गन्ना खरीदा जा रहा है? जवाब: नया भाव घोषित न होने तक पिछले सत्र के भाव — अगेती 400 रुपये और सामान्य 390 रुपये — ही संदर्भ हैं। इन्हें इस सत्र का घोषित भाव न मानें।
सवाल: किसान संगठन कितनी बढ़ोतरी मांग रहे हैं? जवाब: नरेश टिकैत ने 50 से 100 रुपये की बढ़ोतरी मांगी है, जबकि कई संगठन भाव को 400 से बढ़ाकर 500 रुपये करने की मांग कर रहे हैं।
सवाल: मिल मालिक बढ़ोतरी का विरोध क्यों कर रहे हैं? जवाब: मिलों का कहना है कि पिछले साल ही बड़ी बढ़ोतरी हुई है और संचालन लागत बढ़ने से उन पर दबाव है, जबकि चीनी के दाम लागत के अनुपात में नहीं बढ़े हैं।
सवाल: एसएपी का अंतिम फैसला कौन लेता है? जवाब: तीन दौर की परामर्श बैठकों के बाद प्रस्ताव कैबिनेट के पास जाता है और कैबिनेट ही अंतिम मंजूरी देती है।
स्रोत: बिज़नेस स्टैंडर्ड (3 नवंबर 2026), चिनीमंडी (हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के हवाले से, 3 नवंबर 2026), गांव जंक्शन (3 नवंबर 2026), इंडिया टुडे हिंदी (27 अक्टूबर 2026)।
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