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गन्ना राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) 2026-27 पर लखनऊ में उच्चस्तरीय मंथन — ₹25 से ₹30 प्रति क्विंटल बढ़ोतरी का प्रस्ताव, अगेती प्रजाति ₹395 करने पर विचार

Aamir Raza Sep 12, 2026 4 min read
गन्ना राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) 2026-27 पर लखनऊ में उच्चस्तरीय मंथन — ₹25 से ₹30 प्रति क्विंटल बढ़ोतरी का प्रस्ताव, अगेती प्रजाति ₹395 करने पर विचार
अंतिम अपडेट: September 12, 2026 9:15 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

लखनऊ (CaneUp विशेष ग्राउंड रिपोर्ट — 12 सितंबर 2026): उत्तर प्रदेश के 50 लाख गन्ना उत्पादक परिवारों की नजरें इस समय लखनऊ स्थित राज्य सचिवालय पर टिकी हुई हैं। पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ना राज्य परामर्शित मूल्य (SAP - State Advised Price) घोषित करने को लेकर मुख्य सचिव और गन्ना विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई है।

विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में डीजल, कीटनाशक, जैव-उर्वरक और श्रमिक मजदूरी में हुई 18% की भारी बढ़ोतरी को देखते हुए गन्ना विभाग ने गन्ना मूल्य में ₹25 से ₹30 प्रति क्विंटल की वृद्धि का आधिकारिक प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव के तहत अगेती प्रजाति (Early Variety) का भाव वर्तमान ₹370 से बढ़ाकर ₹395 से ₹400 प्रति क्विंटल किए जाने की प्रबल संभावना है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आगामी 22 सितंबर को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक में इस मूल्य संवर्धन पर अंतिम मुहर लगने की उम्मीद है।


📊 उत्तर प्रदेश में वर्तमान बनाम प्रस्तावित गन्ना मूल्य ढांचा (2026-27)

गन्ना प्रजाति (Variety)वर्तमान दर (2025-26)प्रस्तावित वृद्धि (Hike)नया संभावित SAP रेट (2026-27)
अगेती प्रजाति (Early Variety)₹370 / क्विंटल+ ₹25 से ₹30₹395 — ₹400 / क्विंटल
सामान्य प्रजाति (General Variety)₹360 / क्विंटल+ ₹25 से ₹30₹385 — ₹390 / क्विंटल
अनुपयुक्त प्रजाति (Rejected Variety)₹355 / क्विंटल+ ₹20 से ₹25₹375 — ₹380 / क्विंटल

🌾 लागत में 18% की वृद्धि: किसानों का गणित क्या कहता है?

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर द्वारा तैयार की गई लागत विश्लेषण रिपोर्ट (C2+50% फॉर्मूला) के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 1 एकड़ गन्ने के उत्पादन पर आने वाला औसत खर्च पिछले एक वर्ष में तेजी से बढ़ा है:

  • डीजल व जुताई खर्च: ट्रेंच बुवाई और 6 बार गहरी सिंचाई पर औसत खर्च ₹8,500 से बढ़कर ₹10,200 प्रति एकड़ पहुंच गया।
  • खाद व पोषण: डीएपी, पोटाश, नैनो यूरिया और सूक्ष्म पोषक तत्वों पर खर्च ₹6,200 से बढ़कर ₹7,800 प्रति एकड़ हुआ।
  • कीट नियंत्रण (Red Rot & Top Borer): कोराजन (Chlorantraniliprole), फिप्रोनिल और फफूंदनाशकों के 3-4 छिड़काव का खर्च ₹6,500 प्रति एकड़ दर्ज किया गया।
  • छिलाई व कटाई मजदूरी: गन्ने की कटाई और ट्रॉली भराई की दर ₹45-50 प्रति क्विंटल से बढ़कर ₹58-62 प्रति क्विंटल हो गई है।

इस प्रकार, 1 एकड़ में 350 क्विंटल औसत पैदावार लेने वाले किसान की कुल उत्पादन लागत लगभग ₹240 से ₹255 प्रति क्विंटल बैठती है। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश (लागत + 50% मुनाफा) के अनुसार किसान संगठन ₹450 प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं।


🗺️ पड़ोसी राज्यों से तुलना: यूपी क्यों बना दबाव का केंद्र?

उत्तर प्रदेश के किसान लंबे समय से हरियाणा और पंजाब की तुलना में कम दाम मिलने का मुद्दा उठाते रहे हैं:

राज्यवर्तमान गन्ना दर (2025-26)2026-27 की अनुमानित दरमुख्य विशेषता
हरियाणा₹400 / क्विंटल (देश में सर्वाधिक)₹410 / क्विंटल (प्रस्तावित)अगेती किस्म पर देश का सबसे ऊंचा भाव
पंजाब₹391 / क्विंटल₹405 / क्विंटल (मांग)सहकारी चीनी मिलों द्वारा त्वरित 7-दिवसीय भुगतान
उत्तर प्रदेश₹370 / क्विंटल₹395 — ₹400 / क्विंटल (प्रस्तावित)देश का 45% गन्ना उत्पादन व 120 मिलें
उत्तराखंड₹375 / क्विंटल₹395 / क्विंटल (समान्तर नीति)यूपी के मूल्य फार्मूले का अनुसरण

🏭 चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति: क्या मिलें ₹400 का भाव वहन कर सकती हैं?

उत्तर प्रदेश शुगर मिल्स एसोसिएशन (UPSMA) ने प्रारंभिक बैठकों में भाव में अत्यधिक बढ़ोतरी पर वित्तीय दबाव की बात कही थी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मिलों की वित्तीय स्थिति इस समय काफी मजबूत है:

  1. एथेनॉल डिस्टिलरी से बंपर आय: केंद्र सरकार द्वारा 280 करोड़ लीटर एथेनॉल आपूर्ति के टेंडर और बी-हैवी शीरा (B-Heavy Molasses) से डिस्टिलरियों को प्रति लीटर ₹60.73 का आकर्षक मूल्य मिल रहा है।
  2. चीनी के थोक भाव में सुधार: घरेलू बाजार में त्योहारी सीजन के चलते थोक चीनी के दाम ₹3,860 से ₹3,920 प्रति क्विंटल के मजबूत स्तर पर टिके हुए हैं।
  3. बगास व को-जेनरेशन बिजली: गन्ने की खोई से बनने वाली ग्रीन एनर्जी को यूपी पावर कारपोरेशन (UPPCL) द्वारा प्राथमिकता से खरीदा जा रहा है।

📢 किसान नेताओं का रुख: ‘₹400 से कम कुछ भी मंजूर नहीं’

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा:

“अगर हरियाणा अपने किसानों को ₹400 प्रति क्विंटल दे सकता है, तो देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश के किसानों को ₹370 पर क्यों अटकाया गया है? लागत दोगुनी हो चुकी है। 20 सितंबर को मुजफ्फरनगर से लेकर लखनऊ तक किसान ट्रैक्टरों के साथ सड़कों पर उतरेंगे। सरकार को पेराई सत्र शुरू होने से पहले कम से कम ₹400 का भाव घोषित करना होगा।”


📌 निष्कर्ष एवं आगे क्या?

कैबिनेट की सब-कमेटी अपनी संस्तुति अगले सप्ताह मुख्यमंत्री को सौंपेगी। यदि सरकार ₹395 से ₹400 प्रति क्विंटल का भाव तय करती है, तो यह उत्तर प्रदेश के इतिहास में एक मुश्त सबसे बड़ी बढ़ोतरी मानी जाएगी, जिससे प्रदेश के ग्रामीण अर्थतंत्र में लगभग ₹8,500 करोड़ की अतिरिक्त तरलता (Liquidity) आएगी।

CaneUp.xyz इस निर्णय पर पल-पल की नजर बनाए हुए है। कैबिनेट बैठक का आधिकारिक आदेश आते ही सबसे पहले हमारे पोर्टल पर सूचित किया जाएगा।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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