यूपी में देर मानसून से गन्ना खेत जलमग्न: पेराई 8-10 दिन लेट, चीनी भाव में तेजी संभव — किसान तुरंत करें ये 5 काम

अक्टूबर का पहला हफ्ता गन्ना किसानों के लिए सबसे बड़ा महीना माना जाता है, क्योंकि इसी समय से पेराई सत्र 2026-27 की तैयारियां अपने चरम पर होती हैं। लेकिन इस बार मानसून की देरी से हो रही भारी बारिश ने यूपी के हजारों गन्ना किसानों की नींद उड़ा दी है। खेतों में पानी भर गया है, कई जगह गन्ना तेज हवा से लेट गया है और पेराई की शुरुआत 8 से 10 दिन लेट होने की आशंका है।
कहां-कहां हुआ नुकसान
सबसे ज्यादा असर पश्चिम उत्तर प्रदेश और तराई के जिलों में देखने को मिला है। बिजनौर जैसे जिलों में लगातार तीन दिन हुई भारी बारिश ने गन्ने की पकने की रफ्तार धीमी कर दी है। खेतों में जलभराव से कटाई का काम रुक गया है।
ग्रामीण मीडिया रूरल वॉइस की रिपोर्ट के मुताबिक तेज हवा और लगातार बारिश से कई जिलों में गन्ने के साथ धान की फसल भी लेट गई है। गंगा और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ने से हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि डूब गई है, और तराई के निचले इलाकों के गन्ना खेत भी चपेट में आए हैं।
डीएनए की एक रिपोर्ट में चीनी मिल अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि हिमालय की तराई से सटे बलरामपुर, लखीमपुर और गोंडा जैसे इलाकों में गन्ने के खेतों में जलभराव हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक पानी नहीं उतरता और जमीन सूखती नहीं, तब तक कटाई संभव नहीं होगी।
पेराई पर क्या असर: 8-10 दिन की देरी संभव
पेराई सत्र 2026-27 औपचारिक रूप से 1 अक्टूबर से शुरू हो चुका है, लेकिन जमीन पर हालात कुछ और कह रहे हैं। कई जिलों में बारिश के कारण पेराई की शुरुआत करीब 8 से 10 दिन लेट हो सकती है। पानी भरे खेतों में न तो मजदूर जा सकते हैं और न ही ट्रैक्टर-ट्रॉली, ऐसे में गन्ना मिल तक पहुंचना ही मुश्किल हो गया है।
खास बात यह है कि सरकार इस बार पेराई जल्दी शुरू करवाना चाहती थी, ताकि सत्र का पूरा गन्ना समय पर पेरा जा सके। लेकिन मौसम ने योजना पर पानी फेर दिया है। चीनी उद्योग के जानकारों के मुताबिक जल्दी पेराई से रिकवरी (चीनी निकलने की दर) घट सकती है, क्योंकि गन्ना अभी पूरी तरह पका नहीं है।
गन्ने की सेहत को खतरा: गिरी फसल और बीमारी का जोखिम
भारी बारिश का सबसे बड़ा खतरा सिर्फ देरी नहीं, बल्कि फसल की सेहत पर पड़ने वाला असर है। तेज हवा से कई खेतों में गन्ना लेट गया है। गिरी हुई फसल में नमी लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे लाल सड़न (रेड रॉट) जैसी फफूंदी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। यूपी में पहले से ही को-0238 किस्म रेड रॉट की मार झेल रही है।
कॉमोडिटी बोर्ड की रिपोर्ट में भी स्पष्ट कहा गया है कि लंबे समय तक जलभराव से खेतों तक पहुंच मुश्किल होगी और गुणवत्ता के नुकसान का खतरा बढ़ेगा। खेतों में खड़ा पानी गन्ने की जड़ों को नुकसान पहुंचाता है और उपज में कमी का कारण बनता है।
चीनी के भाव पर असर: किसानों के लिए क्या मायने
बारिश की इस खबर का असर सिर्फ खेत तक सीमित नहीं है। गन्ने की आपूर्ति पर दबाव से चीनी के भाव को सहारा मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय चीनी संगठन (आईएसओ) पहले ही 2026-27 सत्र में वैश्विक चीनी बाजार में मामूली घाटे का अनुमान जता चुका है। ऐसे में भारत में मौसम की मार वैश्विक भावों को भी ऊपर धकेल सकती है।
किसानों के लिए इसका सीधा मतलब यह है: अगर गन्ने की उपलब्धता घटती है और चीनी के भाव मजबूत रहते हैं, तो मिलों पर समय पर भुगतान का दबाव कम हो सकता है। हालांकि यह लंबी अवधि का समीकरण है। तुरंत राहत के लिए किसानों को अपनी फसल बचाने पर ध्यान देना होगा, क्योंकि खेत में खड़ा नुकसान ही सबसे बड़ा नुकसान है।
मानसून का हिसाब: 802 मिमी बारिश, 8 फीसदी ज्यादा
आंकड़ों पर नजर डालें तो 1 जून से 28 सितंबर के बीच उत्तर प्रदेश में करीब 802 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से लगभग 8 फीसदी ज्यादा है। परेशानी यह है कि यह बारिश जिलों में बहुत असमान रही — कहीं मूसलाधार तो कहीं मामूली। इसी असमानता ने जलभराव वाले इलाकों में नुकसान को कई गुना बढ़ा दिया।
कृषि और राजस्व विभाग के अधिकारी बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर फसल नुकसान का आकलन कर रहे हैं। जिन किसानों की फसल को नुकसान हुआ है, उन्हें आकलन के बाद मुआवजे और फसल बीमा के दावों का लाभ मिल सकता है।
किसान तुरंत करें ये 5 काम
बारिश थमने के बाद अगले कुछ दिन फसल बचाने के लिहाज से सबसे अहम हैं। कृषि विशेषज्ञों की सलाह के मुताबिक किसान इन 5 कामों को प्राथमिकता दें:
1. खेत से पानी निकालें: सबसे पहला काम खेत में भरे पानी की निकासी है। खेत के निचले हिस्से में नाली बनाकर पानी बाहर निकालें। गन्ने की जड़ों में ज्यादा देर पानी ठहरना उपज के लिए सबसे खतरनाक है।
2. गीले खेत में कटाई न करें: जब तक जमीन सूख न जाए, गन्ना न काटें। गीली मिट्टी में कटाई से जड़ें खराब होती हैं और पेड़ी (रटून) फसल पर भी बुरा असर पड़ता है। मिल को गन्ना देने की जल्दबाजी में कच्ची कटाई न करें।
3. गिरी फसल को संभालें: तेज हवा से लेटे गन्ने को जल्द से जल्द खड़ा करने या काटकर मिल भेजने की व्यवस्था करें। लेटी फसल में बीमारी जल्दी फैलती है, इसलिए देर न करें।
4. बीमारी पर नजर रखें: जलभराव के बाद खेत में लाल सड़न या अन्य फफूंदी के लक्षण दिखें तो तुरंत जिला गन्ना अधिकारी या कृषि विभाग से संपर्क करें।
5. नुकसान की सूचना और बीमा दावा: अगर फसल को बड़ा नुकसान हुआ है तो पटवारी या कृषि विभाग को लिखित सूचना दें और फसल बीमा का दावा समय पर दाखिल करें। नुकसान के आकलन में अधिकारियों का सहयोग करें ताकि मुआवजा मिल सके।
आपके सवाल
सवाल: क्या इस बार पेराई सत्र देरी से शुरू होगा? जवाब: औपचारिक रूप से सत्र 1 अक्टूबर से शुरू हो चुका है, लेकिन कई जिलों में जलभराव के कारण मिलों में गन्ना पहुंचने में 8 से 10 दिन की देरी हो सकती है। पानी उतरने के बाद ही कटाई शुरू हो पाएगी।
सवाल: बारिश से गन्ने की फसल को क्या नुकसान होता है? जवाब: जलभराव से गन्ने की जड़ें कमजोर होती हैं, तेज हवा से फसल लेट जाती है और लंबे समय तक नमी रहने से लाल सड़न जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ता है। इससे उपज और चीनी की रिकवरी दोनों घट सकती हैं।
सवाल: क्या बारिश से चीनी के भाव बढ़ेंगे? जवाब: गन्ने की आपूर्ति पर दबाव और वैश्विक बाजार में संभावित घाटे के अनुमान से चीनी के भाव को सहारा मिल रहा है। खुदरा भाव पर असर सरकार की स्टॉक सीमा और नीतियों पर निर्भर करेगा।
सवाल: फसल नुकसान पर मुआवजा कैसे मिलेगा? जवाब: अधिकारी बीमा कंपनियों के साथ नुकसान का आकलन कर रहे हैं। किसान अपने क्षेत्र के पटवारी या कृषि विभाग को नुकसान की सूचना दें और फसल बीमा का दावा समय पर दाखिल करें।
सवाल: गन्ना किसानों के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर क्या है? जवाब: टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर संपर्क किया जा सकता है। एसएमएस के लिए सरकारी शॉर्टकोड 51969 है।
स्रोत: कॉमोडिटी बोर्ड (commodity-board.com), रूरल वॉइस (eng.ruralvoice.in), डीएनए इंडिया (dnaindia.com)
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