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15 अक्टूबर वाली पेराई अब नवंबर तक टली: रिकवरी कम, चीनी ₹70 किलो तक पहुंची — किसानों के लिए 5 जरूरी काम

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 14, 2026 • 6 min read
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15 अक्टूबर वाली पेराई अब नवंबर तक टली: रिकवरी कम, चीनी ₹70 किलो तक पहुंची — किसानों के लिए 5 जरूरी काम
अंतिम अपडेट: October 14, 2026 4:50 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को जिस तारीख का इंतजार था, वह आगे खिसक गई है। 15 अक्टूबर से शुरू होने वाली पेराई अब अक्टूबर में शुरू होती नहीं दिख रही। बारिश से गन्ने की मिठास यानी रिकवरी कम आई है, दैनिक जागरण की 14 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, 15 अक्टूबर से शुरू होने वाला पेराई सत्र अब नवंबर तक खिसक गया है।

दूसरी तरफ बाजार में चीनी के भाव तेजी से चढ़ रहे हैं। पिछले चार-पांच दिनों में थोक चीनी 300 से 400 रुपये प्रति क्विंटल महंगी हुई है और फुटकर बाजार में चीनी एक हफ्ते में 10 से 20 रुपये प्रति किलो बढ़कर 62 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। मिलों के गोदाम खाली हो रहे हैं और नई चीनी आने में देरी हो रही है।

पेराई क्यों टली: बारिश, रिकवरी और मिलों की मजबूरी

गन्ने की पेराई का फैसला सिर्फ तारीख देखकर नहीं होता, रिकवरी देखकर होता है। रिकवरी का मतलब है कि 100 क्विंटल गन्ने से कितनी चीनी बनती है। अगर गन्ने में मिठास कम है तो मिल को उतने ही गन्ने से कम चीनी मिलेगी।

इस साल लगातार बारिश ने गन्ने की मिठास को प्रभावित किया है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, बरसात से गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचा है और शुरुआती गन्ने में अपेक्षित मिठास नहीं आ पाई है। बिजनौर की बरकातपुर चीनी मिल के संयुक्त अध्यक्ष नरपत सिंह के मुताबिक, रिकवरी कम आ रही है, इसलिए अभी पेराई संभव नहीं है। यह चिंता नई नहीं है — ईटी नाउ की 8 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, मिलें रिकवरी प्रभावित होने के डर से जल्दी पेराई शुरू करने में हिचक रही थीं।

मिलों के लिए दूसरा दबाव स्टॉक का है। जागरण के मुताबिक, बरकातपुर और बिजनौर मिलों के गोदाम चीनी से पूरी तरह खाली हो चुके हैं

चीनी ₹62-70 किलो तक क्यों पहुंची

चीनी के भाव चढ़ने की तीन वजहें एक साथ आई हैं। पहली, आपूर्ति की कमी — मिलों के गोदाम खाली हैं और नई चीनी आने में देरी हो रही है। दूसरी, त्योहारों की मांग। तीसरी, बाजार की अटकलें — कुछ कारोबारियों ने भाव और बढ़ने की उम्मीद में बिक्री रोक ली है।

आंकड़ों में देखें तो भाव का सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। जागरण के मुताबिक, अगस्त की शुरुआत में मिलों से बिकने वाली चीनी करीब 4,400 रुपये प्रति क्विंटल थी। भाव 31 अगस्त को 6,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे। सितंबर में भाव 4,350 रुपये प्रति क्विंटल तक आ गए थे। अब फिर तेजी आई है और मिलों से उठने वाली चीनी 4,650 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है।

दूसरे राज्यों की स्थिति भी बाजार को सहारा दे रही है। जागरण के मुताबिक, महाराष्ट्र में गन्ने की पैदावार 20 प्रतिशत और कर्नाटक में 30 प्रतिशत तक कम होने का अनुमान है। यह अनुमान है, अंतिम आंकड़ा नहीं, लेकिन बाजार इसी अनुमान पर भाव बना रहा है।

सीतापुर से बिजनौर तक: जिलेवार तैयारी की स्थिति

चिनीमंडी की रिपोर्ट के मुताबिक, सीतापुर जिले में चीनी मिलों ने लगभग 80 प्रतिशत मरम्मत और रखरखाव का काम पूरा कर लिया है। मौसम अनुकूल रहने पर वहां अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह के बीच पेराई शुरू होने की उम्मीद है।

बिजनौर में तैयारियां दूसरे चरण में हैं। चिनीमंडी की रिपोर्ट के मुताबिक, जिले की 10 चीनी मिलों ने अपने लगभग 744 गन्ना क्रय केंद्रों पर तौल कांटे लगाने का काम शुरू कर दिया है। जिले की कुछ मिलों के अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में पेराई शुरू करने की उम्मीद है।

देरी का किसान पर सीधा असर: पर्ची, गेहूं की बुवाई और भुगतान

पेराई टलने का सबसे पहला असर पर्चियों पर पड़ेगा। जिन किसानों की पर्चियां अक्टूबर के बीच में कटनी थीं, उनकी कटाई आगे खिसकेगी। इसका मतलब यह नहीं है कि पर्ची रद्द हो गई — आपूर्ति का कार्यक्रम नए सिरे से तय होगा। गेहूं की बुवाई भी देर से होगी। तीसरा असर भुगतान के चक्र पर पड़ेगा — गन्ना देर से जाएगा तो भुगतान भी आगे खिसकेगा। चौथा असर खड़े गन्ने पर पड़ेगा — धूप भरे सूखे दिन रिकवरी सुधारने में मदद करते हैं।

किसानों के लिए 5 जरूरी काम

1. पर्ची और कैलेंडर की स्थिति जांचें: अपनी पर्ची, कैलेंडर और सट्टे की जानकारी देखते रहें।

2. कच्चा गन्ना जल्दी न काटें: रिकवरी कम होने की वजह से ही पेराई टली है। बारिश के बाद खेत सूखने दें और धूप वाले दिनों का इंतजार करें।

3. बैंक खाता और रिकॉर्ड दुरुस्त रखें: बैंक खाता सक्रिय रखें और सर्वे रिकॉर्ड में रकबा व किस्म की जानकारी सही है या नहीं, यह जांच लें।

4. क्रय केंद्र पर तौल पर्ची जरूर लें: गन्ना तौल कराते समय तौल पर्ची लेना न भूलें और वजन अपनी जानकारी से मिलाकर देखें।

5. शिकायत के लिए हेल्पलाइन का इस्तेमाल करें: गन्ना भुगतान, पर्ची या सर्वे से जुड़ी शिकायत के लिए किसान टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर संपर्क कर सकते हैं। शिकायत दर्ज कराते समय सट्टा विवरण और पर्ची की जानकारी साथ रखें।

भाव का सवाल: एसएपी 2026-27 की घोषणा अभी बाकी है

पेराई की देरी के बीच सबसे बड़ा सवाल गन्ने के भाव का है। साफ कर दें कि उत्तर प्रदेश में 2026-27 सत्र के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र यानी 2025-26 में अगेती किस्म के गन्ने का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल था। केंद्र सरकार ने 2026-27 के लिए 10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी पर एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। एफआरपी केंद्र का न्यूनतम भाव है, जबकि एसएपी राज्य सरकार द्वारा तय किया गया भाव होता है, जो आमतौर पर एफआरपी से अधिक रहता है। एफआरपी और एसएपी के अंतर को विस्तार से यहां समझें।

बाजार की मौजूदा स्थिति में एक और पहलू है। बिजनौर की मिलों ने इस बार सिर्फ सी-हैवी शीरे से चीनी बनाने का फैसला किया है, यानी गन्ने के रस या बी-हैवी शीरे से एथनॉल बनाने के बजाय ज्यादा से ज्यादा गन्ना चीनी बनाने में जाएगा। बिजनौर की मिलों के इस फैसले पर पूरी जानकारी यहां पढ़ें। इससे आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है। जब तक आधिकारिक घोषणा नहीं होती, किसी भी भाव को इस सत्र का भाव मानकर न चलें।

पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: यूपी में गन्ना पेराई कब शुरू होगी? उत्तर: पश्चिमी यूपी में 15 अक्टूबर से शुरू होने वाली पेराई अब नवंबर तक टल गई है।

प्रश्न 2: पेराई टलने से मेरी पर्ची का क्या होगा? उत्तर: पर्ची रद्द नहीं होगी, उसका कार्यक्रम आगे खिसकेगा। अपना पर्ची कैलेंडर देखते रहें और मिल या समिति से पुष्टि करें।

प्रश्न 3: क्या गन्ना अभी काट देना चाहिए? उत्तर: नहीं, जल्दबाजी में कच्चा गन्ना काटने से नुकसान होगा। रिकवरी कम है, इसलिए खेत सूखने और धूप वाले दिनों का इंतजार करें।

प्रश्न 4: चीनी के भाव बढ़ने से किसानों को क्या फायदा होगा? उत्तर: चीनी के भाव बढ़ने से मिलों की आय सुधरती है, जिससे भुगतान की क्षमता बढ़ती है। लेकिन इसका सीधा फायदा तभी मिलेगा जब मिलें भुगतान समय पर करें।

प्रश्न 5: गन्ना भुगतान या पर्ची की शिकायत कहां करें? उत्तर: किसान टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर संपर्क कर सकते हैं। शिकायत करते समय सट्टा विवरण और पर्ची की जानकारी साथ रखें।

स्रोत: दैनिक जागरण (14 अक्टूबर 2026), चिनीमंडी (अमर उजाला और हिंदुस्तान के हवाले से), ईटी नाउ, टाइम्स ऑफ इंडिया।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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