गन्ना किसानों को दिन में 10 घंटे बिजली: UPPCL का नया रोस्टर लागू — रात में खेत में जागने और ठंड से मिली मुक्ति

लखनऊ / मुजफ्फरनगर / बिजनौर (CaneUp विशेष ब्यूरो — 25 सितंबर 2026 सुबह 7:44 बजे): उत्तर प्रदेश के 45 गन्ना उत्पादक जनपदों के लाखों ग्रामीण किसानों के जीवन स्तर और खेती की सुरक्षा में सुधार लाने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला ऊर्जा विभाग द्वारा लागू कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के प्रबंध निदेशक ने राज्य के सभी विद्युत वितरण निगमों (डिस्कॉम) को निर्देश जारी करते हुए ग्रामीण कृषि फीडरों (Dedicated Agricultural Feeders) पर ‘डे-टाइम 10 ऑवर अनइंटरप्टेड 3-फेज पावर सप्लाई’ (सुबह 8:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक लगातार 10 घंटे बिजली) का नया रोस्टर आज से प्रभावी कर दिया है।
विगत कई दशकों से ग्रामीण क्षेत्रों में निजी नलकूपों को रात के 11:00 बजे से सुबह 05:00 बजे तक बिजली दी जाती थी। इस अमानवीय व्यवस्था के कारण किसानों को कड़कड़ाती ठंड, घने कोहरे और जंगली जानवरों के खौफ के बीच रात भर खेतों में जागना पड़ता था।
⚡ डिस्कॉम-वार कृषि फीडर विद्युत रोस्टर 2026-27
UPPCL द्वारा जारी आधिकारिक आपूर्ति सारिणी के अनुसार:
| वितरण निगम (Discom Name) | दिन में आपूर्ति समय | कुल दैनिक अवधि | प्रमुख आच्छादित गन्ना जनपद |
|---|---|---|---|
| पश्चिमांचल विद्युत वितरण (PVVNL) | सुबह 08:00 बजे से शाम 06:00 बजे | 10 घंटे लगातार | मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, बिजनौर, सहारनपुर, बागपत, बुलंदशहर |
| मध्यांचल विद्युत वितरण (MVVNL) | सुबह 08:30 बजे से शाम 06:30 बजे | 10 घंटे लगातार | लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बरेली |
| पूर्वांचल विद्युत वितरण (PuVVNL) | सुबह 08:00 बजे से शाम 06:00 बजे | 10 घंटे लगातार | गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, महाराजगंज, बलरामपुर |
| दक्षिणांचल विद्युत वितरण (DVVNL) | सुबह 07:30 बजे से शाम 05:30 बजे | 10 घंटे लगातार | अलीगढ़, कासगंज, एटा, हाथरस, मथुरा |
🌾 दिन में 10 घंटे बिजली मिलने से किसानों को 4 ऐतिहासिक सुरक्षा लाभ
- तराई अंचल में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर पूर्ण विराम: लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, बिजनौर और कतर्नियाघाट के तराई क्षेत्रों में 14 फीट ऊंचे गन्ने के खेतों में बाघ, गुलदार और आवारा गोवंश का भारी आतंक रहता है। रात में सिंचाई के दौरान हर साल दर्जनों किसान वन्यजीवों के हमले में जान गंवाते थे। दिन में बिजली आने से किसान सुरक्षित रोशनी में अपनी फसल सींच सकेंगे।
- शरदकालीन बुवाई व पलेवा में 30% तेजी: गन्ने की शरद बुवाई के लिए खेत तैयार करते समय एक समान गहरी सिंचाई (पलेवा) की आवश्यकता होती है। दिन में नाली और क्यारी देखकर पानी लगाने से पानी व्यर्थ नहीं बहता और मेड़ टूटने का खतरा नहीं रहता।
- स्थिर 415 वोल्ट वोल्टेज (No Motor Burnout): दिन के समय ग्रामीण घरेलू लोड कृषि फीडर से पूरी तरह अलग (Segregated) रहता है। इससे वोल्टेज में अचानक उतार-चढ़ाव (Fluctuation) नहीं होता और किसानों की सबमर्सिबल व मोनोब्लॉक मोटरों के जलने का भारी खर्च बच जाता है।
- श्रमिकों की सहज उपलब्धता: दिन में सिंचाई होने से खेत मजदूर आसानी से काम करने को तैयार हो जाते हैं, जबकि रात में अतिरिक्त मजदूरी देने पर भी लेबर नहीं मिलती थी।
💳 निजी नलकूपों पर 100% मुफ्त बिजली योजना के कड़े नियम
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा घोषित ‘निजी नलकूप मुफ्त बिजली योजना’ के तहत किसानों को शून्य बिजली बिल का लाभ दिया जा रहा है:
- शर्त 1: किसान के नाम से जारी कृषि विद्युत कनेक्शन पर कोई पुराना बकाया शेष न हो (पुराने बकाये के लिए ब्याज माफी के साथ आसान किश्त योजना लागू है)।
- शर्त 2: कनेक्शन का उपयोग विशुद्ध रूप से कृषि सिंचाई के लिए हो, किसी व्यावसायिक कार्य या आटा चक्की के लिए नहीं।
- शर्त 3: विद्युत विभाग द्वारा स्थापित मीटर से छेड़छाड़ न की गई हो।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: यदि निर्धारित समय में बिजली कट जाती है तो क्या भरपाई मिलेगी?
उत्तर: UPPCL के नियमों के अनुसार, यदि दिन के 10 घंटे के दौरान तकनीकी खराबी या ब्रेकडाउन के कारण 1 घंटे से अधिक बिजली कटती है, तो शाम को उस कटौती की अवधि जोड़कर रोस्टर का समय आगे बढ़ाया जाएगा।
प्रश्न 2: ट्रांसफार्मर फुंकने पर कितने घंटे में बदलने का नियम है?
उत्तर: उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) की सिटीजन चार्टर नीति के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि ट्रांसफार्मर जलने पर अधिकतम 48 घंटे के भीतर नया ट्रांसफार्मर लगाना अधिशासी अभियंता (XEN) की व्यक्तिगत जिम्मेदारी है।
प्रश्न 3: बिजली कटौती या फॉल्ट की शिकायत तुरंत कहां दर्ज कराएं?
उत्तर: किसान भाई 24 घंटे संचालित टोल-फ्री नंबर 1912 पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जिसका निस्तारण ट्रैकिंग नंबर के साथ किया जाता है।
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