राष्ट्रीय दक्षता पुरस्कार 2026: यूपी की 8 सहकारी चीनी मिलों ने जीते सम्मान, बिजनौर की नजीबाबाद मिल बनी देश की सर्वश्रेष्ठ

🚨 BREAKING: उत्तर प्रदेश की 8 सहकारी चीनी मिलों ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा सम्मान हासिल किया है। नई दिल्ली के डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित राष्ट्रीय दक्षता पुरस्कार (National Efficiency Awards) समारोह में नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज़ (NFCSF) ने यूपी की इन मिलों को पेराई सत्र 2024-25 और 2025-26 के उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया। सबसे बड़ी कामयाबी बिजनौर के नजीबाबाद की रही — द किसन कोऑपरेटिव शुगर मिल, स्नेह रोड, नजीबाबाद को देश की सर्वश्रेष्ठ सहकारी चीनी मिल का पुरस्कार मिला।
कार्यक्रम: नई दिल्ली में दो पेराई सत्रों के पुरस्कार
NFCSF देश की सहकारी चीनी मिलों का शीर्ष संगठन है, जो करीब 260 सहकारी चीनी मिलों और 9 राज्य स्तरीय शुगर फेडरेशनों का प्रतिनिधित्व करता है। यह संगठन हर साल गन्ना विकास, तकनीकी दक्षता, वित्तीय प्रबंधन, चीनी रिकवरी और समग्र प्रदर्शन में उत्कृष्ट मिलों को सम्मानित करता है।
इस बार दो पेराई सत्रों — 2024-25 और 2025-26 — के पुरस्कार एक साथ दिए गए। पुरस्कार समारोह में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल समेत विभिन्न राज्यों के मंत्री, निदेशक, वरिष्ठ अधिकारी और चीनी मिलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। कुल 57 पुरस्कार दिए गए, जिनमें महाराष्ट्र ने 21 पुरस्कारों के साथ सबसे ज़्यादा सम्मान जीते। उत्तर प्रदेश और गुजरात ने 8-8 पुरस्कार हासिल किए, जबकि पंजाब और तमिलनाडु की झोली में 5-5 पुरस्कार आए।
पेराई सत्र 2024-25 के विजेता: 4 मिलें, नजीबाबाद सबसे आगे
2024-25 सत्र में उत्तर प्रदेश की जिन 4 सहकारी चीनी मिलों को सम्मान मिला, उनकी सूची इस प्रकार है:
- द किसन कोऑपरेटिव शुगर मिल, स्नेह रोड, नजीबाबाद (बिजनौर): सभी मानदंडों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए समग्र सर्वश्रेष्ठ सहकारी चीनी मिल (Overall Best Cooperative Sugar Mill) का प्रतिष्ठित पुरस्कार। यह पुरस्कार उस मिल को मिलता है जो गन्ना विकास से लेकर तकनीकी दक्षता, वित्तीय प्रबंधन और समग्र प्रदर्शन — हर पैमाने पर देश में नंबर एक साबित होती है।
- सरजू कोऑपरेटिव शुगर मिल, बेलरायां (लखीमपुर खीरी): गन्ना विकास (Cane Development) श्रेणी में सम्मान। यह पुरस्कार उन मिलों को दिया जाता है जो अपने क्षेत्र के किसानों के साथ गन्ने की उपज बढ़ाने, उन्नत बीज और बेहतर कृषि तकनीक पहुंचाने में अग्रणी रहती हैं।
- द किसन कोऑपरेटिव शुगर मिल, गजरौला (अमरोहा): चीनी रिकवरी में सुधार के लिए पुरस्कार। रिकवरी का मतलब है कि गन्ने की एक ही मात्रा से कितनी ज़्यादा चीनी निकाली गई — इस पैमाने पर सुधार का मतलब है मिल की मशीनरी और प्रक्रिया बेहतर हुई है।
- बागपत कोऑपरेटिव शुगर मिल्स लिमिटेड, बागपत: वित्तीय प्रबंधन में अनुकरणीय काम के लिए पुरस्कार। मिल का आर्थिक हिसाब-किताब साफ और मज़बूत रहने पर यह सम्मान दिया जाता है।
पेराई सत्र 2025-26 के विजेता: 4 और मिलों ने रचा इतिहास
2025-26 सत्र में भी यूपी की 4 सहकारी चीनी मिलों ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्वज फहराया:
- द गंगा किसान कोऑपरेटिव शुगर मिल, मोरना (मुज़फ़्फ़रनगर): पश्चिमी उत्तर प्रदेश की इस मिल को गन्ना विकास श्रेणी में पुरस्कार मिला। मुज़फ़्फ़रनगर और आसपास का क्षेत्र यूपी का प्रमुख गन्ना बेल्ट है, और यहां की मिल का यह सम्मान खास मायने रखता है।
- रामला कोऑपरेटिव शुगर मिल, रामला (बागपत): तकनीकी दक्षता के लिए सम्मान।
- द किसन कोऑपरेटिव शुगर मिल, सठियांव (आज़मगढ़): पूर्वी उत्तर प्रदेश की इस मिल को भी तकनीकी दक्षता में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुरस्कार मिला।
- द किसन कोऑपरेटिव शुगर मिल, पुवायां (शाहजहांपुर): वित्तीय प्रबंधन में श्रेष्ठता के लिए राष्ट्रीय दक्षता पुरस्कार।
इस तरह यूपी के बिजनौर, लखीमपुर खीरी, अमरोहा, बागपत, मुज़फ़्फ़रनगर, आज़मगढ़ और शाहजहांपुर — 7 ज़िलों की मिलें देश के नक्शे पर चमकी हैं।
ये पुरस्कार गन्ना किसानों के लिए क्यों मायने रखते हैं?
सहकारी चीनी मिलों को अक्सर निजी मिलों की तुलना में कमज़ोर माना जाता है। लेकिन इन पुरस्कारों की हर श्रेणी सीधे किसान के हित से जुड़ी है:
- गन्ना विकास पुरस्कार: जिस मिल को यह मिलता है, वह अपने क्षेत्र में किसानों को बेहतर बीज, सही सलाह और फसल प्रबंधन में सहयोग देती है। यानी मिल के क्षेत्र के किसानों को बढ़ी उपज का सीधा फायदा मिलता है।
- तकनीकी दक्षता पुरस्कार: तकनीकी रूप से मज़बूत मिल में मशीनें कम रुकती हैं, पेराई तेज़ होती है और पर्ची का चक्र जल्दी पूरा होता है। किसानों को अपना गन्ना मिल तक पहुंचाने में कम इंतज़ार करना पड़ता है।
- वित्तीय प्रबंधन पुरस्कार: आर्थिक रूप से स्वस्थ मिल का हिसाब-किताब साफ रहता है। गन्ना किसानों की सबसे बड़ी चिंता बकाया भुगतान होती है, और मज़बूत वित्तीय प्रबंधन वाली मिल से समय पर भुगतान की उम्मीद बढ़ती है।
- समग्र सर्वश्रेष्ठ: नजीबाबाद मिल को मिला यह पुरस्कार साबित करता है कि एक सहकारी मिल भी सभी मानदंडों में देश में नंबर एक हो सकती है — यह यूपी के अन्य सहकारी संस्थानों के लिए भी प्रेरणा है।
यूपी की मिलों ने दो सालों में लगातार गन्ना विकास और तकनीकी दक्षता के पुरस्कार जीते — यानी यह निरंतर सुधार की तस्वीर है।
यूपी के गन्ना उद्योग की बड़ी तस्वीर: 121 मिलें, 48 लाख किसान परिवार
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है। पेराई सत्र 2025-26 में राज्य में 121 चीनी मिलें संचालित हुईं — इनमें यूपी राज्य चीनी निगम की 3 मिलें, यूपी कोऑपरेटिव शुगर मिल्स फेडरेशन की 23 मिलें और 95 निजी मिलें शामिल हैं। इन मिलों ने कुल 877.96 लाख टन गन्ना पेरा और 89.68 लाख टन चीनी का उत्पादन किया।
खास बात यह है कि महाराष्ट्र की 210 मिलों की तुलना में यूपी की कम मिलों ने 10.21 प्रतिशत की औसत चीनी रिकवरी दर्ज की — जो महाराष्ट्र के 9.49 प्रतिशत और कर्नाटक के 8.19 प्रतिशत से ज़्यादा है। यानी कम मिलों के बावजूद यूपी का चीनी उद्योग तकनीकी रूप से आगे रहा।
इस बढ़ोतरी के बाद अगेती प्रजाति का राज्य परामर्शी मूल्य (SAP) 400 रुपये और सामान्य प्रजाति का 390 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। सरकार के अनुसार 2017 के बाद से अब तक गन्ना किसानों को कुल 3.25 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा का भुगतान किया जा चुका है, जिससे प्रदेश के 48 लाख गन्ना किसान परिवारों की आर्थिक स्थिति मज़बूत हुई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. राष्ट्रीय दक्षता पुरस्कार किसे और क्यों दिए जाते हैं? NFCSF हर साल सहकारी चीनी मिलों को गन्ना विकास, तकनीकी दक्षता, वित्तीय प्रबंधन, चीनी रिकवरी और समग्र प्रदर्शन में उत्कृष्ट काम के लिए ये पुरस्कार देता है।
Q2. इस बार यूपी की कितनी मिलों को पुरस्कार मिले? कुल 8 सहकारी चीनी मिलों को — पेराई सत्र 2024-25 के लिए 4 और पेराई सत्र 2025-26 के लिए 4।
Q3. देश की सर्वश्रेष्ठ सहकारी चीनी मिल कौन सी बनी? बिजनौर के नजीबाबाद स्थित द किसन कोऑपरेटिव शुगर मिल, स्नेह रोड को 2024-25 सत्र का “समग्र सर्वश्रेष्ठ सहकारी चीनी मिल” पुरस्कार मिला।
Q4. समारोह कहां और कब आयोजित हुआ? पुरस्कार नई दिल्ली के डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में 22 सितंबर को आयोजित राष्ट्रीय समारोह में दिए गए, जिसमें केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान मौजूद रहे।
Q5. इन पुरस्कारों से आम गन्ना किसान को क्या फायदा है? पुरस्कृत मिलें गन्ना विकास, मशीनरी और वित्तीय प्रबंधन में बेहतर होती हैं — इसका मतलब किसानों को अच्छी सलाह, तेज़ पेराई और समय पर भुगतान की उम्मीद।
स्रोत: Report Wire (25 सितंबर 2026), The Hans India (25 सितंबर 2026), ChiniMandi (12 सितंबर 2026)
अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें
गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।
यह आर्टिकल कैसा लगा?


