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पेराई सत्र से पहले बड़ी राहत — यूपी की चीनी मिलों ने चुकाया ₹31,400 करोड़ का गन्ना बकाया, 8 डिफॉल्टर मिलों पर RC जारी

Aamir Raza Aamir Raza Sep 6, 2026 3 min read
पेराई सत्र से पहले बड़ी राहत — यूपी की चीनी मिलों ने चुकाया ₹31,400 करोड़ का गन्ना बकाया, 8 डिफॉल्टर मिलों पर RC जारी
अंतिम अपडेट: September 6, 2026 3:00 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

लखनऊ / शामली (CaneUp ग्राउंड रिपोर्ट): उत्तर प्रदेश के 50 लाख गन्ना किसानों के लिए नए पेराई सत्र 2026-27 के शुभारंभ से पूर्व राहत भरी खबर आई है। गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग की आधिकारिक समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश की 120 चीनी मिलों ने पेराई सत्र 2025-26 के कुल देय गन्ना मूल्य का 98.2% यानी ₹31,400 करोड़ से अधिक का भुगतान किसानों के बैंक खातों में डीबीटी (DBT) के माध्यम से हस्तांतरित कर दिया है।

हालाँकि, शामली, हापुड़, बिजनौर और संभल की 8 चिन्हित डिफॉल्टर निजी चीनी मिलों पर अब भी लगभग ₹580 करोड़ का बकाया अटका हुआ है। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए संबंधित जिलाधिकारियों ने उत्तर प्रदेश गन्ना (पूर्ति एवं खरीद विनियमन) अधिनियम 1953 की धारा 17 के तहत रिकवरी सर्टिफिकेट (RC) जारी कर मिलों के चीनी गोदामों और बैंक खातों को अटैच करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।


📊 जिलेवार भुगतान की धरातल स्थिति (Top Performing vs Lagging Districts)

जिलाकुल देय धनराशिभुगतान प्रतिशतवर्तमान स्थिति
मुजफ्फरनगर₹3,420 करोड़99.8%खतौली, तितावी, मंसूरपुर ने लगभग 100% भुगतान चुकता किया
मेरठ₹2,850 करोड़99.4%दौराला, मवाना व किनौनी का भुगतान समयबद्ध रहा
सहारनपुर₹2,610 करोड़99.1%देवबंद व गांगनौली का अधिकांश क्लीयरेंस पूर्ण
लखीमपुर खीरी₹4,100 करोड़98.6%बलरामपुर व बजाज ग्रुप की मिलों ने तेज किया निपटान
शामली₹1,980 करोड़89.2%अपर दोआब शामली व थानाभवन पर ₹240 करोड़ अभी बकाया
हापुड़₹1,120 करोड़91.5%सिंभावली व बृजनाथपुर पर रिकवरी नोटिस तामील

⚖️ हाई कोर्ट का सख्त रुख — 14 दिन बाद 15% ब्याज की तलवार

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने हाल ही में किसान संगठनों की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट आदेश दिया है कि:

  1. 14 दिनों के भीतर भुगतान अनिवार्य: चीनी मिलें किसानों को तौल की तिथि से 14 दिनों के भीतर भुगतान करने के लिए वैधानिक रूप से बाध्य हैं।
  2. 15% वार्षिक साधारण ब्याज: 14 दिन की वैधानिक अवधि बीतने के बाद किसानों को उनके बकाए पर 15% वार्षिक दर से ब्याज सहित भुगतान करना होगा।
  3. अक्टूबर 2026 का लाइसेंस रोकेंगे: शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पिछले सत्र का शत-प्रतिशत भुगतान और ब्याज का हलफनामा दाखिल नहीं किया जाता, तब तक संबंधित मिल को नए सत्र 2026-27 के लिए पेराई लाइसेंस (Crushing Permit) जारी नहीं होगा।

🌾 एस्क्रो अकाउंट से सीधे कट रहा है किसानों का पैसा

चीनी मिलों द्वारा गन्ना मूल्य की राशि को अन्य कार्यों में डायवर्ट करने से रोकने के लिए सरकार ने ‘टैग-सिस्टम एस्क्रो अकाउंट (Escrow Account)’ लागू किया है। इसके तहत:

  • मिलों द्वारा बेची जाने वाली चीनी, शीरा और एथेनॉल से आने वाली कुल धनराशि का 85% हिस्सा स्वतः एस्क्रो खाते में फ्रीज हो जाता है।
  • इस 85% धनराशि से केवल और केवल किसानों के गन्ना भुगतान की डीबीटी फाइल प्रोसेस की जाती है, जिसे मिल प्रबंधन अपनी मर्जी से रोक नहीं सकता।

शासन के इस कड़े वित्तीय प्रबंधन के चलते उम्मीद है कि 25 सितंबर 2026 तक बाकी बची ₹580 करोड़ की बकाया धनराशि भी किसानों के खातों में पहुंच जाएगी।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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