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बारिश के बाद खेत तैयारी एडवाइजरी — ट्रेंच विधि से शरदकालीन गन्ना बुवाई के लिए ऐसे तैयार करें जमीन

Randhir Patil Randhir Patil Sep 3, 2026 3 min read
बारिश के बाद खेत तैयारी एडवाइजरी — ट्रेंच विधि से शरदकालीन गन्ना बुवाई के लिए ऐसे तैयार करें जमीन
अंतिम अपडेट: September 3, 2026 7:30 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

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शाहजहांपुर / मुजफ्फरनगर: पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश में पिछले 48 घंटों के दौरान हुई व्यापक मानसूनी बारिश के बाद मिट्टी में पर्याप्त नमी (वतर) आ गई है। इसे आगामी 15 सितंबर से शुरू होने जा रही शरदकालीन गन्ना बुवाई (Autumn Sugarcane Planting) के लिए स्वर्णिम अवसर बताते हुए यूपी गन्ना शोध परिषद (UPCSR), शाहजहांपुर के मृदा वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों ने आज खेत की तैयारी और भूमि शोधन के संबंध में एक विस्तृत वैज्ञानिक एडवाइजरी जारी की है।

गन्ना शोध परिषद के मुख्य कृषि वैज्ञानिक डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि शरद ऋतु में बोया गया गन्ना वसंत ऋतु (फरवरी-मार्च) के गन्ने की तुलना में 20 से 25% अधिक पैदावार और 0.5% अधिक चीनी रिकवरी देता है, क्योंकि इसे वानस्पतिक बढ़वार के लिए 3 से 4 महीने का अतिरिक्त समय मिलता है। लेकिन इसका अधिकतम लाभ तभी मिलता है जब खेत की तैयारी वैज्ञानिक तरीके से की जाए।

ट्रेंच विधि से खेत तैयारी के 4 मुख्य वैज्ञानिक चरण

वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए निम्नलिखित 4-चरणीय खेत तैयारी फॉर्मूले की सिफारिश की है:

  1. गहरी जुताई और धूप लगाना (Soil Solarization): जैसे ही बारिश के बाद खेत में हल चलने लायक नमी (वतर) आए, मिट्टी पलटने वाले हल (MB Plough) या डिस्क हैरो से 20 से 25 सेमी गहरी जुताई करें। जुताई के बाद खेत को 3 से 4 दिन तेज धूप में खुला छोड़ें ताकि मिट्टी में छिपे लाल सड़न (Red Rot) के फंगल स्पोर्स और दीमक के अंडे धूप की गर्मी से नष्ट हो जाएं।
  2. ट्राइकोडर्मा युक्त सड़ी गोबर खाद का प्रयोग: अंतिम जुताई से पूर्व प्रति एकड़ 80 से 100 क्विंटल अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या प्रेसमड (कंपोस्ट) में 2.5 किलोग्राम ट्राइकोडर्मा विरिडी (Trichoderma) मिलाकर एक सप्ताह छाया में नम रखें और फिर खेत में समान रूप से बिखेर कर रोटावेटर चलाएं। यह जैविक फफूंदनाशक मिट्टी जनित सभी रोगों से पौधे की रक्षा करता है।
  3. ट्रेंच नालियों का निर्माण: सामान्य 2.5 फीट की संकीर्ण दूरी के स्थान पर ट्रेंच ओपनर की सहायता से 4.5 से 5 फीट (135 से 150 सेमी) की दूरी पर 30 सेमी गहरी नालियां बनाएं। नालियों की दिशा हमेशा उत्तर से दक्षिण रखें ताकि दोनों कतारों के पौधों को पूरे दिन भरपूर सूर्य का प्रकाश और हवा मिल सके।
  4. संतुलित बेसल खाद का मिश्रण: बुवाई के समय नाली की तली में प्रति एकड़ 1 बोरी डीएपी (50 किग्रा), 1 बोरी एमओपी पोटाश (50 किग्रा), 10 किग्रा फेरस सल्फेट और 5 किग्रा रीजेंट (फिप्रोनिल 0.3% जीआर) डालकर मिट्टी में हल्का मिला दें।

सह-फसली खेती से शून्य लागत का मॉडल

वैज्ञानिकों ने बताया कि 4.5 फीट चौड़ी ट्रेंच नालियों के बीच की ऊंची मेड़ों पर किसान भाई सरसों (पूसा मस्टर्ड या पीली सरसों), आलू (कुफरी पुखराज) या मटर की एक कतार लगा सकते हैं। 90 दिनों में सह-फसल की बिक्री से गन्ने की पूरी खाद, बीज और सिंचाई की लागत निकल जाती है और मुख्य गन्ना शुद्ध लाभ के रूप में प्राप्त होता है।

शोध परिषद ने किसानों को यह भी सलाह दी है कि बुवाई से पूर्व बीज का 52 डिग्री सेल्सियस गर्म पानी में 30 मिनट तक शोधन (Hot Water Treatment) अवश्य कराएं ताकि लाल सड़न का संक्रमण नए खेत में न पहुंच सके।

Randhir Patil
लेखक

Randhir Patil

गन्ना उद्योग विशेषज्ञ — ChiniMandi पर 425+ लेख। गन्ना खेती, शुगर मिल, MSP रेट, सरकारी योजनाओं पर विश्वसनीय जानकारी।

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