गन्ने में रेड रॉट और टॉप बोरर पर UPCSR का 'येलो अलर्ट' — तीसरी-चौथी पत्ती सूखने पर तुरंत करें ये 2 उपाय, 50% तक बच जाएगी फसल

मुख्य बिंदु (Quick Summary): सितंबर महीने में हो रही रुक-रुक कर मानसूनी बारिश और 32 से 35 डिग्री सेल्सियस के उमस भरे तापमान के कारण उत्तर प्रदेश के तराई और पश्चिमी क्षेत्रों में गन्ने की मुख्य प्रजाति Co-0238 में रेड रॉट (लाल सड़न) और टॉप बोरर (चोटी बेधक) का प्रकोप बढ़ने लगा है। गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर ने ‘येलो अलर्ट’ जारी करते हुए किसानों को त्वरित उपचार करने की सलाह दी है।
शाहजहांपुर/लखीमपुर खीरी (CaneUp कृषि विज्ञान डेस्क — 11 सितंबर 2026): उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद (UPCSR), शाहजहांपुर के पादप रोग विज्ञान विभाग ने राज्य के सभी गन्ना उत्पादक जनपदों के लिए ‘रेड रॉट एवं कीट प्रकोप येलो अलर्ट’ जारी किया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, सितंबर का पहला पखवाड़ा गन्ने की फसल के लिए सबसे संवेदनशील समय होता है। यदि इस समय खेत में जलभराव रहता है या हवा में आर्द्रता 85% से अधिक होती है, तो ‘कोलेटोट्राइकम फैल्केटम’ (Colletotrichum falcatum) फंगस अत्यंत तेजी से फैलता है।
लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, बिजनौर और मुजफ्फरनगर के कई क्षेत्रों में विशेष रूप से Co-0238 प्रजाति के खेतों में तीसरी व चौथी पत्ती का सूखना और अगोले का पीला पड़ना देखा गया है।
🔍 रेड रॉट और टॉप बोरर के प्रमुख लक्षण कैसे पहचानें?
| रोग/कीट | प्रमुख लक्षण | खेत में पहचान का आसान तरीका |
|---|---|---|
| रेड रॉट (लाल सड़न रोग) | - पौधे की तीसरी और चौथी पत्ती ऊपर से नीचे सूखने लगती है। - तने को बीच से चीरने पर गूदा लाल दिखाई देता है और बीच-बीच में सफेद चकत्ते होते हैं। | चीरे हुए तने से शराब या सिरके जैसी तीखी खट्टी गंध आती है। |
| टॉप बोरर (चोटी बेधक कीट) | - गन्ने की गोभ (Central Spindle) में सूंडी छेद कर अंदर घुस जाती है। - पत्तियों पर समानांतर गोल छेद (Shot Holes) दिखाई देते हैं। | गोभ सूखकर ‘डेड हार्ट’ (Dead Heart) बन जाती है और गन्ने की बढ़वार रुक जाती है। |
🛡️ फसल बचाने के लिए वैज्ञानिकों द्वारा बताए गए 2 तत्काल उपाय
गन्ना शोध परिषद के निदेशक डॉ. वी.पी. सिंह ने किसानों को निम्नलिखित दो चरणों में काम करने का कड़ा निर्देश दिया है:
चरण 1: ग्रसित पौधों की तत्काल सफाई (Rouging)
- जिस पौधे में लाल सड़न के लक्षण दिखें, उसे जड़ समेत उखाड़ लें।
- ग्रसित पौधे को खेत की मेड़ पर फेंकने के बजाय गड्ढा खोदकर दबा दें या जला दें, क्योंकि पानी के बहाव से इसके बीजाणु पूरे खेत में फैल जाते हैं।
- उखाड़े गए स्थान के गड्ढे में 10 से 15 ग्राम ब्लीचिंग पाउडर या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड डालकर मिट्टी से ढक दें।
चरण 2: रासायनिक एवं जैविक छिड़काव
- फफूंद नियंत्रण हेतु:
- थायोफेनेट मिथाइल 70% WP की 2 ग्राम प्रति लीटर पानी या एजॉक्सीस्ट्रोबिन + डाइफेनोकोनाजोल की 1 मिली प्रति लीटर पानी की दर से गन्ने की जड़ों और तनों पर तर-बतर कर छिड़काव करें।
- जैविक उपचार हेतु प्रति एकड़ 2 किग्रा ट्राइकोडर्मा हरजिएनम को 100 किग्रा गोबर की खाद में मिलाकर खेत में नमी की स्थिति में बिखेरें।
- टॉप बोरर नियंत्रण हेतु:
- क्लोरांट्रानिलिप्रोल 18.5% SC (कोराजन) की 150 मिली मात्रा को 400 लीटर पानी में घोलकर गन्ने की गोभ पर ड्रेंचिंग करें।
शोध परिषद ने दोहराया है कि किसान आगामी शरदकालीन बुवाई में Co-0238 की बुवाई बिल्कुल न करें और इसके स्थान पर रोगरोधी किस्में Co-15023, Co-0118, CoLk-14201 और CoS-17231 को ही प्राथमिकता दें।
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