शाहजहांपुर गन्ना शोध परिषद में स्थापित होगी अत्याधुनिक टिशू कल्चर लैब — रेड-रॉट प्रभावित 0238 के विकल्प के रूप में 4 नई किस्मों के प्रजनक बीज तैयार

शाहजहांपुर / लखनऊ (CaneUp विशेष ब्यूरो — 13 सितंबर 2026): उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को लाल सड़न रोग (Red-Rot) की तबाही से बचाने और प्रति एकड़ पैदावार को 500 क्विंटल के पार पहुंचाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने बड़ा कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद (UPCSR), शाहजहांपुर के केंद्रीय अनुसंधान केंद्र पर विश्वस्तरीय अत्याधुनिक टिशू कल्चर प्रयोगशाला (Tissue Culture Laboratory) स्थापित की जा रही है।
गन्ना शोध परिषद के निदेशक और वरिष्ठ गन्ना वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रदेश में लगभग एक दशक तक राज करने वाली ‘Co-0238’ प्रजाति अब लाल सड़न रोग (कैंसर ऑफ शुगरकेन) की चपेट में आकर अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह खो चुकी है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए टिशू कल्चर लैब के माध्यम से वायरस व कवक मुक्त क्लोनल प्रवर्धन (Clonal Propagation) करके 4 प्रमुख रोग-रोधी नई किस्मों के शुद्ध प्रजनक बीज (Breeder Seeds) युद्धस्तर पर तैयार किए जा रहे हैं।
🧬 टिशू कल्चर लैब से किसानों को क्या चमत्कारी फायदा होगा?
पारंपरिक विधि से गन्ने का बीज तैयार करने में एक आंख या तीन आंख के टुकड़ों को बोया जाता है, जिससे यदि मूल गन्ने में फंगस या बीमारी हो तो वह नई फसल में भी फैल जाती है। टिशू कल्चर तकनीक में:
- 100% बीमारी-मुक्त पौधे: पौधे के शीर्ष मेरिस्टेम (Shoot Tip Meristem) से प्रयोगशाला में कृत्रिम पोषक माध्यम पर पौधे तैयार किए जाते हैं, जिससे लाल सड़न और ग्रासी शूट (Grassy Shoot) के जीवाणु समाप्त हो जाते हैं।
- तीव्र बीज गुणन दर: जहां सामान्य गन्ने से 1 वर्ष में मात्र 10 गुना बीज तैयार होता है, वहीं टिशू कल्चर से एक पौधे से एक ही वर्ष में 1,000 से अधिक स्वस्थ पौधे तैयार किए जा सकते हैं।
- उच्च शर्करा व वजन: टिशू कल्चर के शुद्ध बीज से तैयार गन्ने में मिठास (Recovery) 0.5% से 0.8% तक अधिक पाई जाती है और गन्ने की मोटाई व ठोसपन बेहतर होता है।
🌾 Co-0238 के विकल्प के रूप में तैयार की गई 4 प्रमुख नई किस्में
| किस्म का नाम | पकने की श्रेणी | औसत पैदावार (प्रति एकड़) | चीनी रिकवरी | मुख्य विशेषताएं व प्रतिरोधक क्षमता |
|---|---|---|---|---|
| Co-15023 | अगेती (Early) | 480 - 550 क्विंटल | 13.2% - 13.8% | अत्यंत तीव्र बढ़वार, उच्च मिठास, लाल सड़न रोग से 100% सुरक्षित। |
| Co-0118 | अगेती (Early) | 420 - 480 क्विंटल | 12.5% - 13.0% | ठोस गन्ना, गिरने के प्रति सहनशील, पाला व सूखा रोधी, गुड़ बनाने के लिए सर्वोत्तम। |
| CoS-13235 | अगेती (Early) | 450 - 500 क्विंटल | 12.8% - 13.4% | मध्य यूपी व तराई क्षेत्रों में जलभराव व बाढ़ सहने में सक्षम, उत्कृष्ट पेड़ी (Ratoon)। |
| CoLk-14201 | अगेती (Early) | 440 - 490 क्विंटल | 12.6% - 13.2% | भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (IISR) लखनऊ द्वारा विकसित, टॉप बोरर व कीट प्रतिरोधी। |
📅 शरदकालीन बुवाई (Autumn Sowing) के लिए बीज बुकिंग प्रक्रिया
वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि आगामी 15 सितंबर से 31 अक्टूबर 2026 के बीच शरदकालीन बुवाई के लिए इन नई किस्मों का ही चयन करें:
- सब्सिडी और मूल्य: राज्य सरकार इन नई किस्मों के प्रमाणित प्रजनक बीजों पर गन्ना विकास परिषदों के माध्यम से प्रति क्विंटल ₹50 से ₹100 तक का विशेष अनुदान (Subsidy) दे रही है।
- बुकिंग का तरीका: किसान भाई अपनी संबंधित सहकारी गन्ना विकास समिति के विकास निरीक्षक (Cane Development Inspector - CDI) या शोध परिषद शाहजहांपुर, सेवरही, मुजफ्फरनगर और गोला गोकर्णनाथ के शोध केंद्रों पर जाकर सीधे बुकिंग करा सकते हैं।
- सिंगल-बड चिप विधि: किसानों को सलाह दी गई है कि महंगे बीज की बचत के लिए आंख निकालने वाले यंत्र (Bud Chipper) का प्रयोग करें और प्रो-ट्रे (Pro-tray) में 25 दिन की पौध तैयार करके ट्रेंच विधि से 4.5 से 5 फीट की दूरी पर रोपाई करें। इससे मात्र 1.5 से 2 क्विंटल बीज में पूरा एक एकड़ खेत तैयार हो जाता है।
💡 गन्ना वैज्ञानिकों की विशेष सलाह
शोध परिषद के वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि जिन खेतों में पिछले वर्ष Co-0238 में लाल सड़न रोग लगा था, वहां कम से कम 2 वर्ष तक गन्ने की फसल न लें। खेत को गहरी जुताई करके ट्राइकोडर्मा (Trichoderma) 2 किग्रा प्रति एकड़ सड़ी हुई गोबर की खाद में मिलाकर फैलाएं और नई प्रजातियों (Co-15023 या Co-0118) के बीजों को कार्बेन्डाजिम या बाविस्टिन से उपचारित (Seed Treatment) करके ही बोएं।
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