चीनी मिलों के 1,500 मेगावाट बायोमास ग्रीन पावर टैरिफ की समीक्षा — पेराई सत्र में निर्बाध ग्रिड सप्लाई

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने आज 2 सितंबर को लखनऊ में आयोजित एक महत्वपूर्ण जनसुनवाई में आगामी पेराई सत्र 2026-27 के दौरान प्रदेश की चीनी मिलों द्वारा गन्ने की खोई (Bagasse) से उत्पादित होने वाली सह-उत्पादन हरित बिजली (Bagasse Cogeneration Power) के पावर परचेज टैरिफ की व्यापक समीक्षा की। बैठक में उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) और चीनी उद्योग संघ के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
उत्तर प्रदेश की 72 निजी और सहकारी चीनी मिलों में आधुनिक को-जेनरेशन पावर प्लांट स्थापित हैं, जिनकी कुल ग्रिड-सप्लाई क्षमता लगभग 1,500 मेगावाट (MW) है। पेराई सत्र (अक्टूबर से अप्रैल) के दौरान जब मिलें पूरी क्षमता से चलती हैं, तो वे अपनी आवश्यकता की बिजली पूरी करने के बाद अतिरिक्त हरित ऊर्जा को राज्य के ग्रिड में निर्यात करती हैं, जिससे ग्रामीण अंचलों में बिजली की उपलब्धता मजबूत होती है।
बिजली बिक्री से किसानों के भुगतान को मिलती है रफ्तार
चीनी उद्योग संघ के प्रतिनिधियों ने नियामक आयोग के समक्ष मांग रखी कि पिछले तीन वर्षों में बॉयलरों की मेंटेनेंस, ग्रिड सिंक्रोनाइजेशन लागत और ट्रांसमिशन व्हीलिंग चार्ज में वृद्धि हुई है। वर्तमान में पावर कॉर्पोरेशन चीनी मिलों को औसतन ₹4.40 से ₹4.75 प्रति यूनिट का टैरिफ देता है। मिल प्रबंधनों ने इस दर को बढ़ाकर कम से कम ₹5.15 प्रति यूनिट करने का अनुरोध किया है ताकि मिलों के पास किसानों को समय पर भुगतान करने के लिए पर्याप्त लिक्विडिटी उपलब्ध हो सके।
आयोग के अध्यक्ष ने सुनवाई के दौरान कहा, “गन्ने की खोई से बनने वाली बिजली पूरी तरह से कार्बन न्यूट्रल और पर्यावरण के अनुकूल हरित ऊर्जा है। यह प्रदेश को केंद्र सरकार के रिन्यूएबल परचेज ऑब्लिगेशन (RPO) लक्ष्य को पूरा करने में सीधी मदद करती है। आयोग दोनों पक्षों के वित्तीय आंकड़ों का अध्ययन कर 15 सितंबर तक संशोधित टैरिफ ऑर्डर जारी करेगा।”
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण फीडरों को मिलेगा सीधा फायदा
विद्युत ट्रांसमिशन निगम के अधिकारियों ने बताया कि पेराई सत्र के दौरान मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बिजनौर, लखीमपुर खीरी और सीतापुर की चीनी मिलों से उत्पन्न 1,500 मेगावाट बिजली सीधे 132 केवी और 33 केवी के ग्रामीण उपकेंद्रों को फीड की जाती है। इससे सर्दियों के महीनों में जब कोहरे और अन्य कारणों से थर्मल पावर स्टेशनों पर दबाव बढ़ता है, तब पश्चिमी यूपी में रोस्टिंग की समस्या से पूरी तरह मुक्ति मिल जाती है और किसानों को नलकूप चलाने के लिए दिन के समय निर्बाध 14 से 16 घंटे थ्री-फेज बिजली उपलब्ध होती है।
आयोग ने पावर कॉर्पोरेशन को यह भी आदेश दिया कि चीनी मिलों द्वारा ग्रिड को दी जाने वाली बिजली का भुगतान 30 दिनों के भीतर किया जाए ताकि मिलें इस राजस्व को सीधे एस्क्रो खाते में डालकर किसानों के बकाए का भुगतान कर सकें।
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