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गन्ने की मैली (प्रेसमड) से बनेगी बायोगैस — यूपी में ₹720 करोड़ के 18 नए CBG प्लांट्स को हरी झंडी

Randhir Patil Randhir Patil Sep 3, 2026 3 min read
गन्ने की मैली (प्रेसमड) से बनेगी बायोगैस — यूपी में ₹720 करोड़ के 18 नए CBG प्लांट्स को हरी झंडी
अंतिम अपडेट: September 3, 2026 8:15 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती को केवल चीनी और गुड़ तक सीमित न रखकर बहुआयामी हरित ऊर्जा उद्योग में बदलने की दिशा में राज्य सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (UPNEDA) ने आज 3 सितंबर को केंद्र सरकार की सतत (SATAT) योजना के तहत प्रदेश की 18 चीनी मिल परिसरों में गन्ने की मैली (Pressmud) और डिस्टिलरी स्लॉरी से कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) उत्पादन के ₹720 करोड़ की लागत वाले 18 आधुनिक संयंत्रों को अंतिम तकनीकी एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी है।

परियोजना निदेशक (यूपीनेडा) ने बताया कि इन 18 प्लांट्स में से 10 प्लांट पश्चिमी उत्तर प्रदेश (मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर, सहारनपुर, बुलंदशहर) और 8 प्लांट मध्य एवं तराई बेल्ट (लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई और पीलीभीत) की निजी व सहकारी चीनी मिलों में स्थापित किए जा रहे हैं।

प्रतिदिन 180 टन ग्रीन बायो-सीएनजी का होगा उत्पादन

प्रत्येक CBG प्लांट की औसत क्षमता 10 टन प्रतिदिन कंप्रेस्ड बायोगैस उत्पादन की होगी, जिससे सभी 18 संयंत्र मिलकर प्रतिदिन कुल 180 टन सीएनजी का उत्पादन करेंगे। यह गैस सीधे इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और गेल (GAIL) के पेट्रोल पंपों पर वाहनों में वाणिज्यिक बिक्री के लिए उपलब्ध कराई जाएगी:

  • पर्यावरण सुरक्षा: गन्ने की मैली से निकलने वाली मीथेन गैस वायुमंडल में जाने के बजाय स्वच्छ ईंधन में तब्दील होगी, जिससे कार्बन फुटप्रिंट में 60% तक की कमी आएगी।
  • कच्चे तेल के आयात में कटौती: देश को हर साल लगभग ₹350 करोड़ की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
  • मिलों की अतिरिक्त आमदनी: चीनी मिलों को प्रेसमड बेचने से सालाना ₹40 से ₹50 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा, जिसका उपयोग किसानों के समयबद्ध भुगतान में किया जाएगा।

किसानों को मिलेगा उच्च गुणवत्ता वाला जैविक खाद (FOM)

इस परियोजना का सबसे बड़ा वरदान गन्ना किसानों के लिए किण्वित जैविक खाद (Fermented Organic Manure - FOM) के रूप में सामने आएगा। गैस बनने के बाद बचने वाला प्रेसमड अवशेष पूरी तरह दुर्गंधहीन और नाइट्रोजन, फास्फोरस व सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर उच्च कोटि का जैविक खाद बन जाता है।

गन्ना विकास विभाग ने घोषणा की है कि यह जैविक खाद चीनी मिल क्षेत्र के किसानों को मात्र ₹2 प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर बोरियों में पैक करके उपलब्ध कराया जाएगा। इससे किसानों के खेतों में रासायनिक डीएपी और यूरिया पर निर्भरता 30% तक कम हो जाएगी और मिट्टी की घटती जैविक कार्बन (Organic Carbon) क्षमता में भारी सुधार होगा। निर्माण कार्य इसी माह से शुरू होकर मार्च 2027 तक पूरा कर लिया जाएगा।

ग्रामीण युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन

इन 18 परियोजनाओं से प्रत्येक चीनी मिल परिक्षेत्र में लगभग 80 से 100 कुशल एवं अकुशल युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। इसके अलावा प्रेसमड ढुलाई और जैविक खाद वितरण में संलग्न 500 से अधिक स्थानीय ट्रैक्टर-ट्रॉली चालकों को नियमित आजीविका का साधन प्राप्त होगा।

Randhir Patil
लेखक

Randhir Patil

गन्ना उद्योग विशेषज्ञ — ChiniMandi पर 425+ लेख। गन्ना खेती, शुगर मिल, MSP रेट, सरकारी योजनाओं पर विश्वसनीय जानकारी।

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