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अमेरिकी कृषि विभाग का चौंकाने वाला अनुमान: 2026-27 में भारत का चीनी उत्पादन 14% घटकर 2.95 करोड़ टन — यूपी के गन्ना किसानों को क्या होगा फायदा?

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 9, 2026 • 6 min read
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अमेरिकी कृषि विभाग का चौंकाने वाला अनुमान: 2026-27 में भारत का चीनी उत्पादन 14% घटकर 2.95 करोड़ टन — यूपी के गन्ना किसानों को क्या होगा फायदा?
अंतिम अपडेट: October 9, 2026 2:21 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर से गन्ना किसानों के लिए बड़ी खबर है। अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) ने 2026-27 सीजन के लिए भारत के चीनी उत्पादन का नया अनुमान जारी किया है — पहले के अनुमान 3.36 करोड़ टन से घटकर अब सिर्फ 2.95 करोड़ टन का उत्पादन रह सकता है, यानी 14 प्रतिशत की कटौती। रिपोर्ट में खास तौर पर उत्तर प्रदेश में गन्ने में रेड बोअर कीट के प्रकोप और रिकवरी दर गिरने का जिक्र है, इसलिए यह खबर सीधे यूपी के गन्ना किसानों से जुड़ी है।

क्या कहता है अमेरिकी कृषि विभाग का नया अनुमान

यूएसडीए के विदेशी कृषि सेवा (एफएएस) कार्यालय की 7-8 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • चीनी उत्पादन: 2.95 करोड़ टन, पहले के अनुमान 3.36 करोड़ टन से 14% कम — इसमें 2.76 करोड़ टन क्रिस्टल चीनी और 62,000 टन खांडसारी शामिल है।
  • गन्ना उत्पादन: 43.4 करोड़ टन रहने का अनुमान, जो पहले के 46.3 करोड़ टन के अनुमान से 6% कम है।
  • चीनी रिकवरी दर: सिर्फ 8.6%, जो एक क्विंटल गन्ने से मिलने वाली चीनी तय करती है।
  • घरेलू खपत: 3.1 करोड़ टन, जो उत्पादन से करीब 13 लाख टन अधिक है — तीन साल में खपत और उत्पादन के बीच सबसे बड़ा अंतर।

गिरावट के पीछे क्या वजह है?

अनियमित मानसून और शक्तिशाली एल नीनो के चलते बारिश की कमी से गन्ने में शुगर की मात्रा घटी है। रिपोर्ट में इन बातों का खास जिक्र है:

  • महाराष्ट्र में जलभराव: बेमौसम बारिश से गन्ने की फसल में पानी भरा, जिससे उपज और चीनी की मात्रा दोनों प्रभावित हुई।
  • यूपी में रेड बोअर कीट: उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में गन्ने में रेड बोअर कीट (छेदक कीट) के प्रकोप का उल्लेख है — यह यूपी के किसानों के लिए सीधी चेतावनी है।
  • 2027 की शुरुआत में मिलिंग पर खतरा: पानी की बढ़ती कमी मिलों के संचालन के लिए गंभीर जोखिम है, क्योंकि सूखे जैसी स्थिति से 2027 की शुरुआत में पेराई प्रभावित हो सकती है।

यूपी के गन्ना किसानों के लिए इसका क्या मतलब है?

उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है — प्रदेश में 122 चीनी मिलें हैं और पश्चिमी यूपी में कई मिलें 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू करने की तैयारी कर रही हैं। इस साल यूपी में गन्ना क्षेत्रफल करीब 28.4 लाख हेक्टेयर दर्ज हुआ है, जो पिछले साल से 47,000 हेक्टेयर कम है।

किसानों के लिए इस रिपोर्ट के तीन सीधे असर समझने जरूरी हैं:

1. चीनी के दाम मजबूत बने रह सकते हैं। खपत उत्पादन से 13 लाख टन अधिक होने से घरेलू बाजार में चीनी की कमी बन सकती है, जिससे मिलों की भुगतान क्षमता को सहारा मिलेगा। हालांकि सरकार मासिक रिलीज कोटा और 31 रुपये प्रति किलो के न्यूनतम विक्रय मूल्य से दामों पर नियंत्रण रखती है, इसलिए बेलगाम बढ़त की उम्मीद न करें।

2. रिकवरी दर 8.6% का मतलब। कम रिकवरी का सीधा संदेश है — पका हुआ, स्वच्छ और रोगमुक्त गन्ना आपूर्ति करना इस सीजन में और भी जरूरी हो गया है, क्योंकि मिलें रिकवरी पर विशेष ध्यान देंगी।

3. यूपी में रेड बोअर कीट की चेतावनी। खेतों में तने में छेद, पीली पत्ती और सूखती गांठों जैसे लक्षण दिखें तो समय पर गन्ना विभाग या कृषि अधिकारी से सलाह लें।

भाव और भुगतान पर क्या असर पड़ेगा?

इस समय सबसे बड़ा सवाल गन्ने के भाव का है। केंद्र सरकार ने 2026-27 चीनी सीजन (अक्टूबर 2026 से सितंबर 2027) के लिए एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो 10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी पर आधारित है। लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने पेराई सत्र 2026-27 के लिए अपना राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) अभी तक घोषित नहीं किया है — 9 अक्टूबर 2026 तक इसकी आधिकारिक घोषणा बाकी है। पिछले सत्र (2025-26) में अगेती किस्म के लिए एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल था।

किसान संगठन इस सीजन के लिए भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं, लेकिन जब तक सरकार आधिकारिक एसएपी की घोषणा नहीं करती, तब तक किसी दर को इस सीजन का भाव मानना गलत होगा। घोषणा होने तक पिछले सत्र की दर को इस सत्र की दर न मानें।

उत्पादन अनुमान में कटौती के साथ ही सरकार चीनी के बाजार पर नजर रखे हुए है — अक्टूबर के त्योहारी सीजन के लिए थोक विक्रेताओं के स्टॉक पर सीमा लगाई गई है और 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी गई है। यानी सरकार दामों को नियंत्रण में रखने की कोशिश जारी रखेगी। किसानों को सलाह है कि वे अपनी पर्ची, तौल और भुगतान का रिकॉर्ड बराबर रखें।

पेराई से पहले किसानों के लिए जरूरी सलाह

यूएसडीए की रिपोर्ट और मौजूदा हालात को देखते हुए, पेराई से पहले कुछ व्यावहारिक कदम अहम हैं:

  • रेड बोअर कीट की जांच करें: खेत में तने में छेद या पत्तियों के पीलेपन पर तुरंत कृषि विशेषज्ञ से संपर्क करें।
  • पका और स्वच्छ गन्ना ही आपूर्ति करें: जड़-पत्ती रहित, ताजा और रोगमुक्त गन्ना भेजने से बेहतर भाव मिलने की संभावना बढ़ती है।
  • सर्वे रिकॉर्ड का मिलान कर लें: पेराई से पहले गन्ना समिति में अपने सट्टे का मिलान जरूर करा लें।
  • बैंक खाता सक्रिय रखें: भुगतान सीधे खाते में आता है — खाता आधार से जुड़ा और सक्रिय होना चाहिए।
  • शिकायत के लिए टोल-फ्री नंबर: गन्ना विकास विभाग का किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 हर समय उपलब्ध है।

आपके सवाल

अमेरिकी कृषि विभाग ने भारत के चीनी उत्पादन का नया अनुमान क्या दिया है? यूएसडीए की अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट में 2026-27 सीजन के लिए भारत का चीनी उत्पादन अनुमान 14% घटाकर 2.95 करोड़ टन किया गया है, जो पहले के 3.36 करोड़ टन के अनुमान से काफी कम है।

उत्पादन में गिरावट की मुख्य वजह क्या बताई गई है? अनियमित मानसून, शक्तिशाली एल नीनो, बारिश की कमी से गन्ने में शुगर की मात्रा घटना, महाराष्ट्र में जलभराव और यूपी में रेड बोअर कीट का प्रकोप मुख्य वजहें बताई गई हैं। चीनी रिकवरी दर भी घटकर 8.6% रहने का अनुमान है।

क्या चीनी उत्पादन में कमी से किसानों को फायदा होगा? घरेलू खपत (3.1 करोड़ टन) उत्पादन से करीब 13 लाख टन अधिक होने से चीनी के दाम मजबूत बने रह सकते हैं, जिससे मिलों की भुगतान क्षमता को सहारा मिलेगा। लेकिन सरकार स्टॉक सीमा और रिलीज कोटा से दामों पर नियंत्रण रखती है, इसलिए बेलगाम बढ़त की उम्मीद न करें।

2026-27 के लिए यूपी का गन्ना एसएपी क्या है? उत्तर प्रदेश सरकार ने 9 अक्टूबर 2026 तक पेराई सत्र 2026-27 के लिए एसएपी की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। केंद्र का एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय है। घोषणा होने तक पिछले सत्र की दर (अगेती: 400 रुपये प्रति क्विंटल) को इस सत्र की दर न मानें।

यूएसडीए रिपोर्ट में यूपी के बारे में क्या खास कहा गया है? रिपोर्ट में यूपी के कुछ हिस्सों में गन्ने में रेड बोअर कीट के प्रकोप का उल्लेख है। किसानों को सलाह है कि वे खेतों में कीट के लक्षणों पर नजर रखें और समय पर विशेषज्ञ सलाह लें।

स्रोत: रॉयटर्स (8 अक्टूबर 2026), इनफॉर्मिस्ट मीडिया (7 अक्टूबर 2026), चिनीमंडी (9 अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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