1 नवंबर से पश्चिमी यूपी की कई चीनी मिलों में पेराई शुरू, गन्ना भाव की घोषणा अब भी बाकी — पहली पर्ची से पहले ये 5 काम कर लें

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए पेराई सत्र 2026-27 की शुरुआत हो गई है, लेकिन एक बड़ा सवाल अब भी अनुत्तरित है — इस सत्र का गन्ना भाव क्या होगा। बागपत की मलकपुर चीनी मिल से पेराई शुरू हुई, 31 अक्टूबर को मोदीनगर मिल चली और 1 नवंबर को बुलंदशहर, साबितगढ़ और मोरना की गंगा किसान सहकारी चीनी मिल सहित कई मिलों में पेराई शुरू करने की तैयारी थी। मेरठ में किनौनी मिल 1 नवंबर से चल रही है, जबकि मवाना, दौराला और नंगलामल की मिलें 2 नवंबर से चलेंगी। यानी खेत से गन्ना अब मिल तक जाने लगा है, पर जिस भाव पर वह तुल रहा है, उसकी आधिकारिक घोषणा अब तक नहीं हुई है। किसान संगठनों की मांग रही है कि पेराई शुरू होने से पहले भाव घोषित हो, ताकि किसान को अपनी फसल की असली कीमत का अंदाजा रहे। इस लेख में मिलवार तारीखें, भाव की मौजूदा स्थिति, बारिश का असर और पहली पर्ची की तैयारी साफ-साफ दी गई है।
1 नवंबर को कहां-कहां शुरू हुई पेराई
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पश्चिमी यूपी में पेराई चरणों में शुरू हो रही है। सबसे पहले बागपत की मलकपुर मिल चली, फिर 31 अक्टूबर को मोदीनगर मिल में सत्र शुरू हुआ। 1 नवंबर को बुलंदशहर और साबितगढ़ की मिलों के साथ मोरना स्थित गंगा किसान सहकारी चीनी मिल में भी पेराई शुरू करने की तैयारी बताई गई है। इसके बाद 2 नवंबर को मवाना, दौराला, नंगला मल, रमाला, अनामिका और धामपुर मिलों में पेराई शुरू होगी। किनौनी में 5 नवंबर और सकौती में 4 नवंबर से पेराई की बात कही गई है, जबकि मोहिउद्दीनपुर और टिकौला मिलें 7 नवंबर से सत्र शुरू करेंगी। बुढ़ाना, खतौली, मंसूरपुर और तितावी मिलों के भी नवंबर के पहले सप्ताह में चालू होने की संभावना है। ये तारीखें मौसम और मिल की तैयारी के अनुसार आगे-पीछे हो सकती हैं, इसलिए अपनी मिल की सही तारीख गन्ना समिति या क्रय केंद्र से जरूर पुष्टि करें।
मेरठ और सहारनपुर का शेड्यूल
मेरठ जिला पश्चिमी यूपी के गन्ना बेल्ट का बड़ा केंद्र है। दैनिक जागरण के अनुसार, जिले में छह चीनी मिलें हैं और इनकी कुल पेराई क्षमता 48,800 टीसीडी है। जिले में गन्ना किसानों की संख्या करीब 2.22 लाख बताई गई है। जिला गन्ना अधिकारी के अनुसार, 1 नवंबर से किनौनी, 2 नवंबर को मवाना, नंगलामल और दौराला की मिलें चलेंगी, फिर मोहिउद्दीनपुर व सकौती का संचालन शुरू होगा। पहले सप्ताह में सभी मिलें पूर्ण क्षमता से चलने की उम्मीद है, इसलिए पहली पर्ची वाले किसान कटाई और ढुलाई की व्यवस्था अभी से पक्की कर लें।
सहारनपुर में शेरमऊ और खाईखेड़ी मिलों में शुक्रवार से ही पेराई शुरू हो गई है, बिडवी और सरसावा में 1 नवंबर से और देवबंद, रोहाना, गांगनौली व नानौता में 3 नवंबर से पेराई की तैयारी है। अगेती किस्म पहले तैयार होती है, इसलिए उस क्षेत्र की मिलें पहले चलती हैं — किसान अपनी किस्म और समिति के कैलेंडर से ही कटाई की तारीख तय करें।
गन्ना भाव की घोषणा अब भी बाकी
सबसे बड़ा सवाल गन्ना मूल्य यानी एसएपी को लेकर है। साफ-साफ समझ लें: 2026-27 एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले पेराई सत्र में अगेती गन्ने का मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल और पछेती गन्ने का मूल्य 390 रुपये प्रति क्विंटल था। ये आंकड़े पिछले सत्र के हैं, इस सत्र के नहीं — इन्हें इस सत्र का भाव मानकर हिसाब न लगाएं। किसान संगठनों की मांग 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल के बीच है। मीडिया में 28 से 40 रुपये की बढ़ोतरी की अटकलें भी हैं, लेकिन यह आधिकारिक घोषणा नहीं है — सरकार की अधिसूचना आने तक किसी दावे को पक्का न मानें। राष्ट्रीय लोक दल ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर एसएपी बढ़ाने की मांग की है, जिसमें खाद, बीज और मजदूरी की बढ़ती लागत का हवाला दिया गया है।
बारिश ने बिगाड़ा समीकरण, कोल्हू पर दाम घटे
अक्टूबर के आखिर की लगातार बारिश ने कटाई को कम से कम एक सप्ताह पीछे धकेल दिया है। रूरल वॉयस के अनुसार, खेतों में पानी भरने से किसान कटाई नहीं कर पाए और मिलें भी अधिक नमी वाला गन्ना खरीदने से बच रही हैं, क्योंकि इससे चीनी रिकवरी घटती है। इसका सीधा असर कोल्हू पर गन्ना बेचने वाले किसानों पर पड़ा है। मुजफ्फरनगर के एक किसान के हवाले से बताया गया है कि कोल्हू पर गन्ने का दाम अब 380 से 400 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास रह गया है, जबकि सीजन की शुरुआत में कोल्हू संचालकों ने 430 से 450 रुपये प्रति क्विंटल का भाव दिया था। उद्योग संगठन इस्मा के अनुसार, 26 अक्टूबर तक देशभर में 107 मिलों ने पेराई शुरू की थी, जिनमें महाराष्ट्र की 87 मिलें थीं, जबकि यूपी की केवल दो मिलें ही चालू हो पाई थीं। नवंबर में चीनी की मांग करीब 23 लाख टन और बकाया स्टॉक करीब 15 लाख टन रहने का अनुमान है।
पहली पर्ची से पहले ये 5 काम जरूर करें
पहला, सट्टा और कैलेंडर जांच लें — ई-गन्ना ऐप या समिति से पर्ची की तारीख और क्रय केंद्र पुष्टि करें। पर्ची से पहले कटाई न करें, क्योंकि कटा गन्ना सूखने पर वजन और चीनी घटाता है। दूसरा, पंजीकृत मोबाइल नंबर सक्रिय रखें, क्योंकि पर्ची की सूचना एसएमएस से भी आती है। तीसरा, मजदूर, ट्रैक्टर-ट्रॉली और कीचड़ वाले रास्तों को ध्यान में रखकर ढुलाई पहले से पक्की करें। चौथा, तौल रसीद लें, उस पर तारीख और वजन जांचें और संभालकर रखें। पांचवां, किस्म और पर्ची का मिलान करें — गलत किस्म की आपूर्ति से विवाद हो सकता है।
भुगतान में देरी हो तो क्या करें
पेराई के बाद दूसरी बड़ी चिंता भुगतान है। यूपी में कुल 122 चीनी मिलें हैं और भुगतान की गति मिलवार अलग-अलग रहती है। कुछ मिलें एक सप्ताह में भुगतान का दावा करती हैं, पर यह हर मिल पर लागू नियम नहीं है। देरी हो तो गन्ना समिति और जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें। सत्यापित हेल्पलाइन: टोल-फ्री 1800-121-3203 और 1800-180-5129, एसएमएस शॉर्टकोड 51969। अनजान नंबर पर पर्ची, बैंक खाता या ओटीपी साझा न करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: पश्चिमी यूपी में पेराई कब शुरू हुई? उत्तर: चरणों में — मलकपुर से शुरुआत, 31 अक्टूबर को मोदीनगर, 1 नवंबर को बुलंदशहर, साबितगढ़, मोरना सहित कई मिलें; मेरठ में किनौनी 1 नवंबर से, मवाना, दौराला, नंगलामल 2 नवंबर से।
प्रश्न: 2026-27 का गन्ना एसएपी घोषित हो गया है क्या? उत्तर: नहीं, 2026-27 एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र का भाव अगेती के लिए 400 रुपये और पछेती के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल था। इसे इस सत्र का भाव न मानें।
प्रश्न: किसान कितने गन्ना भाव की मांग कर रहे हैं? उत्तर: किसान संगठनों की मांग 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल के बीच है। मीडिया में 28 से 40 रुपये की बढ़ोतरी की अटकलें भी हैं, लेकिन यह आधिकारिक घोषणा नहीं है।
प्रश्न: बारिश से पेराई पर क्या असर पड़ा? उत्तर: कटाई कम से कम एक सप्ताह पिछड़ी है; कोल्हू पर दाम 430-450 से घटकर 380-400 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास आ गया है।
प्रश्न: पहली पर्ची से पहले सबसे जरूरी काम क्या है? उत्तर: सट्टा और कैलेंडर जांचना, पंजीकृत मोबाइल नंबर सक्रिय रखना, कटाई-ढुलाई की व्यवस्था पक्की करना, तौल रसीद संभालकर रखना और किस्म-पर्ची का मिलान करना।
स्रोत: नवभारत टाइम्स, दैनिक जागरण, रूरल वॉयस, द इकोनॉमिक टाइम्स (इस्मा बयान), चिनीमंडी
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