पश्चिमी यूपी की 42 चीनी मिलों में बॉयलर टेस्टिंग और मरम्मत पूरी — 20 से 25 अक्टूबर पेराई के लिए तौल कांटों का डिजिटल कैलिब्रेशन शुरू

मुजफ्फरनगर / लखनऊ (CaneUp विशेष ब्यूरो — 17 सितंबर 2026): पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना बहुल जनपदों (मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, बिजनौर, बागपत, बुलंदशहर) की सभी 42 प्रमुख चीनी मिलों में आगामी पेराई सत्र 2026-27 की यांत्रिक तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। खतौली, मवाना, दौराला, टिकोला और धामपुर मिलों में बॉयलरों की हाइड्रो-टेस्टिंग (Hydrostatic Pressure Test) सफल रही है। 20 से 25 अक्टूबर के बीच पेराई शुरू करने के लिए बांट-माप विभाग (Legal Metrology) की संयुक्त टीमों ने मिल गेट और बाह्य क्रय केंद्रों के इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटों का डिजिटल कैलिब्रेशन और चिप सीलिंग शुरू कर दी है।
📌 मुख्य घटनाक्रम और जमीनी विश्लेषण
उत्तर प्रदेश में आगामी पेराई सत्र 2026-27 के शुरू होने में अब मुश्किल से एक महीने का समय शेष बचा है। 17 सितंबर 2026 की इस बड़ी खबर के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- सीधा किसान प्रभाव: इस फैसले और घटनाक्रम से प्रदेश के लाखों गन्ना किसानों के सट्टे, आपूर्ति पर्चियों और समय पर भुगतान पर सीधा असर पड़ेगा।
- प्रशासनिक व विभागीय सक्रियता: गन्ना आयुक्त कार्यालय और संबंधित जिला गन्ना अधिकारियों (DCOs) ने पूरे मंडल में निगरानी बढ़ा दी है।
- लागत बनाम मूल्य की जंग: डीजल, खाद, कीटनाशक और श्रम लागत में आई बढ़ोतरी को देखते हुए किसान संगठन लगातार लामबंद हो रहे हैं।
📋 विस्तृत विवरण एवं तुलनात्मक तालिका
| प्रमुख मानक | वर्तमान स्थिति | आगामी सत्र 2026-27 के लिए लक्ष्य / मांग |
|---|---|---|
| गन्ना मूल्य (SAP) | ₹360 (सामान्य) / ₹370 (अगेती) | ₹500 से ₹600 प्रति क्विंटल की मांग |
| भुगतान समय-सीमा | औसतन 15 से 45 दिन का विलंब | 14 दिन के अंदर 100% भुगतान व 15% ब्याज |
| पर्ची व सट्टा व्यवस्था | 100% डिजिटल (eGanna / caneup.in) | 30 सितंबर तक ऑनलाइन घोषणा-पत्र सत्यापन |
| फसल संरक्षण | रेड रॉट व मौसम जनित नुकसान | Co-15023, Co-0118 बीज प्रतिस्थापन व प्रोपिंग |
🚜 किसानों के लिए जरूरी सलाह
- सभी किसान भाई अपनी संबंधित सहकारी गन्ना विकास समिति में जाकर अपने सट्टे और सर्वे का मिलान अवश्य कर लें।
- किसी भी प्रकार की तकनीकी सहायता या पर्ची समस्या के लिए विभागीय टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 पर तुरंत संपर्क करें।
- आगामी बुवाई के लिए केवल शोध परिषदों द्वारा प्रमाणित प्रजनक व आधारीय बीजों का ही उपयोग करें।
अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें
गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।
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